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...जब जापान के हमले का भारत को था डर

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 10 2017 8:06AM IST
...जब जापान के हमले का भारत को था डर

भारत की आजादी के लिए चलाया गया सबसे महत्वपूर्ण अभियान भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल हो गए। संसद में इस मौक़े पर विशेष सत्र बुलाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मौक़े पर भारत छोड़ो आंदोलन को याद करते हुए इसकी जमकर सराहना की।

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1942 में जब यह आंदोलन शुरू हुआ तो कांग्रेस ने साफ़ कहा कि अब इस बारे में कोई बातचीत नहीं होगी और अंग्रेज़ों को तत्काल भारत छोड़कर जाना होगा। यह आंदोलन दूसरे विश्व युद्ध के बिल्कुल बीच में शुरू हुआ था।

जापान करना चाहता था भारत पर हमला

उस वक़्त हालात ये थे कि एक तरफ़ से जापान पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया को पार करते हुए भारत की तरफ़ बढ़ रहा था। अंग्रेज़ों ने दक्षिणी-पूर्व एशिया में जापान के सामने पूरी तरह से सरेंडर कर दिया था।

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महात्मा गांधी सोच रहे रहे थे ऐसे में जापान ने भारत पर हमला किया तो क्या होगा? कांग्रेस इस बात को लेकर बहुत चिंतित हो रहा था कि हमले की सूरत में अंग्रेज़ छोड़कर भाग गए तो यहां फिर जापानियों का राज होगा।

दूसरे विश्व युद्ध में जापान और ब्रिटिश एक दूसरे के दुश्मन थे। दोनों दुनिया भर में एक दूसरे से लड़ रहे थे। ऐसे में भारतीय नेताओं के मन में जापान के हमले की आशंका घर करना कोई चौंकाने वाली बात नहीं थी। ऐसा लग रहा था कि जापान भारत में भी अंग्रेज़ों पर हमला कर सकता है।

 
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when india was afraid of japan attack

-Tags:#India#Japan#Quit India Movement#Mahatma Gandhi
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