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2जी घोटाला: सीबीआई की साख पर उठे सवाल, देश में मचा बवाल

प्रभात कुमार रॉय | UPDATED Dec 24 2017 9:26PM IST
2जी घोटाला: सीबीआई की साख पर उठे सवाल, देश में मचा बवाल

सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीष ओपी सैनी द्वारा पर्याप्त सबूतों के आभाव में 2-जी घोटाले के सभी अभियुक्तों को बाइज्जत बरी कर दिया। इसके बाद तो जैसे भारतीय राजनीति में कोहराम मच गया है। डीएमके ने तमिलनाडु में दीपावली सरीखा जश्न मना डाला और कांग्रेस पार्टी के लीडर भी खुशी से झूमने लगे हैं। जबकि सर्वविदित है कि 2-जी घोटाले का अंतिम निर्णय कदाचित नहीं आया है और अभी तो हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट द्वारा अपीलों को सुनना और परखना शेष है।

जयललिता और शशिकला पर भ्रष्टाचार केस पर निर्णय देते हुए हाईकोर्ट द्वारा उनको बरी कर दिया गया था, किंतु सर्वोच्च अदालत द्वारा दोषी करार दिया गया। हांलाकि अंतिम फैसला आने से पूर्व ही जयललिता का अंतकाल हो गया था। उनकी निकट सहयोगी रही शशिकला आजकल कारावास भुगत रही है। इसलिए 2-जी घोटाले में सीबीआई कोर्ट द्वारा अभियुक्तों के बरी किए जाने पर जश्न मनाने का कोई ठोस कारण नहीं है।

इस घोटाले का पर्दाफाश करने वाले विनोद राय के विरुद्ध जश्न में डूबे कांग्रेसियों ने संसद के अंदर और बाहर हल्ला बोल दिया है। क्योंकि वर्ष 2011 में 2-जी घोटाला कांड का पर्दाफाश तत्कालीन कंपोट्रोलर और ऑडिटर जनरल विनोद राय द्वारा किया गया था। अत्यंत कर्मठ, बेहद ईमानदार और निष्ठावान आईएएस अधिकारी की छवि से ओतप्रोत रहे विनोद राय पर कांग्रेस और सपा बिफर पड़े हैं।

कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने फरमाया कि एनडीए सरकार द्वारा विनोद राय से उनके सभी वर्तमान पदों से इस्तीफा लिया जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी ने तो विनोद राय को संसद में तलब करने की मांग पेश कर दी है। उल्लेखनीय है कि विनोद राय वर्तमान में बीसीसीआई के चैयरपर्सन, केरल इंफ्रास्ट्रचर एंड इनवेस्टेमेंट बोर्डके अध्यक्ष, बैंक बोर्ड ब्यूरो के भी चैयरमैन हैं।

किंतु इनमें से कोई पद नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रदान नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा विनोद राय को बीसीसीआई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। केरल सरकार द्वारा केआईआईबी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सीबीआई अदालत द्वारा 2-जी घोटाले में सीबीआई पर ही नकारात्मक टिप्पणी की है, किंतु विनोद राय के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं लिखा गया है। फिर कांग्रेस किस कारणवश विनोद राय के विरुद्ध आक्रमक है।

कांग्रेस पार्टी का चरित्र भ्रष्टाचार के दलदल में प़ं नेहरु शासनकाल से ही था। तब जीप स्कैंडल और मूंदणा कांड उजागर हुए। फिर इंदिरा गांधी की हुकूमत में नागरवाला कांड, राजीव गांधी की सरकार में बाफोर्स घोटाला, नरसिम्हा राव का यूरिया घोटाला और मनमोहन सिंह हुकूमत में तो घोटालों का रिकार्ड कायम हुआ। भ्रष्टचारी सरकारों में शानदार और ईमानदार अधिकारियों की दुर्गति हुई है, उसके जीवंत उदाहरण गोविंद राघव खैरनार, अशोक खेमका सरीखे अनेक अधिकारी रहे हैं।

कांग्रेस अब भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले विनोद राय पर हल्ला बोलकर आखिकार क्या सिद्ध करना चाहती हहै। क्या कांग्रेसी हल्लाबोल कारनामों से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल तोड़ सकेंगें। जिन्होने अपने व्यक्तिगत सुख-दुख और मलाईदार पोस्टिंग्स की कतई परवाह न करते हुए सदैव अपना संवैधानिक फर्ज अदा किया है। आखिरकार ऐसे ही अनेक ईमानदार और कर्मठ अधिकारियों के दमखम पर ही भारतीय प्रशासन की साख अभी तक बची हुई है।

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