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आर्टिकल 35 ए जिसपर सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा 6 हफ्तों में बड़ा फैसला

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 16 2017 6:22PM IST
आर्टिकल 35 ए  जिसपर सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा 6 हफ्तों में  बड़ा फैसला

जम्‍मू-कश्‍मीर में आर्टिकल 35 ए हटाने की बात भर पर बवाल मचा हुआ है। कट्टरपंथियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी ये बात पच नहीं रही है। नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला ने तो यहां तक कह दिया है कि संविधान की धारा 35ए को रद्द किए जाने पर 'जनविद्रोह' की स्थिति पैदा होगी। 

आर्टिकल 35ए से जम्मू-कश्मीर सरकार और वहां की विधानसभा को स्थायी निवासी की परिभाषा तय करने का अधिकार मिलता है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार को ये अधिकार है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए लोगों और अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह की सुविधाएं दे या नहीं दे।

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14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था। इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 ए जोड़ दिया गया।

बहुत कम लोगों को पता है कि अनुच्छेद 35 ए धारा 370 का ही हिस्सा है। इस धारा की वजह से कोई भी दूसरे राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है।

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1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बनाया गया था। इसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया है। इस संविधान के मुताबिक स्थायी नागरिक वो व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो। या फिर उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो। साथ ही उसने वहां संपत्ति हासिल की हो।

अनुच्छेद 35 ए के मुताबिक अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहर के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।

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-Tags:#Article 35A#Jammu-Kashmir#Supreme Court#Rajendra Prasad
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