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पांच साल में दोगुनी हो जाएगी ब्रह्मोस की बिक्री, भारत को होगा इतने करोड़ फायदा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 10 2017 4:23AM IST
पांच साल में दोगुनी हो जाएगी ब्रह्मोस की बिक्री, भारत को होगा इतने करोड़ फायदा

ब्रह्मोस प्रमुख ने आज कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल के लिए पिछले 20 साल में करीब सात अरब डॉलर का घरेलू आर्डर मिला और यदि निर्यात फलीभूत हुआ, तो अगले पांच साल में इसकी बिक्री दोगुनी हो सकती है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत- रूस का संयुक्त उद्यम है जिसकी स्थापना 1998 में गई थी।

यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें बनाता है जो पनडुब्बी, जहाज, विमान और जमीन से दागी जा सकती है। भारत अपने सशस्त्र बल के तीनों अंगों- थल सेना, नौसेना और वायुसेना- के लिए ब्रह्मोस का इस्तेमाल कर सकता है।

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यह जून 2016 से पहले इसकी बिक्री नहीं कर सकता था, जब यह मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का हस्ताक्षरकर्ता बना।

दरअसल, एमटीसीआर सदस्यता ने भारत को अत्याधुनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी का व्यापार करने में सक्षम बनाया और इसने रूस के साथ इसके संयुक्त उद्यम को मजबूत किया।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने ‘डेफटेक' 2017 में कहा कि 20 बरसों का सफर आसान नहीं रहा है। हमने अपने वित्त, प्रौद्योगिकी, उपयोगकर्ता के साथ संघर्ष किया। कई सारी चुनौतियां रही हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन सीआईआई और रक्षा मंत्रालय ने किया था। उन्होंने कहा कि कंपनी ने 14 वें साल से मुनाफा कमाना शुरू किया। मिश्रा ने कहा कि यह सफर सार्थक रहा क्योंकि हमने 30 करोड़ डॉलर निवेश किया और आज हमारे पास सात अरब डॉलर से अधिक का आर्डर है।

भारत के एमटीसीआर में शामिल होने के बाद कई देशों ने, खासतौर पर वियतनाम ने ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने के लिए रूचि जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘‘यदि निर्यात फलीभूत होता है तो इसकी ( ब्रह्मोस मिसाइलें) बिक्री अगले पांच साल में दोगुनी हो सकती हैं।

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मिसाइलों के निर्यात के बारे मे पूछे जाने पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं और रक्षा मंत्रालय इस पर टिप्पणी करने की स्थिति में होगी।

गौरतलब है कि अगस्त में ये खबरें आई थी कि भारत ब्रह्मोस ‘एंटी शिप क्रूज मिसाइलें' वियतनाम को आपूर्ति कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने इसे गलत बताया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार जी सतीश रेड्डी ने कहा कि रक्षा प्रौद्योगिकी में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक मजबूत शोध एवं विकास (आर एंड डी) आधार बनाने की जरूरत है।

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-Tags:#India#Brahmos Missile#India News
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