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इन पांच वजहों से गोरखपुर में ढह गया भाजपा का किला

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 14 2018 6:45PM IST
इन पांच वजहों से गोरखपुर में ढह गया भाजपा का किला

उत्तर प्रदेश की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभी सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त मिली है। इन दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है।

गोरखपुर सीट पर सपा को 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिली है। सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर में सपा की जीत से सभी हैरान हैं। यहां हमेशा भाजपा बिना किसी कड़ी लड़ाई के जीत दर्ज करती रही है। 

जब उत्तर प्रदेश और केंद्र दोनों जगह भाजपा बहुमत से सरकार में है और गोरखपुर के आदित्यनाथ सीएम हैं तो बीजेपी के हाथ से ये सीट कैसे निकल गई। इसकी ये पांच बड़ी वजहें हो सकती हैं।

विपक्ष का एकजुट होना

यूपी उपचुनाव में सपा की जीत की बड़ी वजह, बसपा के समर्थन को भी माना जा रहा है। क्योंकि बीएसपी का अपना एक वोट बैंक है, जिसे उसने सफलतापूर्वक सपा को ट्रांसफर किया है। इसी के साथ ही निषाद और पीस पार्टी का समर्थन भी सपा को मिला है।  

गोरखनाथ मंदिर के बाहर का प्रत्याशी

ऐसा कहा जाता है कि गोरखनाथ मंदिर के प्रति आस्था के चलते लोग इससे जुड़े प्रत्याशी को वोट करते आए हैं। लेकिन 30 साल बाद भाजपा ने गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर से बाहर के उपेंद्र दत्त शुक्ला को लोकसभा के चुनाव में खड़ा किया। लेकिन उन्हें योगी आदित्यनाथ के जैसे वोट नहीं मिले। सीएम योगी को इसलिए वोट मिलते थे क्योंकि वो मंदिर के महंत हैं। 

बीजेपी नेताओं के विवादित बयान

गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर उपचुनाव में जहां विपक्षी दल साथ होकर चुनाव लड़े तो वहीं भाजपा नेताओं ने कई विवादित बयान दिए। सपा जहां अपने साथ पीस पार्टी, निषाद पार्टी और दलित वोटों को साधने के लिए मेहनत करती रही तो वहीं बीजेपी नेता त्रिपुरा की जीत का जश्न मनाते रहे।  

बच्चों की मौत का मामला 

अगस्त 2017 में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में एक रात में 34 बच्चों की मौत और यहां पिछले तीन दशक से लगातार मौत का तांडव रच रहे इंसेफेलाइटिस का जिक्र सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लगातार अपने भाषणों में किया।  

अखिलेश अपने हर भाषण में लोगों को बताते रहे कि मुख्यमंत्री होने के बावजूद योगी के ही क्षेत्र में कुछ लाख की ऑक्सीजन के चलते बच्चों की मौत हुई और फिर उनके मंत्रियों ने इस पर गैर जिम्मेदाराना बयान दिए। ये भाजपा की हार का एक कारण हो सकता है।  

विकास में कमी 

गोरखपुर सीट हमेशा लोगों का ध्यान खींचती आई है, इसके पीछे की वजह है गोरखनाथ मंदिर के महंत का चुनाव लड़ना।  इस सीट से बीते कई सालों तक जीते आदित्यनाथ अपने भाषणों को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। 

यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि गोरखपुर में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। बस मंदिर की आस्था के चलते योगी आदित्यनाथ को वोट मिलते रहे हैं। अह जब योगी सीएम बन गए हैं फिर भी एक साल में गोरखपुर को कुछ खास नहीं मिला। इस बात को लेकर भी जनता में कहीं न कहीं नाराजगी थी। 

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up by poll verdict five reasons for bjp defeat in gorakhpur

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