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समुद्र में चीनी खतरा बरकरार, भारत बनाएगा 6 परमाणु पनडुब्बियां: एडमिरल लांबा

कविता जोशी/नई दिल्ली | UPDATED Dec 2 2017 11:31AM IST
समुद्र में चीनी खतरा बरकरार, भारत बनाएगा 6 परमाणु पनडुब्बियां: एडमिरल लांबा

हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने अपने नौसैन्य बेड़े को नई धार देने के लिए 6 परमाणु पनडुब्बियों को बनाने का महत्वकांक्षी मिशन शुरू किया है। नौसेना दिवस (4 दिसंबर) के पूर्व आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि आईओआर क्षेत्र में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चुनौतियों को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए रखने और उससे निपटने के कदम उठाए जाने की जरूरत है। नौसेनाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय नौसेना, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान के साथ चतुष्कोणीय भागीदारी बनने पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण समुद्री पथों को लेकर असरदार भूमिका निभा सकती है। पाक के ग्वादर बंदरगाह पर चीनी मौजूदगी सुरक्षा चुनौती होगी। इसे हमें देखना और दूर करना होगा।   

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परमाणु पनडुब्बी परियोजना शुरू

एडमिरल लांबा ने कहा कि समुद्र की गहराईयों से दुश्मन पर वार करने की क्षमता का विकास किया जाना बेहद जरूरी हो गया है। इसलिए भारत ने 6 और परमाणु पनडुब्बियां बनाने की परियोजना शुरू कर दी है। हालांकि देश की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील व गोपनीय जानकारी होने की वजह से मैं इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दे सकता हूं। उन्होंने कहा कि वह देश को इस बात का भरोसा दिलाना चाहते हैं कि नौसेना देश के समुद्री हितों की रक्षा करने तथा समुद्री क्षेत्रों में नौवहन अनुकूल माहौल बनाने रखने के लिए हर वक्त पूरी तरह से तैयार है। 

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34 युद्धपोतों पर काम जारी

अभी नौसेना में अलग-अलग श्रेणी के 34 युद्धपोत बनाने का काम चल रहा है। सभी भारतीय शिपयार्डों में बन रहे हैं। स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत (आईएसी-1) पर भी तेजी से काम चल रहा है। वर्ष 2020 तक इसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है।

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महिलाओं को मिलेगी सुविधा

नौसेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिए जाने को लेकर नौसेनाप्रमुख ने कहा कि अभी 7 अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया है। लेकिन बल के पास मौजूद युद्धपोतों में महिलाओं के लिए सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए अभी उनके विकास के विषय को जांचा-परखा जा रहा है। जैसे ही यह विकसित कर ली जाएंगी, उसके बाद महिलाओं की इनमें तैनाती के लिए भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण किया जाएगा। गौरतलब है कि नौसेना में महिलाओं को 1991 से शामिल किया गया था। तब उनके लिए 3 ब्रांच थी। आज 8 हो चुकी हैं। हाल में बल को पहली नेवल फ्लायर मिली है, जिसका प्रशिक्षण जारी है। अभी महिलाएं समुद्री नौसैन्य गश्ती विमान उड़ाने से लेकर आब्जर्वर जैसी भूमिका में अच्छा काम कर रही है।    

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समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने वाले जहाज

मौजूदा दौर में हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में चीन और पाकिस्तान के प्रत्यक्ष मौजूद खतरे के बीच नौसेना के पास अपने बंदरगाहों और तटों को फुलप्रूफ सुरक्षा घेरा प्रदान करने तक के साधन नहीं हैं। इसमें सबसे बड़ी कमी शांति व युद्धकाल में दुश्मन द्वारा इन जगहों पर डाली जाने वाली समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने में सक्षम जहाज ‘एमसीएमवी’ को लेकर बनी हुई है। नौसेनाप्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने हरिभूमि द्वारा इस बाबत पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभी नौसेना के पास 4 समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने वाले एमसीएमवी जहाज हैं। यह बीते 30 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। इतने पुराने जहाजों को समुद्र में प्रयोग करना एक चुनौतीपूर्ण व खतरनाक कार्य है।

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