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यहां पढ़े पाकिस्तान की आजादी के बाद पाकिस्तान के संस्थापक अली जिन्ना का पहला भाषण

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 15 2017 12:30AM IST
यहां पढ़े पाकिस्तान की आजादी के बाद पाकिस्तान के संस्थापक अली जिन्ना का पहला भाषण

हम आपको बता रहे है पाकिस्तान ने 15 अगस्त 1947 को आजादी का जश्न कैसे मनाया था और पाकिस्तान के संस्थापक अली जिन्ना ने देश को संबोधित करते हुए क्या कहा था।  

15 अगस्त 1947 की सुबह का सूरज भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए वास्तव में नया सवेरा लेकर आया था। और वो दिन दोनों मुल्कों के लिए   इतिहास का स्वर्णिम दिन बन गया। 

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सच ये है कि पाकिस्तान को भी 15 अगस्त को ही आजादी मिली थी, इंडिया इंडिपेंडेंस बिल के अनुसार दोनों देशों की आजादी की तारीख 15 अगस्त ही थी।

पाकिस्तान बनने के बाद मोहम्मद अली जिन्ना ने भी अपने पहले भाषण में कहा था, “15 अगस्त संपभ्रु और स्वतंत्र देश पाकिस्तान का जन्मदिवस है, ये दिन मुस्लिम मुल्क की नियति की तामीर का दिन जिसके लिए पिछले कुछ सालों में बड़ी कुर्बानियां दी गईं।”

लेकिन बाद में वहां आजादी का जश्न 14 अगस्त मनाया जाने लगा जिसके पीछे दो वजहें हैं। पहला कराची में सत्ता-हस्तांतरण का कार्यक्रम 14 अगस्त 1947 को हुआ था, दूसरा कि 14 अगस्त 1947 को रमजान का 27वां दिन था जो मुसलमानों के लिए काफी पवित्र माना जाता है।

ऐसे में पाकिस्तान ने अगले साल 1948 से 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाना शुरू कर दिया। 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान के लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे रहे थे।

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हर तरफ आजादी का जश्न मनाया जा रहा रहा था। क्या बच्चे क्या बूढ़े हर कोई इस खास दिन को अपने तरफ से खास बनाने में लगा हुआ था लेकिन अन्दर ही अन्दर कभी न भुलाए जाने वाले बंटवारे का दर्द भी लोगों को याद आ रहा था।

पाकिस्तान के जन्मदाता मोहम्मद अली जिन्ना ने आजादी के इस खास मौके पर जो ऐतिहासिक भाषण दिया था वह इस प्रकार थी-

मुझे मालूम है कि कई लोग भारत के विभाजन  पंजाब और बंगाल के बंटवारे से सहमत नहीं हैं। लेकिन अब जबकि इसकी स्वीकृति मिल गई है अब हम सब का फर्ज है कि जो समझौता हो गया है उसे अंतिम और अटूट माने।

विभाजन होना ही था। इस बारे में दोनों समुदायों की चिंता जहाँ कहीं भी एक समुदाय बहुमत में है और दूसरा अल्पसंख्यक समझी सकती है। सवाल ये है कि क्या जो हुआ उसके विपरीत क़दम उठाना संभव था।

सरकार का सब से पहला कर्तव्य क़ानून व्यवस्था को बनाकर रखना है, ताकि देशवासियों की संपत्ति, जीवन और धार्मिक आस्थाएं सुरक्षा रखी जा सकें। हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों तरफ ऐसे लोग हैं जो बंटवारे को नापसंद करते हैं।

मेरी राय में इसके अलावा कोई और समाधान नही था। मुझे उम्मीद है भविष्य मेरी राय के पक्ष में फ़ैसला देगा। एक संयुक्त भारत का विचार कभी सफल नहीं होता। मेरे विचार में इसका अंजाम भयानक होता। मेरा ख़्याल सही है या ग़लत, ये वक़्त बताएगा।

समय के साथ-साथ हिन्दू - मुसलमान, बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक के फ़र्क ख़त्म होंगे। क्योंकि मुसलमान की हैसियत से आप पठान, पंजाबी, शिया या सुन्नी हैं। हिन्दुओं में आप ब्राह्मण, खत्री, बंगाली और मद्रासी हैं। अगर ये समस्या नहीं होती तो भारत काफ़ी पहले आज़ाद हो जाता।

आप देखेंगे कि वक़्त के साथ देश के नागरिक की हैसियत से हिन्दू, हिन्दू नहीं रहेगा मुसलमान, मुसलमान नहीं रहेगा, धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं क्यूंकि ये हर व्यक्ति का व्यक्तिगत ईमान है। 

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pakistan founder ali jinnah first speech after pakistan independence

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