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राइट टू प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद 'आधार' पर बढ़ा संकट

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 24 2017 3:34PM IST
राइट टू प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद 'आधार' पर बढ़ा संकट

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक के बाद अब राइट टू प्राइवेसी पर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला कांस्टीट्यूशन के आर्टिकल-141 के राइट टू प्राइवेसी के तहत कानून माना जाएगा। 

9 जजों की बैंच ने राइट टू प्राइवेसी पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि राइट टू प्राइवेसी मौलिक अधिकार है। लेकिन अब सवाल है कि क्या इस फैसले के बाद आधार पर भी इसका असर पड़ेगा या नहीं। 

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इस फैसले के बाद आधार, पैन, क्रेडिट कार्ड की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। वहीं, इस फैसले के आने के बाद अब आपके आधार की जानकारी लीक नहीं की जा सकेगी।

कोर्ट ने राइट टू प्राइवेसी को मौलिक अधिकार माना है जिसके बाद अब बेंच यह फैसला करेगी कि आधार कार्ड के विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाए या नहीं। आधार कार्ड के संबंध में मामला 5 जजों की आधार बेंच के पास भेजा है।

अगर कोर्ट आधार को राइट टू प्राइवेसी के अंतर्गत लाती है तो इसका असर पेन, बैंक और सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाले आधार कार्ड को खत्म कर दिया जाएगा और ऐसे में वापस वोटर आईडी कार्ड को ही वैध माना जाएगा।  

आपकी जानकारी के लिेए बता दें कि याचिकाकर्ताओं का कोर्ट से कहा था कि लोग आधार कार्ड के लिए सरकार को बायोमिट्रिक और निजी विवरण देते हैं और अगर ये व्यावसायिक संस्थान द्वारा इस्तेमाल किया जाता है तो क्या ये निजता का उल्लंघन है?

गौरतलब है कि काफी समय से आधार कार्ड की वैधानिकता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दायर की गई थीं। इससे पहले साल 1954 और साल 1962 में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसले निजता के अधकार के संदर्भ में आए थे। जिनमें यह कहा जा चुका है कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है। 

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मौजूदा मामले में केंद्र सरकार का तर्क है कि अगर निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार मान लिया जाएगा तो व्यवस्थाओं का चलतना मुश्किल हो जाएगा।

राज्यसभा में वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने 16 मार्च साल 2016 को आधार विधेयक पर बहस के दौरान यह कहा था कि निजता एक मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है

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will right to privacy end the necessity of aadhar card

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