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पत्नी को रखने के लिए पति पर दबाव नहीं डाल सकती अदालत: SC

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 27 2017 9:21AM IST
पत्नी को रखने के लिए पति पर दबाव नहीं डाल सकती अदालत: SC

कोर्ट ‘पत्नी को रखने' के लिए पति को मजबूर नहीं कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पेशे से पायलट एक व्यक्ति को अलग रह रही पत्नी और बेटे की परवरिश के लिए 10 लाख रुपए अंतरिम गुजारा भत्ता के तौर पर जमा कराने के लिए कहा है।

शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस जमानत आदेश को बहाल कर दिया है जिसे पति द्वारा सुलह समझौता मानने से इनकार करने के कारण रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति आदर्श गोयल और न्यायमूर्ति यू यू ललित ने कहा कि हम एक पति को पत्नी को रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

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न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि यह मानवीय रिश्ता है। आप (व्यक्ति) निचली अदालत में 10 लाख रुपए जमा कराएं जिसे पत्नी अपनी फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए बिना शर्त निकाल पाएगी। जब व्यक्ति के वकील ने कहा कि राशि को कम किया जाए तो पीठ ने कहा कि शीर्ष न्यायालय परिवार अदालत नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि इस पर कोई बातचीत नहीं हो सकती है। पीठ ने कहा कि अगर आप तुरंत 10 लाख रुपए जमा कराने के लिए राजी हैं तो जमानत आदेश को बहाल किया जा सकता है। इसके बाद वकील 10 लाख रुपए जमा कराने के लिए राजी हो गया, लेकिन थोड़ा वक्त मांगा।

10 लाख जमा 4 हफ्ते

पीठ ने कहा कि हम याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए बयान मद्देनजर जमानत के आदेश को बहाल करने को तैयार हैं कि याचिकाकर्ता चार हफ्ते के अंदर 10 लाख रुपए जमा कराएगा। इस राशि को पत्नी बिना किसी शर्त के निकाल सकती है ताकि वह अपनी और अपने बच्चे की फौरी जरूरतों को पूरा कर सके।

समझौते की आजाद

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह रकम आगे की कार्यवाही के मुताबिक एडजस्ट की जा सकेगी। साथ ही दोनों पक्ष समझौते के लिए भी आजाद हैं। ट्रायल कोर्ट में पेंडिंग कार्यवाही तीन महीने में पूरी की जा सकती है, जैसा कि हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिया।

क्या है मामला?

यह केस पति-पत्नी के बीच तकरार का है। इसमें उनके नाम उजागर नहीं किए गए हैं। पति पर दहेज के लिए तंग करने समेत आईपीसी के कई एक्ट में केस दर्ज है। उसे पत्नी और बच्चे को साथ रखने का समझौता करने की शर्त के साथ जमानत दी गई थी। लेकिन उसने बाद में उन्हें साथ रखने से इनकार कर दिया। इस पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने पति की जमानत याचिका की अर्जी 11 अक्टूबर को रद्द कर दी थी।

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supreme court says court cannot force husband to keep wife

-Tags:#Supreme court#Divorce Maintenance#Husband#Wife

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