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जन्मदिन विशेषः शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 110वीं जयंती मनाई गई, जानें अनकहे किस्से

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 29 2017 4:25PM IST
जन्मदिन विशेषः शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 110वीं जयंती मनाई गई, जानें अनकहे किस्से

आजादी के नायक और महान क्रांतिकारी शहीदे-आजम भगत सिंह का आज 110 जयंती है। क्रांतिकारी भगत सिंह के जीवन और उनके शहादत से पूरा भारतवर्ष परिचित है। 

भगत सिंह ने 24 साल की छोटी सी उम्र में इंकलाब का नारा बुलंद करते हुए ब्रिटिश हुकूमत की नाक में दम करने वाला महान क्रांतिकारी शहीदे-आजम के जीवन पर सैकड़ों किताबें लिखी भी गईं हैं। 

जब महान क्रांतिकारी भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई थी तब उनकी उम्र मात्र 23 वर्ष थी। लेकिन इस बात को बेहद कम लोग जानते हैं कि भगत सिंह ने दिल्ली की ब्रिटिश असेंबली में जो बम फोड़ा था, वो आगरा में बनाया गया था। 

आपको बता दें कि भगत सिंह का जन्म 27 सितम्बर 1907 को एक जाट सिक्ख परिवार में ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले में बंगा गांव में किशन सिंह और विद्यावती के घर में हुआ था। 

उनके जन्म उनके पिता और दो चाचा, अजित सिंह और स्वर्ण सिंह जेल में थे, जिनको रिहा करने की बात चल रही थी। तो नन्हें भगत सिंह को बचपन से ही अपने घर में देशभक्ति का माहौल मिला। 

अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। हालांकि इस समय भगत सिंह की उम्र केवल 12 साल थी। इसकी खबर मिलते हीं वे जलियाँवाला बाग पहुँच गए थे, वे 14 वर्ष की आयु से ही क्रांतिकारी दलों से जुड़ने लगे।

1923 में उन्‍होंने लाहौर के नैशनल कॉलेज में दाखिला लिया। इस कॉलेज की शुरुआत लाला लाजपत राय ने की थी। कॉलेज के दिनों में उन्‍होंने कई नाटकों राणा प्रताप, सम्राट चंद्रगुप्‍त और भारत दुर्दशा में हिस्‍सा लिया। वह लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के लिए नाटकों का मंचन करते थे।

भगत सिंह महान क्रांतिकारी होने के साथ ही शिक्षित विचारक भी थे। उन्होंने लाहौर के सेंट्रल जेल में ही अपना पहला निबंध 'मैं नास्तिक क्यों हूं' लिखा था। इस निबंध के जरिए उन्होंने ईश्वर की उपस्थिति, समाज में फैली असमानता, गरीबी और शोषण के मुद्दे पर तीखे सवाल उठाए। 

भगत सिंह के जीवन पर बन चुकी है कई फिल्में:-

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (1954) 

शहीद भगत सिंह (1963) 

शहीद (1965)

द लीजेंड ऑफ भगत सिंह (2002)

शहीद-ए-आजम (2002)

रंग दे बसंती (2006)

गौरतलब है कि भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जेपी सांडर्स को मारा था। भगत सिंह ने बुटेकेश्वर दत्त के साथ मिलकर दिल्ली स्थित ब्रिटिश की सेंट्रल एसेंबली में 8 अप्रैल 1929 को बम और पर्चे फेंके थे।

बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी थी। जिसके बाद भगत सिंह और उनके दो साथी राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को फांसी पर लटका दिया गया

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shaheed e azam bhagat singhs 110th birth anniversary

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