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इस शख्स के एक फैसले ने दुनिया को बचाया था तृतीय विश्वयुद्ध से, जानिए कौन थे कर्नल पेत्रोव

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 21 2017 5:55AM IST
इस शख्स के एक फैसले ने दुनिया को बचाया था तृतीय विश्वयुद्ध से, जानिए कौन थे कर्नल पेत्रोव

अपनी सूझबूझ और बेमिसाल काबिलियत की वजह से दुनिया को तृतिय विश्वयुद्ध से बचाने वाले कर्नल स्तेनिस्लाव पेत्रोव का निधन हो गया। 

पेत्रोव का जन्म 7 सितंबर 1939 को रूस में हुआ था। हालांकि, कर्नल पेत्रोव का निधन 19 मई, 2017 को ही 77 वर्ष की उम्र में मॉस्को के अपने घर में हो गई थी, लेकिन इसकी जानकारी दुनिया के सामने 18 सितंबर को आई। 

7 सितंबर को पेट्रोव के जन्मदिन पर जर्मन फिल्ममेकर कार्ल शूमाकर ने उन्हें फोन किया तब पेट्रोव के बेटे दिमित्री पेट्रोव ने उन्हें बताया कि 19 मई को उनके पिता की मौत हो गई थी। 

आपको बता दें कि पेट्रोव के एक अहम फैसले के कारण ही अमेरिका और सोवियत संघ के बीच परमाणु युद्ध होने से बचा। जिसके बाद उन्हें 'मैन हू सेव्ड द वर्ल्ड' भी कहा जाने लगा।

उनके द्वारा उठाए गए इस कदम की वजह से संयुक्त राष्ट्र ने भी उन्हें शांति पुरस्कार सम्मानित किया था। 

दरअसल, 1983 में शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और रूस के बीच तनाव काफी बढ़ चुका था। अमेरिकी हमले से निपटने के लिए रूस हर तरह से तैयार बैठा था। पेट्रोव 26 सितंबर 1983 को सोवियत संघ के सीक्रेट कमांड सेंटर में तैनात थे। 

पेट्रोव का काम था कि यूएस की द्वारा रूस पर छोड़े जाने वाली मिसाइल का पता लगाना। उस सीक्रेट वॉर रूम में एक बड़ी सी स्क्रीन लगी थी, जो यूएस के द्वारा मिसाइल छोड़ने की सूरत में रूस को सावधान करती थी। 

उस दिन कंप्यूटर ने चेतावनी दी कि पांच ब्लास्टिक मिसाइल अमेर के बेस से छोड़ी गई हैं। यह अलार्म देखकर निसल्व चक्कर में पड़ गए। 15 सेकेंड तक तो वे सोच ही ना पाए कि क्या किया जाए। उन्हें इस बात की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को देनी थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 

पेट्रोव को महसूस हो रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है और जरूर कोई चूक हुई है। अमेरिका इस तरह रूस पर हमला नहीं करेगा, इसी कारण पेट्रोव ने अपने सीनियर अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं दी। उनके पास हमला करने के लिए केवल 30 मिनट का समय था।

इसके बाद पेट्रोव ने सैटेलाइट रेडार ऑपरेटर्स के एक ग्रुप को फोन किया लेकिन उनके पास मिसाइल हमले की कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन हमले का फैसला तो स्क्रीन की वॉर्निंग के आधार पर होना था। पेट्रोव ने अपना फैसला लिया और सोवियत सेना के मुख्यालय में फोन कर कहा, कि अर्ली वॉर्निंग रेडार सिस्टम में गड़बड़ी है।

पेट्रोव का यह फैसला सही साबित हुआ। अर्ली वॉर्निंग रेडार सिस्टम ने गलत जानकारी दी थी। बाद में इस मामले की जांच हुई तो पता चला कि सूरज की जो किरणें बादलों पर चमक रही थीं, उन्हें रॉकेट इंजन समझ लिया था।

घटना के कई सालों बाद पेट्रोव के इस फैसले के बारे में दुनिया को पता चला। जिसके बाद सभी ने उनकी तारीफ करते हुए सम्मानित किया, क्योंकि उनके इस फैसले ने पूरी दुनिया को परमाणु हमले के विनाश से बचा लिया था।

साल 2014 की पेट्रोव पर एक शॉर्ट फिल्म 'द मैन हू सेव्ड द वर्ल्ड' रिलीज हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि हम कभी परमाणु युद्ध की संभावना तक नहीं पहुंचे थे। 

निसल्व के इस कारनामे के बारे में लोगों को पहले नहीं पता था। लेकिन 1998 में आई एक किताब में यह सब सामने आया। उसके बाद उनको कई अवार्ड भी मिले। अमेरिका ने भी उनको सम्मानित किया था। 2014 में ‘द मैन हू सेवड द वर्ल्ड’ नाम की डॉक्यूमेंट्री ड्रामा भी बनी थी। 

गौरतलब है कि कर्नल स्तेनिस्लाव पेत्रोव 1984 में ही समय से काफी पहले रिटायरमेंट हो गए थे। .

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