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हर सांस में घुल रही है मौत, अगर अभी नहीं रुके तो अंजाम होगा भयावह

हर्षित कुमार हर्ष | UPDATED Nov 9 2017 6:52PM IST
हर सांस में घुल रही है मौत, अगर अभी नहीं रुके तो अंजाम होगा भयावह

पिछले तीन दिनों से दिल्ली और आस-पास के इलाकों में जिस तरह से स्मॉग नें खतरनाक रूप धारण कर लिया है, इसके आगे भी जारी रहने की संभावना हैं। अभी जारी तस्वीर के अनुसार दिल्ली के लोधी रोड में पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा 500 के पार पहुंच गया है, जो कि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

क्या है मानक?

हवा में पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा तय मानक के हिसाब से 300 के ऊपर खतरनाक हो जाती है। पीएम 10 वो कण होते हैं जिनकी मात्रा हवा में 10 माइक्रोन प्रतिग्राम होती है और यह हमारे सांस के साथ इन्हेल हो जाती है। वहीं पीएम 2.5 कण की मात्रा 2.5 माइक्रोन प्रतिग्राम होती है।

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क्यों बढ़ा प्रदूषण?

हवा में इनकी बढ़ती मात्रा दिल्ली और आस-पास के क्षेत्र को गैस चैंबर के रूप में तब्दील कर चुकी है। यहां पर लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। वातावरण के जानकारों का मानना है कि इस स्मॉग की वजह दिल्ली के आस-पास के राज्यों में किसानों के पराली जलाना है।

इसके साथ ही दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्य और गाड़ियों की बढ़ती संख्यां है। अगर यही हाल रहा तो ये यहां रहने वाले लोगों के लिए खतरे की घंटी बजा रही है।

पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर होती है राजनीति

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने दिल्ली में चलने वाले 10 साल से पुराने डीजल गाड़ियों पर भी बैन लगाया, मगर हर बैन को राजनीतिक रूप देकर उसका विरोध किया जाता है। इतना ही नहीं एनजीटी नें खुले में कूड़ा जलाने पर भी बैन लगाया है मगर फिर भी खुले में कूड़े को जलाया जा रहा है।

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पिछले साल भी इनकी मात्रा में भयानक वृद्धि देखने को मिली थी, जिसके बाद पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाने पर बैन लगा दिया था। मगर किसानों ने बैन होने के बावजूद पराली जलाए, जिसकी वजह से दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में स्मॉग ने खतरनाक रूप ले लिया है।

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई थी, मगर फिर भी लोगों ने जमकर आतिशबाजी की।

जानलेवा बन गया है सांस लेना

इस प्रदुषण के लिए जिम्मेवार हम ही हैं। हम अक्सर नियमों को ताक पर रखकर अपने फायदे के बारे में सोचते हैं। इस बढ़ते प्रदूषण की वजह से जल्द ही पर्यावरण की सुंदरता खत्म हो जाएगी। जिस हवा को हम जीवन देने वाली कहते हैं आज वही हवा हमारे लिए दम घोटूं बन गई है।

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हम खुली हवा में सांस भी नहीं ले पा रहे हैं, सुबह की ताजा हवा लेना तो दूर की कौड़ी लग रही है। यहां तो सुबह भी मास्क पहनकर घूमना पड़ रहा है। सांस के साथ-साथ आंखों में भी जलन होती है, लोग तेजी से अस्थमा के रोगी बनते जा रहे हैं।

अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं है जब हर शहर में इतना प्रदूषण हो जाएगा जहां इंसान क्या जानवरों का रहना भी दूभर हो जाएगा।

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pollution on its last stage we are inching towards danger

-Tags:#Delhi Smog#Air Pollution#Severe pollution measure#Pollution Control#NGT
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