यात्रा

श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय होती है सेममुखेम की यात्रा

By Dharam Singh | Jun 26, 2016 |
semmukem

उत्तरकाशी. सेममुखेम की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय होती है। इस नागतीर्थ के दर्शनों के लिए न्यू टिहरी टाउन के समीप पीपलडाली, गडोलिया नाम के छोटे से कस्बे में पहुँचें। यहां से एक रास्ता नई टिहरी के लिए जाता है तो दूसरा लंबगांव। हमने लंबगांव वाला रास्ता पकडा क्योंकि सेम नागराजा के दर्शनों के लिए लंबगांव होते हुए ही जाया जाता है। घुमावदार सड़कों पर टिहरी झील का विस्तृत फलक साफ दिखाई दे रहा था।

पुरानी टिहरी नगरी इसी झील के नीचे दफन हो चुकी है। हल्की धुंधली यादें पुरानी टिहरी की ताजा हो उठी, और मैं चारों और पसरी झील के पानी में पुराने टिहरी को देखने की कोशिश करने लगा। रास्ता जैसे-जैसे आगे बढता जा रहा था, मैं इस झील के पानी में पुरानी टिहरी की संस्कृति को ढूंढने की कोशिश कर रहा था। अतीत में खोए हुए मुझे पता नहीं चला कि कब मैं टिहरी झील को पीछे छोड आया और लंबगांव पहुंच गया। खैर ड्राइवर ने मेरी तंद्रा तोडी।

लंबगांव सेम जाने वाले यात्रियों का मुख्य पड़ाव है। पहले जब सेम मुखेम तक सडक नहीं थी तो यात्री एक रात यहां विश्राम करने के बाद दूसरे दिन अपना सफर शुरू करते थे। यहां से 15 किलोमीटर की खडी चढाई चढने के बाद ही सेम नागराजा के दर्शन किए जाते थे। अब भी मंदिर से मात्र ढाई किलोमीटर नीचे तलबला सेम तक ही सडक है।

फिर भी यात्रा काफी सुगम हो गई है। लंबगांव से आप 33 किलोमीटर का सफर बस या टैक्सी द्वारा तय करने के बाद तबला सेम पहुंच सकते हैं। जैसे-जैसे आप इस रास्ते पर बढते हैं, प्रकृति और सम्मोहन के द्वार खुद-ब-खुद खुलते जाते हैं। लंबगांव से 10 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हम पहुंचे कोडार जो लंबगांव से उत्तरकाशी जाते हुए एक छोटा सा कस्बा है। यहां हम बांई तरफ मुड गए।

अब गाडी घुमावदार और संकरी सडकों पर चलने लगी थी। हम प्रकृति का आनंद उठाते चल रहे थे। यहां की मनभावन हरियाली आंखों को काफी सुकून पहुंचा रही थी। पहाडों के सीढीनुमा खेतों को हम अपने कैमरे में कैद करते जा रहे थे। कब 18 किलोमीटर का सफर कट गया पता ही नहीं चला। हम पहुंच गए मुखेम गांव- सेम मंदिर के पुजारियों का गांव। गंगू रमोला जो रमोली पट्टी का गढपति का था उसी का ये गांव है। गंगू रमोला ने ही सेम मंदिर का निर्माण करवाया था।

मुखेम से आगे बढते हुए रास्ते में प्राकृतिक भव्यता और पहाड की चोटियां मन को रोमांचित करती रहती हैं। रास्ते में ही श्रीफल के आकार की चट्टान की खूबसूरती देखने लायक है। मुखेम से 5 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद हम पहुंचे तलबला सेम। एक लंबा चौडा हरा भरा घास का मैदान, जहां पहुंचकर यात्री अपनी थकान मिटाते हैं। किनारे पर नागराज का एक छोटा सा मंदिर है। पहले यहां के दर्शन करने होते है। यहां पर स्थानीय लोग थके-हारे यात्रियों के लिए खान-पान की व्यवस्था करते हैं। यहां से सेम मंदिर तक तकरीबन ढाई किलोमीटर की पैदल चढाई है। घने जंगल के बीच मंदिर तक रास्ता बना है।

बांज, बुरांश, खर्सू, केदारपती के वृक्षों से निकलने वाली खुशबू आनंदित करती रहती है। घने जंगलों के बीच से गुजरना किसी रोमांच से कम नहीं। पीछे मुडने पर रमोली पट्टी का सौंदर्य देखते ही बनता है। मंदिर का द्वार काफी आकर्षक है। यह 14 फीट चौड़ा और 27 फीट ऊंचा है जिसमें नागराज फन फैलाए हैं और भगवान कृष्ण नागराज के फन के ऊपर वंशी की धुन में लीन दिखते हैं। मंदिर में प्रवेश करने के बाद यात्री नागराजा के दर्शन करते हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्वयं भू-शिला है। ये शिला द्वापर युग की बताई जाती है जिसकी लोग नागराजा के रूप में पूजा-अर्चना करते है। मंदिर के दाईं तरफ गंगू रमोला के परिवार की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। सेम नागराजा की पूजा करने से पहले गंगू रमोला की पूजा की जाती है।

 

आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, आसपास दर्शनीय स्थल के बारे में

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलोकरें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
  • Post a comment
  • Name *
  • Email address *

  • Comments *
  • Security Code *
  • KSIIA
  •       
    कमेंट्स कैसे लिखें !
    जिन पाठकों को हिन्दी में टाइप करना आता है, वे युनीकोड मंगल फोंट एक्टिव कर हिन्दी में सीधे टाइप कर सकते हैं। जिन्हें हिन्दी में टाइप करना नहीं आता वे Roman Hindi यानी कीबोर्ड के अंग्रेजी अक्षरों की मदद से भी हिन्दी में टाइप कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप लिखना चाहें- “भारत डिफेंस कवच एक उपयोगी पोर्टल है’, तो अंग्रेजी कीबोर्ड से टाइप करें, bharat defence kavach ek upyogi portal hai. हर शब्द के बाद स्पेस बार दबाएंगे तो अंग्रेजी का अक्षर हिन्दी में टाइप होता चला जाएगा। यदि आप अंग्रेजी में अपने विचार टाइप करना चाहें तो वह विकल्प भी है।
    Haribhoomi
    Haribhoomi on Social Media
    Happy Birthday: जब कंगना रनौत ने अचार-रोटी खाकर गुजारे दिन

    Happy Birthday: जब कंगना रनौत ने ...

    एक प्ले में कंगना ने मेल-फीमेल दोनों किरदार निभाए थे।

    बिग बॉस फेम स्वामी ओम इस टीवी शो में चाहते हैं 'कपल डांस' करना

    बिग बॉस फेम स्वामी ओम इस टीवी शो में ...

    स्वामी ने नच बलिए टीम से खुद को लेने की डिमांड की है।

    अपनी बनाई पेंटिंग्स बेचना चाहते हैं सलमान खान, कीमत आप जो देना चाहे

    अपनी बनाई पेंटिंग्स बेचना चाहते हैं ...

    सलमान खान काफी अच्छी पेंटिग्स कर लेते हैं।