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'सामाजिक आतंकवाद है लिव-इन रिलेशनशिप'

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 20 2017 3:14PM IST
'सामाजिक आतंकवाद है लिव-इन रिलेशनशिप'

राजस्थान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रकाश टाटिया ने लिव-इन रिलेशनशिप को 'सामाजिक आतंकवाद' का नाम दिया है। झारखंड हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के बाद छोड़ी हुई महिलाएं तलाकशुदा महिलाओं से भी बुरी है।

 
उन्होंने कहा कि ये कौन सी आजादी है जिसमे समाज को बिना बताए किसी के साथ रहा जाता है। इससे समाज कलंकित होता है। यही नहीं उन्होंने विवाह के मामले में रेजिस्ट्रेशन के जरिए लिव-इन रिलेशनशिप को नियंत्रित करने के कानून का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप पर रोक लगा दी जानी चाहिए।
 
 
रोक लगाने के लिए कानून आवश्यक है जैसे शादी के लिए रेजिस्ट्रेशन जरूरी बना दिया गया है। दो लोग साथ रहकर समाज की प्रतिष्ठता को दांव पर नहीं लगा सकते। उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के चलते बहुत सी दुखद कहानियां सामने आई हैं। एक 50 साल की महिला को कैंसर की बिमारी होने के बाद उसका पार्टनर उसे छोड़कर चला गया। उसने एचआरसी से मदद मांगी है अब इसे क्या बताना चाहिए यह देश को तय करना होगा।
 
गौरतलब है कि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा भी कह चुकी हैं कि वो लिव इन रिलेशनशिप के खिलाफ कैंपेन चलाएंगी क्योंकि यह हमारी संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह के रिश्ते खत्म होने पर सबसे ज्यादा दुख महिलाओं को होता है और ऐसी महिलाओं की मदद के लिए कोई कानून नहीं है क्योंकि यह हमारी संस्कृति के खिलाफ है।
 
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live in relationship is social terrorism

-Tags:#Rajasthan Human Rights Commission
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