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पाकिस्तानः सूफी दरगाह में धमाके के वक्त गाया जा रहा था ये 'गाना'

haribhoomi.com | UPDATED Feb 17 2017 11:44AM IST
नई दिल्ली. पाकिस्तान में सूफी बाबा लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह के अंदर हुए आतंकी हमले में 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। तो वहीं इस हादसे के दौरान 150 से भी अधिक लोग घायल हो गए। बता दें ब्लास्ट के वक्त दरगाह पर कलंदर बाबा का जलसा चल रहा था। अमूमन ये जलसा हर गुरुवार को सभी दरगाहों पर होता है। और बाबा की दरगाह पर महेशा उनके नाम से बना गाना सुना जा सकता है। 'दमादम मस्‍त कलंदर' उनके सम्मान में बना पहला गाना है।  
 
 
दुनिया भर में मशहूर दमादम मस्‍त कलंदर वाले सूफी बाबा यानी लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह है। माना जाता है कि महान सूफी कवि अमीर खुसरो ने शाहबाज कलंदर के सम्‍मान में 'दमादम मस्‍त कलंदर' का गीत लिखा। जिसे बाद में बाबा बुल्‍ले शाह ने इस गीत में कुछ बदलाव किए और इनको 'झूलेलाल कलंदर' कहा। सदियों से ये गीत लोगों के जेहन में रचे-बसे हैं। इसी से इस दरगाह की लोकप्रियता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिस समय ये गाना चल रहा था उस समय सूफी संगीत का कार्यक्रम चल रहा था। 
 
 
तो वहीं पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ के मुताबिक, घटना के वक्त सूफी परंपरा के मुताबिक जलसा (धमाल) चल रहा था। जहां ये जलसा चल रहा था, उसके चारों तरफ काफी लोग मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक, फिदायीन हमलावर दरगाह के गोल्डन गेट से दाखिल हुआ। उसने पहले ग्रेनेड फेंका। लेकिन वह नहीं फटा। इसके बाद उसने खुद को उड़ा लिया। इस हमले का पैटर्न पिछले साल नवंबर में बलूचिस्तान में शाह नोरानी दरगाह पर हुए ब्लास्ट जैसा ही था।
 
कौन हैं लाल शाहबाज कलंदर
सूफी परंपरा का प्रतीक बन चुके इस दरगाह का निर्माण 1356 में कराया गया था। बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो ने इस दरगाह का सौंदर्यीकरण कराया। लाल शाहबाज कलंदर, पीर सैयद हसन खैबरूद्दीन के बेटे थे। मशहूर गाना 'दमादम मस्त कलंदर' गाने को कंपोज करने में पाकिस्तान की प्रख्यात गायिका नूरजहां, उस्ताद नुसरत फतेह अली खान, आबिदा परवीन जैसे चोटी के गायकों नेअहम भूमिका निभायी। सिंध प्रांत में रहने वाले हिंदू भी शहबाज कलंदर के मजार जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि शहबाज कलंदर सिंध प्रांत के हिंदुओं के लोकप्रिय नेता झूलेलाल के पुनर्जन्म है। दमादम मस्त कलंदर गाने में भी झूलेलाल का जिक्र किया गया है।
 
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