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यूपी विधानसभा चुनाव 2017: इन पांच कारणों से भाजपा ने जीती यूपी

By haribhoomi.com | Mar 11, 2017 |
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नई दिल्ली. यूपी में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत पर सभी राजनीतिक पंडितों की भविष्य वाणी विफल हो गई और भाजपा ने यूपी में एक बार फिर 14 साल बाद जीत का कमल खिला ही दिया। भाजपा के दिग्गजों की रणनीति और शाह-मोदी ने मिलकर यूपी में जीत का एेसा रोडमैप तैयार किया, जिसे विपक्षी पार्टियां भांप न सकीं। हरिभूमि आपको बता रहा है यूपी में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के 5 मुख्य कारण...
 
(1) फिर दिखाई दी मोदी की लहार 
2014 के लोकसभा चुनावों में जिस तरह की पीएम मोदी की लहर देखी दी थी, उसी तरह विधानसभा चुनाव में भी मोदी का मैजिक चल गया। खबर लिखे जाने तक यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा को 403 में से 325 सीटें मिली हैं। 
 
(2) सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी का लोगों ने किया समर्थन 
उरी अटैक के बाद भारतीय सेना द्वारा पीओके पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक का सीधा फायदा भाजपा को मिला, क्योंकि भाजपा ने इस मुद्दे को बहुत भुनाया था। इसके बाद 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की विपक्ष ने जमकर आलोचना की थी, लेकिन जनता ने इतना भाजपा को भारी बहुमत से जिताया है।
 
(3) सपा-कांग्रेस के गठबंधन का फायदा मिला भाजपा को
सपा और कांग्रेस में गठबंधन होने के बाद अखिलेश यादव ने कांग्रेस को काफी सीटें दी थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच कोई तालमेल नजर नहीं आया। जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला और इतना ही नहीं कांग्रेस के वोट भी सपा की तरफ नहीं आए।
 
(4) स्टार कैंपेनर बने दिग्गज और स्थानीय नेताओं को दी अहमियत 
इस बार भाजपा ने पूरी रणनीति के साथ काम किया और यूपी में बिहार चुनाव जैसी गलती नहीं की। लेकिन इस बार भी भाजपा ने यूपी में सीएम कैंडिडेट का एेलान नहीं किया। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनावी कैंपेनर बने, वहीं दूसरी तरफ पार्टी ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पूरी तरजीह दी। राजनाथ सिंह, केशव प्रसाद मौर्य, कलराज मिश्रा, उमा भारती भी बीजेपी के स्टार कैंपेनर थे, लेकिन लोकल नेताओं ने अपने स्तर पर पार्टी के काम का खूब बखान किया।
 
(5) सभी उम्मीदवारों का रखा पूरा ख्याल 
यूपी चुनावों में भाजपा के लिए जीत और जीतने वाले दोनों ही मायने रखते थे, इसलिए भाजपा ने दूसरी पार्टी से आने वाले उम्मीदवारों का पूरा ख्याल रखा और उन्हें चुनावी मैदान में उतारा। जो उम्मीदवार बाहर से आए थे, उन्हें भी भाजपा ने टिकट दी थी। यही फॉर्म्युला भाजपा ने महाराष्ट्र निकाय चुनावों में अपनाया था, जिसमें उसे काफी सीटें मिली थीं।
 
 
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