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शर्मनाक: बाल गृहों में हो रही है बच्चों की दुर्दशा, एनसीपीसीआर ने भेजा समन

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नई दिल्ली. साक्षरता के मामले में सबसे अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड को लेकर दक्षिण-भारत के जिस राज्य केरल की चहुंओर प्रशंसा की जाती है। वहीं का एक कड़वा सच यह भी है कि यहां के बाल गृहों के बच्चों को आवारा कुत्तों को मारने से लेकर धरने-प्रदर्शन में जबरन प्रयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं केरल के बाल गृहों में आंध्र-प्रदेश और पूर्वोत्तरी राज्य मणिपुर से बच्चों को लाकर इन गतिविधियों में प्रयोग कर बाल अधिकारों की सरासर खिल्ली उड़ायी जा रही है। इस तथ्य का खुलासा बच्चों के अधिकारों को संरक्षित करने वाली देश की शीर्ष संस्था ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (एनसीपीसीआर) की हालिया रिपोर्ट में हुआ है। 
 
 
केरल के बाल गृहों की इस बदहाल हकीकत पर भड़के आयोग ने केरल पुलिस और मणिपुर के वरिष्ठ बाल विभाग अधिकारी को समन भेजकर 14 फरवरी को आयोग के समक्ष पेश होने के  निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि इस एनजीओ के राज्य में तीन सेंटर चल रहे हैं। इसमें लड़कियों, लड़के और नवजात शिशुओं का सेंटर शामिल है। जांच में पता चला कि नवजात शिशुओं का सेंटर काम नहीं कर रहा था। यहां 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को रखा गया था। कुल 16 बच्चे यहां रखे गए थे। आयोग ने जांच के बाद इसे बंद कर दिया है। एर्नाकुलम जिले में कुल 176 बाल गृह चल रहे हैं। 
 
बचपन हुआ शर्मसार
आयोग के उच्चपदस्थ सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि उसकी दो सदस्यीय टीम (प्रियंक कानूनगो, यशवंत जैन) ने मामले पर शिकायत मिलने के बाद केरल के एर्नाकुलम जिले में चलने वाले एनजीओ जन सेवा शिशु भवन द्वारा संचालित कुछ बाल गृहों का बीते वर्ष 19-20 अक्टूबर को औचक दौरा किया था। इसमें बच्चों के बचपन को शर्मशार करने वाले इस तथ्य का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि बाल गृहों में संशोधित किशोर न्याय अधिनियम 2015 (बच्चों की देखभाल व सुरक्षा) (जे.जे. एक्ट 2015) का पालन नहीं हो रहा था। पूर्ण अनियमितता की स्थिति थी। इस एनजीओ में कागजात जांचने पर आयोग की टीम को मणिपुर के पूर्वी इंफाल की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का लैटरहेड मिला। सीडब्ल्यूसी ने आयोग से पूछताछ में लैटरहेड अपना होने से इंकार किया, लेकिन लिखित में जवाब नहीं दिया। इसके अलावा जांच में यह जानकारी भी मिली कि एनजीओ द्वारा संचालित बाल गृहों में आंध्र-प्रदेश और मणिपुर से भी बच्चों को लाकर गैर-कानूनी ढंग से रखा गया था। मामले पर केरल उच्च-न्यायालय के दखल के बाद 14 बच्चों को वापस संबंधित राज्यों में भेजा गया। इसके बाद आयोग ने राज्य के संबंधित विभागीय अधिकारियों से लिखित में जवाब तलब किया। लेकिन जवाब से संतुष्ट न होने के बाद एनसीपीसीआर ने एर्नाकुलम जिले के पुलिस प्रमुख व मणिपुर के सीडब्ल्यूसी अधिकारी को समन भेजकर 14 फरवरी को आयोग के समक्ष पेशी के लिए बुलाया है।
 
बाल काूननों का सम्मान करें राज्य
आयोग के सदस्य यशवंत जैन ने हरिभूमि से बातचीत में अपना तर्क देते हुए कहा कि देश के सभी राज्यों को बाल अधिकार काूननों का सही ढंग से पालन करना चाहिए। इसकी निगरानी करने का अधिकार केंद्रीय कानूनों के तहत एनसीपीसीआर को दिया गया है। इसी के आधार पर हम जांच या समन भेजने की कार्रवाई करते हैं। केरल में हमारी टीम ने जांच के दौरान पाया कि उक्त एनजीओ संशोधित जे.जे.एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं था। आयोग यह पुन: स्पष्ट कर देना चाहता है कि बाल कानूनों को केंद्र सरकार ने बच्चों की भलाई के लिए बनाया है। सभी को इसका पालन करना चाहिए।
 
 
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