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अगस्त क्रांतिः पढ़िए, पीएम मोदी से लेकर सोनिया गांधी ने संसद में क्या कहा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 9 2017 1:37PM IST
अगस्त क्रांतिः पढ़िए, पीएम मोदी से लेकर सोनिया गांधी ने संसद में क्या कहा

भारत छोडो आन्दोलन की 75 वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में गांधी जी से लेकर भगत सिंह तक सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि भारत की आजादी से ही दूसरे देशों ने आजादी का बिगुल फूंका था। खुशी मनाओ आप आजाद हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी जी के बलिदान को किसी भी मूल्य पर नहीं भुलाया जा सकता है।

पीएम ने कहा कि हमारी आजादी सिर्फ भारत के लिए नहीं थी, बल्कि यह विश्व के दूसरे हिस्सों में उपनिवेशवाद के खात्मे में एक निर्णायक क्षण था।

मोदी ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण हमारे देश के सामने बड़ी चुनौतियां, हमें सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है।

गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, भ्रष्टटाचार को देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि हम सभी 2017 से 2022 तक पांच वर्ष की अवधि के दौरान संकल्प से सिद्धि के भाव के साथ कार्य करें और दुनिया के देशों के लिये आज की स्थिति में उसी प्रकार से प्रेरणा बनें जैसा 1942 के आंदोलन के बाद 1947 के समय भारत ने दुनिया को प्रेरित किया था।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में विशेष चर्चा में हिस्सा लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कहा कि आज जब हम 2017 में हैं तब मैं इस बात से इंकार नहीं कर सकता हूं कि आज हमारे पास गांधी हैं, आज हमारे पास उस समय की ऊंचाई वाला नेतृत्व नहीं है लेकिन सवा सौ करोड़ देशवासियों के साथ हम उस सपने को पूरा कर सकते हैं जो उन्होंने देखा था।

मोदी ने कहा कि हमारी आजादी सिर्फ भारत के लिए नहीं थी, बल्कि यह विश्व के दूसरे हिस्सों में उपनिवेशवाद के खात्मे में एक निर्णायक क्षण था। उस समय 1942 के आंदोलन के बाद जब हमें आजादी मिली तब यह केवल हमारे देश की आजादी नहीं थी, बल्कि इसने अफ्रीका से दुनिया के अनेक देशों को प्रेरणा देने का काम किया । एक के बाद एक कई देश इसके बाद आजाद हुए।

उन्होंने कहा कि गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण हमारे देश के सामने बड़ी चुनौतियां, हमें सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार हमारी राजनीति को अंदर से खोखला कर रहा है, हम गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, भ्रष्टटाचार से देश को मुक्त बनाने का संकल्प लें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2017 से 2022 तक पांच वर्ष की अवधि में हम उसी भावना और संकल्प के साथ काम करें जो भाव 1942 से 1947 के बीच पांच वर्ष की अवधि के दौरान था। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1942 में ‘करो या मरो' के नारे ने पूरे देश को प्रेरित किया, उसी प्रकार से हम ‘करेंगे और करके रहेंगे' का संकल्प लें और 2017 से 2022 तक पांच वर्ष की अवधि के दौरान संकल्प से सिद्धि के भाव के साथ कार्य करें और गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, भ्रष्टटाचार की चुनौती से लड़ने और उसे दूर करने का कार्य करें।

 

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इससे पहल पीएम मोदी ने ट्वीट कर ‘भारत छोड़ो' आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर लोगों से कहा कि वह देश को साम्प्रदायिकता, जातिवाद और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से मुक्त बनाने के लिए कदम उठाएं और 2022 तक ‘नये भारत' का निर्माण करें।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में वर्ष 1942 में हुए ऐतिहासिक आंदोलन में भाग लेने वाले सभी लोगों को सलाम करते हुए मोदी ने लोगों से इससे प्रेरणा लेने को कहा।

कई ट्वीट में मोदी ने लिखा है कि आजादी पाने के लिए महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट हुआ था।      

उन्होंने लिखा है, ‘ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर हम आंदोलन में भाग लेने वाले सभी महान महिलाओं और पुरूषों को सलाम करते हैं।'

