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संसद पहुंची महाराष्ट्र हिंसा की आग, कोरेगांव की लड़ाई पर बवाल जारी

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jan 3 2018 1:13PM IST
संसद पहुंची महाराष्ट्र हिंसा की आग, कोरेगांव की लड़ाई पर बवाल जारी

आज लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाराष्ट हिंसा का मामला उठाते हुए कहा कि फूट डालने की कोशिश का नतीजा है पुणे हिंसा। खड़गे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज में विभाजन करने के लिए, 'कट्टर हिन्दुत्ववादी' जो वहां RSS के लोग हैं, इसके पीछे उनका हाथ है। उन्होंने ये काम करवाया है।

वहीं राज्यसभा में भी आज विपक्ष के कई सदस्यों ने महाराष्ट्र में जातीय हिंसा का मुद्दा उठाने का प्रयास किया लेकिन सभापति एम वेंकैया नायडू ने इसकी अनुमति नहीं दी और सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने शून्यकाल शुरू करने की घोषणा करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद से अपना मुद्दा उठाने को कहा। इसी दौरान बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा ने महाराष्ट्र में जातीय हिंसा का मुद्दा उठाने का प्रयास किया और आरोप लगाया कि दलितों के खिलाफ हिंसा के लिए भाजपा तथा आरएसएस जिम्मेदार है। 

कुछ अन्य सदस्यों ने भी यह मुद्दा उठाने का प्रयास किया और कहा कि उन्होंने इस पर चर्चा के लिए नोटिस दिए हैं। लेकिन सभापति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी और कहा कि उनकी बातें कार्यवाही में शामिल नहीं की जाएंगी। इस बीच सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के कई सदस्य अपने स्थानों पर खडे हो गए। नायडू ने कहा कि राजनीति करने से कोई लाभ नहीं होगा और वह सबकी बात सुनने को तैयार हैं। 

इसके बाद अचानक उन्होंने 11 बजकर करीब 10 मिनट पर सदन की बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। एक बार के स्थगन के बाद बैठक जब फिर शुरू हुई तो सदन में वही नजारा देखने को मिला। विपक्ष के कई सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर कुछ कहने का प्रयास कर रहे थे। 

सभापति नायडू ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद सहित कई सदस्यों का नोटिस मिला था और उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति भी दी थी। इस बीच, सदन में हंगामा मचता रहा। सभापति ने इसे देखते हुए बैठक को महज एक मिनट के भीतर ही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।


महाराष्ट्र जातिगत हिंसा

दो सौ साल पुरानी जंग की वर्षगांठ पर भड़की हिंसा की वजह से महाराष्ट्र एक बार फिर जातिगत तनाव के मुहाने पर खड़ा है। राज्य सरकार द्वारा दलितों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा रोकने में विफल रहने पर आज एक राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया गया है।

कोरेगांव की लड़ाई में मुंबई की लाइफ लाइन 

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि दलित प्रदर्शनकारियों ने आज सुबह ठाणे रेलवे स्टेशन पर ट्रकों को रोकने की कोशिश की लेकिन उन्हें जल्द ही खदेड़ दिया गया तथा मध्य रेलवे लाइन पर यातायात बाधारहित है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने गोरेगांव उपनगर में पश्चिमी लाइन पर रेल यातायात भी बाधित करने की कोशिश की। दक्षिण मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में आज 11वीं कक्षा की परीक्षाएं रद्द कर दी है।

पुणे हिंसा पर भारिप बहुजन महासंघ का महाराष्ट्र बंद

भारिप बहुजन महासंघ (बीबीएम) के नेता और डॉ. बी आर अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने दो दिन पहले पुणे जिले के भीमा कोरेगांव गांव में हिंसा रोकने में राज्य सरकार की विफलता के विरोध में आज महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है। अंबेडकर ने इस हिंसा के लिए हिंदू एकता अघाड़ी को जिम्मेदार ठहराया है।

महाराष्ट्र बंद पर स्कूल प्रबंधक

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र डेमोक्रेटिक फ्रंट, महाराष्ट्र लेफ्ट फ्रंट और करीब 250 अन्य संगठनों ने बंद का समर्थन किया है। बहरहाल, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसने स्कूलों में छुट्टी घोषित नहीं की है लेकिन बस ऑपरेटरों ने कहा कि वे मुंबई में आज स्कूल बसें नहीं चलाएंगे।

कोरेगांव की लड़ाई पर जिग्नेश मेवाणी

स्कूल बस मालिकों के संघ के एक प्रवक्ता ने कहा कि हम छात्रों की सुरक्षा का जोखिम नहीं उठा सकते। अगर हम दूसरी पारी में बस चला सकते हैं तो इस पर स्थिति देखने के बाद फैसला लेंगे। गुजरात से विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले पुणे जिले में दलितों पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थकों ने हमले किए थे। मेवाणी कल मुंबई में थे।

भीमा कोरेगांव युद्ध

उन्होंने कहा कि ये संगठन आधुनिक युग के पेशवा हैं जो सबसे खराब रूप में ब्राह्मणवाद का प्रतिनिधित्व करते हैं। दो सौ साल पहले हमारे पूर्वज पेशवा के खिलाफ लड़े। आज मेरी पीढ़ी के दलित नए पेशवा के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलित शांतिपूर्ण रूप से भीमा कोरेगांव युद्ध की वर्षगांठ क्यों नहीं मना सकते? 

पुणे हिंसा पर उमर खालिद

हमलावरों ने ऐसे तरीके अपनाए क्योंकि वे दलित आह्वान से भयभीत हैं। पुणे पुलिस ने कल रात कहा कि उन्हें मेवाणी और दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र नेता उमर खालिद के खिलाफ शिकायत मिली है। ऐसा आरोप है कि उन्होंने 31 दिसंबर को पुणे में एक कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण दिया।


कोरेगांव की लड़ाई का पूरा मामला 

  • मेवाणी और खालिद पुणे के शनिवार वाड़ा में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं सालगिरह मनाने के लिए आयोजित ‘‘एल्गर परिषद' में शामिल हुए। 
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  • पुणे जिले में उस समय हिंसा भड़क उठी जब दलित संगठन भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं सालगिरह मना रहे थे। इस युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने पेशवा की सेना को हरा दिया था। 
  • दलित नेता ब्रिटिश जीत का जश्न मनाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि उस समय अछूत माने जाने वाले महार समुदाय के सैनिक कंपनी की सेना का हिस्सा थे। पेशवा ब्राह्मण थे और इस लड़ाई को दलित की जीत का प्रतीक माना जाता है।



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