यात्रा

उत्तराखंडः यहां लें गर्मियों में भी सर्दी का मजा, इन जगहों पर बिताएं अपनी छुट्टियां

By haribhoomi.com | May 13, 2016 |
uttarakhand
नई दिल्ली. हर बार छुट्टियों में सैर का ख्याल आते ही लोगों के जेहन में शिमला, मसूरी, नैनीताल की तस्वीर ही उभर कर आती है। ऐसा इसलिये कि छुट्टियों में पहाड की सैर का लुत्फ उठाने के लिये मध्यमवर्गीय परिवारों को वक्त और बजट के हिसाब से कोई और विकल्प सूझता ही नहीं। जबकि ऐसा है नहीं। कई और जगहें भी हैं जिन्हें देखकर आप स्तब्ध रह जायेंगे और अपनी सुध-बुध खो देंगे लेकिन जानकारी के अभाव में ऐसे पर्यटन स्थल आम पर्यटकों की पहुंच से आज भी कोसों दूर हैं। उन्हीं में से एक है उत्तराखण्ड की हसीन वादियां जो किसी भी पर्यटक को अपने मोहपाश में बांध लेने के लिये काफी हैं। कलकल बहते झरने, पशु-पक्षी, तरह तरह के फूल, कुहरे की चादर में लिपटी ऊंची पहाडियां और मीलों तक फैले घास के मैदान, ये नजारे किसी भी पर्यटक को स्वप्निल दुनिया का एहसास कराते हैं। गर्मियों में इन ठंडी-ठंडी वादियों में घूमने का मजा ही कुछ और होता है, तो आइये हम आपको ले चलते हैं उत्तराखंड की ठंडी वादियों में वो भी 2000 रुपए से भी काम में...
 
जिम कार्बेट कार्बेट नेशनल पार्क
उत्तराखण्ड हिमालय की तलहटी में स्थित कार्बेट नेशनल पार्क दुनिया के चर्चित राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। कुदरत ने यहां जमकर अपना वैभव बिखेरा है। हरे-भरे वनों से आच्छादित पहाडियां, कल-कल बहते नदी नाले, चौकडी भरते हिरणों के झुण्ड, संगीत की तान छेडते पंछी, नदी तट पर किलोल भरते मगर, चिंघाडते हुए हाथियों के समूह और शेर की दहाड से गूंजते जंगल कार्बेट नेशनल पार्क की सैर को अविस्मरणीय बना देते हैं। 
 
कब जायें: कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान अथवा टाइगर रिजर्व की सैर 15 नवम्बर से 15 जून के बीच कभी भी की जा सकती है। नवम्बर से फरवरी के मध्य यहां तापमान 25 से 30 डिग्री, मार्च-अप्रैल में 35 से 40 तथा मई-जून में 44 डिग्री तक पहुंच जाता है। इनमें से आप अपना पसंदीदा मौसम चुन सकते हैं।
 
कैसे जायें: यह सभी प्रमुख शहरों से सडक मार्ग से जुडा हुआ है। दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 24 से गाजियाबाद, हापुड होकर मुरादाबाद पहुंचने के बाद यहां से स्टेट हाइवे 41 को पकडकर काशीपुर, रामनगर होते हुए यहां पहुंच सकते हैं। लखनऊ से भी राष्ट्रीय राजमार्ग 24 से सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली होते हुए मुरादाबाद और वहां से उपरोक्त मार्ग से कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पहुंचा जा सकता है। प्रमुख नगरों से दूरी: दिल्ली 290 किलोमीटर, लखनऊ 503 किलोमीटर, देहरादून 203 किलोमीटर।
 
कहां ठहरें: कार्बेट नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के आवास के लिये ब्रिटिशकालीन वन विश्राम गृहों से लेकर आधुनिक पर्यटक आवास गृह और स्विस कॉटेज टैंट आदि की समुचित व्यवस्था है। सुविधाओं की दृष्टि से ढिकाला पर्यटकों के ठहरने की पसन्दीदा जगह है। 
 
