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गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों पर सख्त SC, 4 हफ्ते में मांगा जवाब

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 21 2017 4:09PM IST
गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों पर सख्त SC, 4 हफ्ते में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से कहा कि वे किसी भी स्वयंभू गोरक्षकों को संरक्षण नहीं दें। इसके साथ ही न्यायालय ने गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा की घटनाओं पर उनसे जवाब दाखिल करने को कहा है।

इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति एम शांतानागौदर की तीन सदस्यीय खंडपीठ से केंद्र ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है। लेकिन फिर भी हम देश में गोरक्षा के नाम पर हो रही किसी भी प्रकार की गतिविधियों का समर्थन नहीं करते हैं।

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पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आगे हुए सोशल मीडिया पर अपलोड की गई गोरक्षा के नाम पर हिंसक सामग्री को हटाने के लिए केंद्र और राज्यों से सहयोग मांगा है। 

सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा, ‘कानून-व्यवस्था राज्य के अधीन है और केंद्र सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार किसी भी स्वंयभू गोरक्षक समूह का कोई स्थान नहीं है।'

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भाजपा शासित गुजरात एवं झारखंड की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि गोरक्षा संबंधी हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।

पीठ ने उनका बयान दर्ज कर केंद्र और अन्य राज्यों को हिंसक घटनाओं के संबंध में अपनी रिपोर्ट चार सप्ताह में दाखिल करने का निर्देश दिया है। पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई छह सितंबर को करेगी।

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गौरतलब है कि इससे पहले कोर्ट ने पिछले साल 21 अक्तूबर को दायर याचिका पर छह राज्यों से सात अप्रैल को जवाब मांगा था। इस याचिका में कथित गोरक्षा समूहों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है जो कथित रूप से हिंसा कर रहे हैं और दलितों एवं अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन ए पूनावाला ने अपनी याचिका में कहा है कि इन गोरक्षा समूहों द्वारा की जाने वाली कथित हिंसा इस हद तक बढ़ गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन लोगों के बारे में कहा था कि वे समाज को नष्ट कर रहे हैं।

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supreme court asked centre and state govts on cow vigilantism

-Tags:#Supreme Court#Cow Vigilantism
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