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जानिए चीन यात्रा के बाद दुनिया में बढ़ जाएगा भारत का कद

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 4 2017 9:35PM IST
जानिए चीन यात्रा के बाद दुनिया में बढ़ जाएगा भारत का कद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी रेटिंग एजेंसियों का मुकाबला करने तथा विकासशील देशों की सरकारी एवं कॉरपोरेट इकाइयों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ब्रिक्स क्रेडिट रेटिंग एजेंसी बनाने की सोमवार को पुरजोर वकालत की। 

चीन में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन 2017 में वैश्विक स्तर पर आतंकवाद समेत देशों की अर्थव्यवस्था को लेकर भी चर्चा हो रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था पर चर्चा की। 

लेकिन इस चर्चा के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच भारत का कद बढ़ गया है। सिर्फ भारत की अर्धव्यस्था ही नहीं ब्रिक्स देशों के साथ भी भारत के संबंध काफी अच्छे रहे हैं। सिर्फ चीन को छोड़ें तो ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका से भारत के काफी अच्छे संबंध हैं।

ब्रिक्स देश आर्थिक मुद्दों पर एक साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन इनमें से कुछ के बीच भारी विवाद हैं। इन विवादों में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद प्रमुख है। जिसकों लेकर कुछ दिन पहले ही भारत और चीन सीमा पर दोनों देशों की सेना हटाई गई। 

भारत-चीन संबंध

भारत और चीन के बीच व्यापार का लेन देन और निवेश होता रहता है जिससे दोनों के व्यापार को बढ़ावा मिलता है। दोनों एक दूसरे का सहयोग भी करते हैं लेकिन दोनों के बीच सीमा विवाद को लेकर काफी एक दूसरे पर हमले के बयान काफी बार सामने आ चुके हैं। लेकिन अंत में डोकलाम के मुद्दे पर रूस ने भारत का साथ दिया है। और अगले ही दिन चीन ने आपनी सेना वापस बुला ली। 

भारत- रूस संबंध

भारत और रूस के बीच संबंध आज के नहीं है ये तो काफी पुराने हैं और रूस हम मामले में भारत का सहयोगी और घनिष्ठ मित्र भी रहा है। चीन के साथ 1962 के भारत-चीन युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के बाद भारत और सोवियत संघ के साथ सैन्य संबंध काम घनिष्ठ हैं। 

एनएजी सदस्य बनने के लिए रूस ने भारत की हर बार वकालत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ब्रिक्स सम्मेलन में मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश बढ़ाने के तरीकों के साथ ही अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति पर चर्चा भी की।

भारत और दक्षिण अफ्रीका

भारत-अफ्रीका के संबंध इस समय प्रगाढ़ता के नए दौर में प्रवेश कर गए हैं। इन्हीं संबंधों को और मजबूती के लिए इस बार भी ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वो आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ खड़ हुआ। दोनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्य भी हैं। आज के दौर में, जबकि आर्थिक शक्ति के साथ अफ्रीकी संघ की राजनीतिक दृष्टि से ताकत बढ़ गई है।

भारत और ब्राजी संबंध

किसी भी देश की विदेश नीति इतिहास से गहरा सम्बन्ध रखती है। भारत की विदेश नीति भी इतिहास और स्वतन्त्रता आन्दोलन से सम्बन्ध रखती है। ऐतिहासिक विरासत के रूप में भारत की विदेश नीति आज उन अनेक तथ्यों को समेटे हुए है।

जिसकी वजह से भारत और ब्राजील के बीच आज भी गहर और व्यापक व्यापार संबंध कायम हैं। दुनिया में तेजी से उभर रही दो विश्व अर्थव्यवस्थाओं भारत और ब्राजील ने अपने आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को हमेशा कामय रखा है। भारत को छोड़ दें, और कुछ हद तक ब्राजील को छोड़ दें तो बाकी तीन देशों के पास सॉफ्ट पावर की कमी है। 

सभी देशों के अंग्रेजी नाम के पहले अक्षर को लेकर ब्रिक्स शब्द बना है। साल 2009 में ब्रिक बना और साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका को शामिल कर इसका नाम ब्रिक्स हुआ। इसके तहत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका आते हैं। 

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-Tags:#Brics 2017#Brics Summit#Pm Modi#GST

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