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ट्रेन हादसे के पीड़ितों ने बयां किया दर्द: आंखों के सामने ट्रेन की झूलती बोगियां, खून से..

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 21 2017 9:05AM IST
ट्रेन हादसे के पीड़ितों ने बयां किया दर्द: आंखों के सामने ट्रेन की झूलती बोगियां, खून से..

शनिवार को मुजफ्फरनगर जिले के खतौली में हुए हादसे में 23 से ज्यादा लोगों की मौत और कई अन्य लोग घायलों का अस्पताल में भले ही इलाज चल रहा है लेकिन हादसे से उनके दिलो-दिमाग अब भी गहरे सदमे में हैं।

हालात यह है कि घायलों दर्द जागने नहीं देता और नींद में आए बुरे सपने सोने नहीं देते। आंखों के सामने ट्रेन की झूलती बोगियां, दबे, पिचले मृत शरीर, खून से लथपथ चीखते लोग नजर आते हैं।

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हादसे के बाद ही बड़ी संख्या में जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों को ज्यादा क्रिटिकल कंडीशन होने पर मेरठ रेफर कर दिया गया है। वहीं कुछ घायलों को आसपास के पड़ोसी जिलों के अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया है।

दरवाजे चिपके थे, खिड़की तोड़ निकले

हादसे के बाद यहां जिला अस्पताल में शरीर की चोटों और दर्द का इलाज करा रहे 48 वर्षीय मोहम्मद दिलशाद को अब भी अपने जिंदा बचने का भरोसा नहीं हो रहा। उनके लबों पर सिर्फ यही अल्फाज हैं- ‘कुदरत का करिश्मा है।'        

उत्तर प्रदेश के इस शहर के निवासी दिलशाद दिल्ली आने-जाने के लिए अक्सर पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस का इस्तेमाल करते हैं। वह दिल्ली में काम करते हैं। इस शनिवार की शाम भी वह इसी ट्रेन के एस-2 कोच में सवार थे जो हादसे के बाद एक दूसरे डिब्बे के ऊपर चढ़ गया।

हादसे में वह एस-2 कोच में फंस गए। उन्होंने कहा, ‘हम सभी डिब्बे में अनिश्चितता में झूल रहे थे। मेरे कई सहयात्रियों को भयावह चोट आई है। मैं सिर्फ इतना याद कर सकता हूं कि शाम करीब पांच बजकर चालीस मिनट पर वहां बेहद तेज शोर और लगातार कर्कश ध्वनि हुई और इसके बाद बोगियां पलट गयीं।'

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एस-2 कोच को इतनी तेज झटका लगा कि इसके सभी पहिये निकल गए और वह पेंट्री कार पर झूलने लगा और इसका एक सिरा पास के एक घर में घुस गया। दिलशाद ने बताया, ‘दरवाजे दब गए थे इसलिये हमनें आपातकालीन खिड़की का रूख किया, धीरे-धीरे हम सभी नीचे के डिब्बे की छत पर पहुंच गए और बाद में किसी तरह नीचे उतरे।'

सोने पर आते हैं बुरे सपने

जिला अस्पताल में पैर में प्लास्टर के लिए ले जाए जाने से पहले शहर के रहने वाले 32 वर्षीय शारिक नसीम ने कहा कि दुर्घटना की बात सोच कर ही मैं कांप जाता हूं।' मेरा पैर भी टूट गया है, सिर भी गहरी चोट लगी है। मुझे यह भी याद नहीं कि मैं उत्कल के एस-5 में था या एस-6 में।

दर्द इतना है कि जाग नहीं सकता है और दवा लेकर सोने चाहता हूं तो उन्हें बुरे सपने आते हैं। उठकर बैठकर बैठने पर सिर घूमने लगता है।

       

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