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इन परिस्तिथियों की वजह से कांग्रेस का हुआ ये हाल, अतीत से सीखे सबक

प्रभात कुमार रॉय | UPDATED Aug 6 2017 10:26AM IST
इन परिस्तिथियों की वजह से कांग्रेस का हुआ ये हाल, अतीत से सीखे सबक

भ्रष्टाचार राजनीतिक अपसंस्कृति कांग्रेस पार्टी की रग-रग में कितनी गहराई तक व्याप्त हो चुकी है, इसका सबसे ताजा और ज्वलंत उदाहरण अभी हाल ही में इन्कम टैक्स का छापा है, जो कर्नाटक सरकार में ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार के 64 ठिकानों पर पड़ा।

तकरीबन 125 इन्कम टैक्स अफसरों द्वारा इन्कमटैक्स एक्ट की धारा 132 के तहत पुख्ता जानकारियों के आधार पर डीके शिवकुमार के तमाम ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन संचालित किया गया। इन छापों के दौरान करीब ग्यारह करोड़ रुपयों की नकदी बरामद हुई।  

इस घटनाक्रम के बावजूद डीके शिवकुमार ऊर्जा मंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं और कांग्रेस की कर्नाटक की कांग्रेस हुकूमत ने भी शिवकुमार को अभी तक मंत्रिमंडल से बर्खास्त नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि डीके शिवकुमार के बंगलूरु स्थित आलीशान रिजॉर्ट में ही गुजरात  कांग्रेस पार्टी के 44 विधायक ठहरे हुए हैं, जिनको आगामी आठ अगस्त को संपन्न होने वाले राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में गुजरात से कर्नाटक लाया गया है, ताकि वे अन्य छह कांग्रेस विधायकों का अनुगमन करके भाजपा की पांतों में शामिल न हो जाएं।

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सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल गुजरात से पुनः राज्यसभा के लिए उम्मीदवार हैं। डीके शिवकुमार के रिजार्ट में भी आयकर अधिकारियों ने छापा मारा। राज्यसभा में कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने फरमाया कि जो नाजुक वक्त हुकूमत द्वारा छापे के लिए चुना गया है, वस्तुतःभाजपा सरकार की राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को हराने की कुटिल साजिश है।

छापे के दौरान सीआरपीएफ को तैनात किया गया, ताकि कांग्रेस विधायकों में दहशत पैदा की जा सके। लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर आरोप लगाया कि मोदी सरकार भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने पर आमादा हो चुकी है। कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी आयकर छापों के लिए चुने गए वक्त पर सवाल खड़ा किया है।

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छापों से बौखलाई कांग्रेस नेता मोदी सरकार पर कुछ भी संगीन आरोप क्यों न लगाते रहें, किंतु इस वक्त उनको गहन गंभीर तौर पर सोचना चाहिए कि राजनीतिक और आर्थिक भ्रष्टाचार की अपसंस्कृति ने कांग्रेस पार्टी को भारत के राजनीतिक पटल पर कहां से कहां लाकर पटक दिया है।

कांग्रेस के नेतृत्व में मनमोहन सरकार के तहत यूपीए 2 के कार्यकाल में एक लाख अस्सी करोड़ के 2जी स्कैंडल से लेकर तीन लाख करोड़ के कोयला स्कैंडल तक के लाखों-करोड़ों रुपयों के अनेक विराट घोटाले हुए, जिसका सीधा सपाट परिणाम रहा कि 2009 के लोकसभा चुनाव में 208 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस पार्टी 2014 के चुनाव में केवल 44 सीटों पर सिमट कर रह गई है।

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केंद्र के साथ-साथ भारत के 15 प्रांत कांग्रेस के हाथों से निकल चुके हैं। बड़े प्रांतों में केवल कर्नाटक और पंजाब में ही कांग्रेस सरकार रह गई है। आज भी कांग्रेस अपने इतिहास से सीखने के लिए तैयार नहीं दिख रही है। कांग्रेस अपने मंत्री का बाकायदा बचाव करती हुई नजर आ रही है।

भाजपा ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा बुलंद किया है। कांग्रेस नेतृत्व को यह संजीदा कोशिश करनी चाहिए कि भाजपाई नारा वास्तव में साकार नहीं होने पाए। कांग्रेस पार्टी अपने स्वर्णिम अतीत के राष्ट्रीय आदर्शो को स्मरण करके आगे बढ़ना चाहिए अन्यथा कांग्रेस के राजनीतिक अवसान को कदापि रोका नहीं जा सकेगा।

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