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अगली पीढ़ी के लिए मील का पत्थर बनेगा भारतीय महिला क्रिकेट टीम का प्रदर्शन

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 24 2017 4:28PM IST
अगली पीढ़ी के लिए मील का पत्थर बनेगा भारतीय महिला क्रिकेट टीम का प्रदर्शन

शिखर तक पहुंचकर इतिहास रचने से एक कदम दूर गई भारतीय महिला क्रिकेट टीम के उसके फाइनल तक की सफर ने आने वाली पीढ़ी को सपने देखने के लिए प्रेरित जरूर कर दिया है। 

क्रिकेट के दीवाने इस देश में पुरूष क्रिकेटरों की लोकप्रियता के आगे हमेशा गुमनामी में रही महिला क्रिकेटरों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। विश्व कप खेलने जब मिताली राज की अगुवाई में टीम इंग्लैंड रवाना हुई तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये लड़कियां फाइनल तक का सफर तय करेंगी।

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फाइनल में इंग्लैंड से हारकर भारत उपविजेता रहा लेकिन इस प्रदर्शन की अहमियत सिर्फ जीत हार के इस समीकरण तक सीमित नहीं है। सोशल और मुख्यधारा के मीडिया में हो रही महिला क्रिकेटरों की वाहवाही भी इसके मायने बयां करने के लिये नाकाफी है। 

इसके दूरगामी परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेंगे। पहली बार महिला क्रिकेट का फाइनल इतने ज्यादा लोगों ने देखा। पिछले एक महीने में इस प्रदर्शन ने भारतीय खेलप्रेमियों का नजरिया ही बदल दिया। 

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हमेशा जीत को प्रदर्शन का पैमाना मानने वाले प्रशंसक इस हार में भी जश्न मना रहे हैं जिसके मायने हैं कि टीम के प्रदर्शन ने कहीं ना कहीं उनके दिल पर गहरी छाप छोड़ी है।    

इंदौर की अनन्या से लेकर चंडीगढ की अमृता तक अब कोई अगला सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी या विराट कोहली बनने का सपना नहीं देखेगी क्योंकि उनके पास हरमनप्रीत कौर, वेदा कृष्णामूर्ति, शिखा पांडे, मिताली राज और झूलन गोस्वामी जैसे क्रिकेटर हैं जिन्हें वे अपना आदर्श बना सकती हैं।  

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हरमनप्रीत सिंह ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ शतकीय पारी में जब छक्के लगाये तो वह मनोरंजन के लिये नहीं थे बल्कि आने वाले समय में भारतीय महिला क्रिकेट के दबदबे की दस्तक थी।       

महिला क्रिकेटरों ने साबित कर दिया कि लंबे समय तक प्रशासनिक उदासीनता झेलने के बावजूद वे सिर्फ नाम के लिये विश्व कप खेलने नहीं उतरी हैं बल्कि उनके इरादे आसमान छूने के हैं। 

भारत के पास अब कई दमदार स्ट्रोक्स खेलने वाली खिलाड़ी हैं और पिछले चार दशक में ऐसा पहली बार देखने को मिला है। इस प्रदर्शन के बाद खिलाड़ियों पर उपहारों की बौछार होना तय हैं और शायद लड़कियों को खेलों में भेजने को लेकर अभिभावकों का नजरिया भी बदलेगा। 

महिला आईपीएल, आस्ट्रेलिया की महिला बिग बैश लीग जैसे टूर्नामेंटों के बारे में सोचना अभी शायद दूर की कौड़ी होगा। महिला क्रिकेट को लेकर बनी इस हाइप के बीच बीसीसीआई को अगले सारे टूर्नामेंटों का प्रसारण सुनिश्चित करके इसे बनाये रखने की कोशिश करनी चाहिये।        

मिताली ने फाइनल के बाद कहा था ,‘अब देश में लोगों का नजरिया महिला क्रिकेट को लेकर बदलेगा।'

उम्मीद है कि अब कोई भविष्य की मिताली राज से सवाल नहीं करेगा,‘‘ आपका पसंदीदा पुरूष क्रिकेटर कौन है।'

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indian women cricket team to become milestone for next generation

-Tags:#Indian women team#World Cup 2017
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