बजट: दिल्ली से यहां पहुंचें से लेकर ठहरने और खाने का खर्च 1800 से भी काम में होगा।  
 
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ऑली
ऑली में बर्फ से ढके ढलानों के किनारे पर देवदार के पेडों की कतारें हैं जो हवा के वेग को रोककर स्कीइंग के लिये उपयुक्त माहौल तैयार करती है। ऑली से नंदादेवी (7817 मीटर), कामेट (7756 मीटर), माना (7273 मीटर) और दूनागिरी (7066 मीटर) चोटियों का खूबसूरत नजारा मिलता है। मौसम खुला हो तो ये चोटियां इतनी पास नजर आती हैं कि आपका मन छलांग लगाकर उन तक पहुंचने का करेगा। 
 
कब जाएं: यूं तो ऑली गर्मियों में हिल स्टेशन की तलाश करने वालों के लिये भी उपयुक्त जगह है लेकिन इसकी असली ख्याति कडाके की सर्दी में स्कीइंग का लुत्फ लेने से ही है। वैसे आप यहां नवम्बर से लेकर जुलाई तक कभी भी ठंडी ठंडी बर्फ का लुत्फ़ उठा सकते हैं।
 
कैसे जाएं: दिल्ली या देश के किसी भी हिस्से से हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश पहुंचें। हरिद्वार के लिये दिल्ली, कोलकाता व मुम्बई से सीधी ट्रेनें हैं। सबसे निकटवर्ती हवाई अड्डा जौली ग्रांट (देहरादून) है।
 
कहां ठहरें: ऑली में गढवाल मंडल विकास निगम का गेस्टहाउस और कुछ निजी रिसॉर्ट भी हैं। जोशीमठ में भी रुकने के लिये हर बजट के होटल हैं। 
 
बजट: दिल्ली से यहां पहुंचें से लेकर ठहरने और खाने का खर्च 1800 से भी काम में होगा।
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चोपता तुंगनाथ
चमोली की शांत फिजाओं में ऐसा ही एक स्थान है चोपता तुंगनाथ। बारह से चौदह हजार फुट की ऊंचाई पर बसा ये इलाका गढवाल हिमालय की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। चोपता समुद्र तल से बारह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से तीन किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद तेरह हजार फुट की ऊंचाई पर तुंगनाथ मन्दिर है, जो पंचकेदारों में एक केदार है। सच पूछिये तो चोपता भ्रमण का असली मजा तुंगनाथ जाये बिना नहीं उठाया जा सकता। 
 
कब जाएं: जनवरी-फरवरी के महीनों में आमतौर पर बर्फ की चादर ओढे इस स्थान की सुन्दरता जुलाई-अगस्त के महीनों में देखते ही बनती है। इन महीनों में यहां मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और उनमें खिले फूलों की सुन्दरता देखने लायक होती है। लेकिन मई से लेकर नवम्बर तक यहां की यात्रा थोडी आसान है। यात्रा के लिये सप्ताह भर का वक्त काफी है। यूं तो गर्म कपडे साथ हों चाहे महीने कोई भी हों, क्योंकि ऐसी जगह पर हर महीने का अपना रंग और अपना मजा है।
 
कैसे जाएं: आप इन दो रास्तों में एक को चुन सकते हैं- ऋषिकेश से गोपेश्वर होकर या ऋषिकेश से ऊखीमठ होकर। ऋषिकेश से गोपेश्वर की दूरी 212 किलोमीटर है और ऊखीमठ की दूरी 178 किलोमीटर है। गोपेश्वर से चोपता 40 किलोमीटर और ऊखीमठ से 24 किलोमीटर है, जोकि सडक मार्ग से जुडा है।
 
कहां ठहरें: गोपेश्वर और ऊखीमठ, दोनों जगह गढवाल मण्डल विकास निगम के विश्रामगृह हैं। इसके अलावा प्राइवेट होटल, लॉज, धर्मशालाएं भी हैं जो आसानी से मिल जाती हैं। 
 
बजट: दिल्ली से यहां पहुंचें से लेकर ठहरने और खाने का खर्च 2500 से भी काम में होगा।
 
 
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