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पतियों को न समझें 'निहत्थे जवान', नरमी से करें बर्ताव: हाईकोर्ट

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 28 2017 4:17PM IST
पतियों को न समझें 'निहत्थे जवान', नरमी से करें बर्ताव: हाईकोर्ट

आजतक आपने महिलाओं के हक में आवाजे बुलंद होते हुए सुनी होंगी लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने आज पुरूषों की आवाज बुलंद की है। मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्टस से कहा है कि पतियों के साथ थोड़ी नरमी बरतें। कोर्ट ने कहा कि पुरूषों को निहत्थे जवानों की तरह समझना बंद कर दें और उन्हें मशीन न समझें।

 
कोर्ट ने कहा कि पतियों को मशीन समझकर पत्नी को गुजारा देने का आदेश देने में फैमली कोर्ट को नरमी बरतनी चाहिए। जस्टिस आरएमटी टीकारमन ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले का जिक्र करते हुए ऐसा कहा।
 
 
उल्लेखनीय है कि फैमली कोर्ट ने एक फैसले में 10,500 रुपए कमाने वाले एक शख्स को ये आदेश दिया था कि वो करीब 7,000 रुपए अपने पत्नी को गुजारा खर्च के रूप में दे। हाईकोर्ट ने कहा कि 7000 रुपए पत्नी को देने के बाद उसके पास खाली 3,500 रुपए बचेंगे जिसमें उसे अपना और अपने पिता का खर्च चलाना होगा और ऐसा करनी किसी के लिए भी मुश्किल है।
 
 
जज ने कहा कि कोर्ट को यह ध्यान रखना चाहिए कि पति को पास कितनी जिम्मेदारियां हैं और उसके बाद गुजारा खर्च कि रख्म का फैसला करना चाहिए। जज ने आगे कहा कि इस तरह के फैसले की निंदा करनी चाहिए।
 
गौरतलब है कि कोर्ट वर्धराजन नाम के एक शख्स की सुनवाई कर रहा था, जिसकी शादी 2001 में हुई थी।
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-Tags:#Madras Highcourt#Dont Think That Husbands Are Armless Soldiers
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