उन्होंने लिखा, ‘1942 में भारत को उपनिवेशवाद से मुक्त कराने की जरूरत थी। आज, 75 साल बाद मुद्दे अलग हैं।'

मोदी ने लिखा है, ‘भारत को गरीबी, गंदगी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद, साम्प्रदायिकता से मुक्त कराने और 2022 तक ‘नये भारत' का निर्माण करने की शपथ लें।'

‘संकल्प से सिद्धि' का नारा देते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे कंधे-से-कंधा मिलाकर ‘‘ऐसे भारत का निर्माण करें जिस पर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का गर्व हो।'

सोनिया गांधी ने कहा कि आज हम भारत छोड़ो आंदोलन की यादों को सदन में ताजा कर रहे हैं।

सोनिया गांधी ने कहा मैं उन सभी को श्रद्धांजलि देती हूं, जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया है।

सोनिया ने कहा कि नफरत और बदले की राजनीती के बदल छा गए हैं, पब्लिक स्पेस में बेहेस की गुंजाईश कम हो रही है।

सोनिया गांधी ने कहा कि कई बार कानून के राज पर गैरकानूनी शक्तियां हावी होती हैं, हमें अपनी आजादी को सुरक्षित रखना है। 

सोनिया ने कहा कि हमें एक ऐसे भारत के लिए लड़ना है जिसमें इंसानी आजादी, स्वेच्छा और न्यायसंगत व्यवस्था हो। हम इसकी लड़ाई लड़ेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज कहा कि देश के सेकुलर और उदारवादी मूल्यों के लिए खतरा पैदा हो गया है तथा ऐसे में हमें एक ऐसे भारत के लिए लड़ना है जहां मानवीय स्वतंत्रता और न्यायसंगत व्यवस्था कायम रहे तथा हम इसकी लड़ाई लड़ेंगे।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आज लोकसभा में विशेष चर्चा में हिस्सा लेते हुए सोनिया ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि देश पर संकीर्ण मानसिकता वाली, विभाजनकारी और सांप्रदायिक सोच वाली शक्तियां हावी हो रही हैं।...सेकुलर और उदारवादी मूल्यों के लिए खतरा पैदा हो गया है। 

कई बार कानून के राज पर गैर कानूनी शक्तियां हावी होती हैं।' सोनिया ने कहा कि सवाल उठ रहे हैं कि क्या अंधकार की ताकतें फिर सिर उठा रही हैं, क्या लोकतंत्र को खत्म करने के प्रयास हो रहे हैं? उन्होंने कहा, ‘हमें अपनी आजादी को सुरक्षित रखना है। हमें एक ऐसे भारत के लिए लड़ना है जिसमें इंसानी आजादी, स्वेच्छा और न्यायसंगत व्यवस्था हो। हम इसकी लड़ाई लड़ेंगे।'

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘महात्मा गांधी ने न्यायसंगत और मानवीय स्वतंत्रता वाली व्यवस्था की बात की थी। हमें इन्हीं मूल्यों के साथ आगे बढ़ना है।' उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में जवाहर लाल नेहरू सबसे लंबे समय तक जेल में रहे और कई कार्यकर्ता तो बीमारी की वजह से जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सके।'

उन्होंने यह भी कहा कि उस समय के कुछ तत्वों ने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था और ऐसे तत्वों का आजादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं है।' कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 75 साल पहले आज ही के दिन भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ था और उसी की याद ताजा करने के लिए हम यहां आज खड़े हैं।

इस सदन में मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं के बलिदान को याद कर रही हूं। 1942 के आंदोलन की शुरूआत महात्मा गांधी के आह्वान पर हुई थी । पूरे देश ने इसे पूरे संकल्प के साथ स्वीकार किया और इसके परिणामस्वरूप अंग्रेजी हुकूमत को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

मोदी ने कहा था अगस्त क्रांति का महीना

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते ही मन की बात कार्यक्रम में कहा था कि अगस्त का महीना एक तरह से क्रांति का महीना है।

इस महीने को क्रांति के महीने के रूप में मनाया जाना चाहिए, ताकि देश की युवा पीढ़ी आजादी के लिए हुए क्रांति को समझ सके।

एक अगस्त को असहयोग आंदोलन और नौ अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई थी। 

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