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टिप्सः यह योगासन पाचन क्रिया को रखेगा दुरुस्त

By haribhoomi.com | Mar 05, 2017 |
Yoga
नई दिल्ली. बदलते मौसम के साथ लोगों के खान-पान में खासा बदलाव आता रहता है। अब गर्मी का सीजन में लोग अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों की शादी पार्टियां अटेंड करते हैं। बाहर का ऑइली भोजन करने से पेट खराब होने की समस्या बढ़ जाती है। बाहर का बना खाने से पाचन क्रिया में असर पड़ता है।
 
भागदौड़ भरी जिंदगी में पानी कम पीने से या फिर खान-पान पर ध्यान न देने से लोगों में पाचन क्रिया से सम्बन्धित समस्याएं उत्पन्न हो रही है। जिनमें आम तौर पर लोगों में गैस, कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही है। पाचन क्रिया को सही रखने के लिए वज्रासन, कपालभाति और अग्निसार क्रिया का नियमित अभ्यास करने इस समस्या से राहत मिलेगी।
 
पाचन क्रिया को सही रखने के लिए लोग योग को जीवन में अपना सकते हैं। इसके लिए जरूरी है खान-पान नियमित ढंग से सही हाेना। इस समस्या से कुछ ऐसे योग आसन हैं, जिससे पाचन क्रिया की समस्या दूर होगी। इन सभी क्रियाओं को करने की विधि और उनसे होने वाले फायदों के बारे में बता रही हैं। अक्सर लोगों को हो जाती हैं पाचन संबंधी दिक्कतें हो जाती है। इसके लिए कपालभाति, अग्निसार, वज्रासन से पाएं अच्छा पाचन। नियमित करें योग-एक्सरसाइज और रहें फिट।
 
वज्रासन करने की विधि
खाना खाने के बाद चटाई बिछा कर बैठ जाएं। दोनों घुटनों को मोड़ लें और पंजों के बल नीचे बैठ जाएं। ध्यान रहे कि दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिल रहे हों और एड़ियों में थोड़ी दूरी होनी चाहिए। शरीर का पूरा भार आप पैरों पर डालें। वज्रासन करते समय कमर एकदम सीधी रखें। अब इसी अवस्था में दस मिनट बैठे रहें है और लम्बी-लम्बी सांस लें। वज्रासन के दौरान शरीर के मध्य भाग पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। इस दौरान पेट और आंतों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे कब्ज की दिक्कत दूर होती है और पाचन ठीक रहता है।
 
वज्रासन के लाभ
यह अमाशय, पेट और गर्भाशय की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करता है। हार्निया के रोगों के लिए यह आसन बहुत ही उपयोगी है। साइटिका और रीढ़ के निचले भाग तथा पैरों के तनाव को इस आसन के जरिए दूर किया जा सकता है। नियमित तौर पर वज्रासन का अभ्यास वेरिकोज वेन्स, ज्वाइंट पेन और गठिया जैसे रोगों को दूर रखने में मददगार है। वजन को कम और शरीर को सुडौल बनाने में यह आसन मदद करता है।
 
बरतें सावधानी
इस योग को करने से जिन्हें घुटनों में दर्द या कोई समस्या हो वे लोग इस आसन को न करें। इस आसन को खाना खाने के बाद करने से ज्यादा लाभ मिलेगा।
 
कपालभाति प्राणायाम की विधि
एक मैट पर सीधे बैठें और फिर पद्मासन की स्थिति में आएं। दोनों घुटनों को मोड़ लें और बाएं पैर को दाएं पैर पर हाथों को आकाश की तरफ रखते हुए सांस को भरें। फिर पेट को भीतर की ओर संकुचित करते हुए सांस को बाहर की तरफ छोड़ें। इस क्रिया को लगातार करें। कपालभाति में प्रत्येक सेकंड में एक बार सांस को तेजी से बाहर छोड़ने के लिए ही प्रयास करें। सांस को छोड़ने के बाद बिना प्रयास किए सामान्य रूप से सांस को अंदर आने दें। थकान महसूस होने पर बीच-बीच में रुक कर विश्राम अवश्य लेते रहें।
 
कपालभाति प्राणायाम से लाभ
यह ध्यान शक्ति भी बढ़ा देता है। मानसिक तनाव, दमे की बीमारी कपालभाति करने से दूर हो जाती हैं। कफ की बीमारी कपालभाति करने से दूर हो जाती है। कपालभाति प्राणायाम फेफड़ों की बीमारी को दूर कर देता है तथा यह व्यायाम स्वस्थ फेफड़ों को मजबूत बनाता है। कपालभाति प्राणायाम शरीर से चर्बी और वजन कम करने में सहायक होता है। कपालभाति प्राणायाम मानव शरीर की पाचन शक्ति बढ़ाता है। आंतों की कमजोरी दूर करने के लिए भी लाभदायी है। इससे पेट के सभी प्रकार के रोगों से राहत मिलती है। गैस, कब्ज और खून के विकार की समस्याएं दूर होती हैं।

सावधानी
उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, तेज कमर दर्द की समस्या से पीड़ित लोगों को इसे नहीं करना चाहिए। इसे करते वक्त कमर बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। खाना खाने के तुरंत बाद कपालभाति प्रणायाम न करें। कपालभाति का अभ्यास शुरुआत में 5 बार से 10 बार सांस अंदर बाहर करते हुए करें। फिर धीरे-धीरे अभ्यास के साथ इसे बढ़ाएं। जिन्हें घुटनों में दर्द हो वे लोग पद्मासन की स्थिति में आए बिना साधारण अवस्था में ही बैठ कर करें।
 
अग्निसार क्रिया
यह क्रिया बैठ कर या खड़े होकर की जा सकती है। सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच बराबर दूरी बना लें। थोड़ा आगे की तरफ झुकते हुए दोनों हाथों को अपनी जांघों पर रखे और सांस को भर लें। एक साथ सांस को भर लें और फिर उसे तेजी से बाहर छोड़ दें। फिर सांस को रोकते हुए पेट की मांसपेशियों को अंदर की ओर खींचें और फिर बाहर की तरफ ढकेलें। ये क्रिया लगातार करें। सांस को रोकते हुए इस क्रिया को जितना दोहरा सकते हैं दोहराएं।
 
 
शुरुआत में 5 बार इस क्रिया को करें फिर क्षमता अनुसार इसे बढ़ाएं। जब थकान महसूस हो तब इस क्रिया को रोकें और सांस लें। कुछ देर बाद इस क्रिया को वापस दोहराएं और पेट को अंदर बाहर करें। इससे पेट की चर्बी कम होगी और पेट संबंधी विकार दूर होंगे। जिन्हें उच्च रक्त चाप, हृदय की समस्या हो वे लोग इस क्रिया को न करें। खाना खाने के बाद इस क्रिया को नहीं करें।
 
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