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लालू से छीनी 'जेड प्लस सिक्योरिटी', जानिए क्या होता है इसका मतलब

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 29 2017 2:56PM IST
लालू से छीनी 'जेड प्लस सिक्योरिटी', जानिए क्या होता है इसका मतलब

केंद्र सराकर ने राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की जेड प्लस सुरक्षा को हटा लिया है, जिस पर सियासी बवाल मच गया है। लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने गुस्से में पीएम मोदी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया और लालू ने भी कहा कि ये फैसला सही नहीं है।

देश में बड़े नेताओं, बड़े अधिकारियों और खास शख्सियतों को सरकार की तरफ से अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। आज हम आपको बताते है देश में कितने प्रकार की सुरक्षाएं दी जाती हैं।

इतने प्रकार की होती है सुरक्षा

देश में दिग्गज नेताओं और बड़ी शख्सियतों को जेड प्लस, जेड, वाई और एक्स श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाती है। इन श्रेणी की सुरक्षाओं में केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, मशहूर नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। भारत में फिलहाल करीब 450 लोगों को इस तरह का सुरक्षा कवच मिला हुआ है।

ऐसी होती है जेड प्लस सुरक्षा?

केंद्र सरकार की तरफ से दी जाने वाली सभी सुरक्षा में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप 'एसपीजी', नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स 'एनएसजी', इंडियन-तिब्बत बॉर्डर पुलिस 'आईटीबीपी' और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स 'सीआरपीएफ' एजेंसियां शामिल होती हैं।

जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा वीवीआईपी श्रेणी की सुरक्षा मानी जाती है। यह देश की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा में 36 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इसमें  नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के कमांडो शामिल रहते हैं।

बता दें कि इस सुरक्षा में पहले घेरे की जिम्मेदारी नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स की होती है। जबकि दूसरी परत की जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की होती है। इसके अलावा आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान भी जेड प्लस सुरक्षा श्रेणी में शामिल रहते हैं।

ऐसी होती है जेड और वाई श्रेणी की सुरक्षा?

जेड श्रेणी की सुरक्षा में आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान और अधिकारी सुरक्षा में लगाए जाते हैं। इस श्रेणी की सुरक्षा में सुरक्षाकर्मियों की संख्या 22 होती है। जेड श्रेणी की सुरक्षा में एस्कॉर्ट्स और पायलट वाहन भी दिए जाते हैं।

जबकि वाई श्रेणी सुरक्षा में सुरक्षाकर्मियों की संख्या 11 होती है। जिनमें दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफीसर्स (पीएसओ) शामिल होते हैं। एक्स कैटगरी में मात्र 2 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं जिनमें एक पीएसओ शामिल होता है।

एसपीजी का गठन

वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1988 में एसपीजी का गठन हुआ था। जिसका सालाना बजट 300 करोड़ रुपये से अधिक है और इसे देश की सबसे महंगी और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था माना जाता है।

बता दें कि फिलहाल देश में सिर्फ आठ लोगों को यह सुरक्षा मिली हुई है। जिसमें पीएम मोदी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, उनकी पत्नी गुरशरण कौर, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्या, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा शामिल हैं।

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