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जानें कौन थे महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग, ऐसे किए दुनिया में असाधारण काम

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 14 2018 12:25PM IST
जानें कौन थे महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग, ऐसे किए दुनिया में असाधारण काम

ब्रिटेन के मशहूर भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग सांइस की दुनिया एक बड़ा नाम था। उन्होंने 1974 में ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च की थी और यह रिसर्च सफल भी हो गई थी। आज उनका निधन हो गया है। 

 
स्टीफन हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 इंगलैंड के ऑक्सफ़र्ड में हुआ था। जब उनका जन्म हुआ तब वह काफी स्वास्थ्य और सामान्य थे। उनके पिता फ्रेंक और माता इसोबेल दोनों ही ऑक्सफर्ड में पढ़े थे। जब स्टीफन का जन्म हुआ तब द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था। 
 
1950 में स्टीफन का परिवार लंदन में रहता था, इस दौरान उनके घर में दो बेटियों का जन्म हुआ था। इन बेटियों के बाद स्टीफन के परिवार ने एक लड़के को गोद लिया जिसका नाम एडवर्ड था। 
 
 
स्टीफन हाकिंग की माँ इसोबेल ने नौकरी की थी | सबसे  पहले उन्होंने टैक्स विभाग में इंस्पेक्टर की नौकरी की थी लेकिन उन्हें ये काम पसंद नही आया और नौकरी छोडकर सेकेट्री की नौकरी करी | 
 
हॉकिंग का परिवार शुरुआत से ही पढ़ाई का महत्व जानते थे इसलिए वो स्टीफन को लंदन के प्रख्यात पब्लिक स्कूल में पढ़ने के लिए भेजना चाहते थे लेकिन बीमारी के कारण उन्हें गाँव की स्कूल में ही दाखिला दिलाया गया| स्कूल में स्टीफन ने शुरुआत से ही अपने मन को नियंत्रित करने की शक्ति में लगे रहते थे।
 
 
अब स्टीफन 12 वर्ष के हो गए थे, मगर खेलने की बजाय उन्हें बोटिंग करना ज्यादा पसंद था। स्टीफन पढ़ाई में अच्छे तो थे, लेकिन इतने अच्छे नहीं की कक्षा में प्रथम आ सके। 
 
 
उन्हें घडियो की सरंचना को समझने में ज्यादा मजा आता था इसके लिए वो घड़ी के सारे पुर्जो को अलग कर देते थे और फिर जोड़ा करते थे। 
उनके पिता चाहते थे कि उनका पुत्र भी उनकी तरह जीव विज्ञानी बने लेकिन स्टीफन हाकिंग को जीवन विज्ञानी बनने में बिलकुल रूचि नही थी।
 
17 साल की उम्र में स्टीफन ने अपने पिता के कहने पर ऑक्सफ़ोर्ड में दाखिला लिया। शुरुवात के दिनों में उनकी पढ़ाई में बिलकुल रूचि नही थी लेकिन बाद में अपने मित्रो की वजह से उन्होंने पढाई में रूचि दिखाना शुरू कर दिया था।
 
स्टीफन दिन में सिर्फ एक घंटा पढ़ते थे। वो पुस्तके नहीं पढ़ते थे बल्कि कक्षा में पढ़कर उनके नोट्स बना लेते थे और फिर बाद में उन नोट्स में से कमिया निकाला करते थे। अब जब वो कॉलेज के तीसरे वर्ष में आये तो उन्होंने प्रमुख विषय के रूप में कोस्मोलोजी का चयन किया था। 
 
इस विषय में ब्रहमंड की उत्पति और उसके रहस्यों के बारे में थी। अब ऑक्सफ़ोर्ड के अंतिम वर्ष में वो पी एच डी के लिए पहले ही कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में एप्लीकेशन दे दी थी, मगर वहां के प्रोफेसर ने बताया था कि यदि वो ऑक्सफ़ोर्ड में प्रथम श्रेणी से पास होंगे तभी उनको कैम्ब्रिज में प्रेवश मिलेगा। 
 
 
वो अब तक पास होने के लिए पढ़ते थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि प्रथम श्रेणी से पास होना जरुरी है, तो वह पढ़ाई में जुट गए। अब परीक्षा के नजदीक आते ही उनको घबराहट होने लगी थी कि यदि प्रश्नपत्र उनके अनुरूप नही आया तो वो आगे नहीं पढ़ पायेंगे। 
 
इस कारण उन्होंने ज्यादा पढ़ाई की और वह कॉलेज में प्रथम श्रेणी में पास हो गए थे। अब उन्हें कैम्ब्रिज में प्रवेश भी मिल गया। 
 
1962 में स्टीफन हॉकिंग ने कैम्ब्रिज में दाखिला लिया और उनका पहला वर्ष काफी खराब रहा था। जब सर्दियों में स्टीफन अपने जूते की लेस भी नही बाँध पाते थे। तब स्टीफन के पिता को उनके पुत्र में बदलाव नजर आया तो वो स्टीफन हाकिंग को उनके फॅमिली डॉक्टर के पास लेकर गए। 
 
जब डॉक्टरों और विशेषज्ञ ने स्टीफन की जांच कि तो उन्हें पता चला की स्टीफन एक आसाध्य बीमारी से ग्रसित है, जिसका नाम Amyotrophic Lateral Sclerosis [ALS] है।
 
इस बीमारी में केवल आदमी का दिमाग ठीक रहता है लेकिन शरिर से जुडी तंत्रिकाए काम कर देना बंद कर देती है। स्टीफन ने जब इस बीमारी के दुष्परिनाम सुने तो उनके दिमाग में डर की बजाय इस बीमारी के कारणों के प्रश्न उठने लगे थे। इस रोग से केवल वो ही क्यों ग्रस्त हुए और इस रोग से उनकी हालत कब खराब हो जायेगी। 
 
अब डॉक्टरो ने उन्हें पीएच डी लगातार करने की सलाह दी ताकि उनकी पढ़ाई पुरी हो जाए। बिमारी की वजह से उन्होंने शराब पीना भी शुरू कर दिया था। 
 
1965 जनवरी में नए साल के जश्न के वक्त स्टीफन हॉकिंग की मुलाकात जेन वाइल्ड से हुई थी। जेन वाइल्ड को स्टीफन हाकिंग काफी पसंद आए थे, जेन को उनका खुशदिल स्वाभाव अच्छा लगता था | 
 
अस्पताल से लौटने के बाद जब स्टीफन हाकिंग की स्थिथि काफी खराब हो गई थी, तब भी जेन का उनका साथ नही छोड़ा और उनका अंतिम लक्य था कि वह स्टीफन की देखभाल में पूरा जीवन व्यतीत कर दे। 
 
1974 स्टीफन को डॉक्टरेट की उपाधि हासिल हुई इसके बाद उन्होंने ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च पर काम करना शुरू कर दिया था। इस तरह इन दोनों सिद्धांतो को मिलाकर उन्होंने महाएकीकृत सिद्धांत बनाया था। उनके इस सिद्धांत से दुनिया भर में उनका नाम हो गया और उनको एक मश्हूर वैज्ञानिक के रूप में जाना जाने लगा।

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