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स्टैंडअप इंडिया योजना की रफ्तार हुई धीमी, एससी-एसटी के साथ हुआ नाइंसाफ

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 10 2017 2:16PM IST
स्टैंडअप इंडिया योजना की रफ्तार हुई धीमी, एससी-एसटी के साथ हुआ नाइंसाफ

स्टैंडअप इंडिया योजना की शुरूआत के समय सभी बैंकों को यह निर्देश दिया गया था। कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि अपने क्षेत्र के एक दलित या एक आदिवासी युवक और एक महिला को नयी कंपनी या नये कारोबार को शुरू करने में मदद करे। ये सभी बाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैंडअप इंडिया मिशन के लांच के मौके पर कही थी।

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आकड़ों की तरफ गौर करे तो इस योजना के शुरू होने के 17 महीने बाद भी केवल 6 प्रतिशत बैंक शाखाओं ने ही स्टैंडअप इंडिया योजना के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगो को कर्ज दिया है। सामान्य वर्ग से आने वाली महिलाओ को 25 प्रतिशत से भी कम बैकं शाखाओं ने कर्ज उपलब्ध कराया है।

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यह सभी आकड़े वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की तरफ से जारी किए गए है। जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक सेक्टर की 22, रिजीनल ओर रूरल सेक्टर की 42, और निजी सेक्टर की 9 बैंको ने स्टैंडअप इंडिया योजना के तहत अनुसूचित जाति के 5,822, अनुसूचित जनजाति के 1,761, लोगों और सामन्य वर्ग की 33,321 महिलाओं को कर्ज दिया है। जो कि बहुत ही निराशाजनक है।

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बैंकों की तरफ से लोगों को लोन नही दिये जाने के कारण सरकार की तरफ से शुरू की गई स्टैंडअप योजना अपने लक्ष्य को पूरा नही कर पा रही है। जो सरकार के लिए चिंता का विषय तो है ही साथ ही उन लोगों लिए भी बड़ा झटका है। जो अपना स्वयं का बिजनेस शुरू करना चाहते है।

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-Tags:#Stand Up India Plan#Banks#Ministry Of Finance#PM Modi#India News
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