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तो इसलिए उतारी जाती है बारात आने पर दूल्हे की आरती

haribhoomi.com | UPDATED Aug 29 2016 3:35PM IST
नई दिल्ली. शादी के समय पर जब लड़की के दरवाजे पर बारात आती है तो कई तरह की रस्में होती हैं। जैसे दूल्हे की नाक पकड़ना उसके ऊपर चावल फेंक कर जाना। कई लोग शादी के समय लड़के के द्वार प्रवेश के साथ ऐसी ही कई रस्में करवाते हैं क्योंकि उनके मन में कई प्रकार के सवाल रहते हैं कि पुरूष वर्ग ने जो वर चुना है वह उनकी बेचटी (दुल्हन) के लिए ठीक है या नहीं। लोगों के मन की ऐसी ही कई शंकाओं को दूर करने के लिए आरती का रिवाज बनाया गया है और यह परंपरा प्राचीन युग से चली आ रही है। 
 
कई जगह जब बारात आती तो 21 दीपकों की रोशनी में सास या कोई बड़ी अनुभवी स्त्री निरीक्षण करती कि वर लंगड़ा लूला, काना आदि कोई दोषमय तो नहीं है। कच्चा सूत से वर की छाती, लम्बाई आदि का नाप करने का भी रिवाज। इस प्रक्रिया के बाद संतुष्ट होने पर ही वर को घर में आने की अनुमति मिलती थी।
 
कई बार सुना गया कि वर ठीक न होने के कारण बारात को द्वार से ही वापस लौट जाता पड़ता था। रपूजा या द्वारचार बारात जब दरवाजे पर लगती है तो पूजा की विधि होती है। दूल्हे की आरती उतारी जाती है। उस पर अक्षत आदि फेंका जाता है। इस समय के गीतों का बहुत प्रचार नहीं है।
 
इसी तरह राजस्थान में जिस समय बारात आती है तो दूल्हे की आरती उतारने के बाद उससे चिड़िया उड़वाई जाती है। हाथ में एक डंडी लेकर दूल्हा उछलकर दरवाजे पर बंधी लकड़ी की काठ पर लगी हुई चिड़िया उड़ाता है। 
 
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