भारत

पुराने बैंक खातों को खंगालने की तैयारी में केंद्र

By o.p pal | Jan 08, 2017 |
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नई दिल्ली. देश में कालेधन के खिलाफ नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले सत्तर साल के हिसाब-किताब लेने पर शायद सरकार एक्शन मोड़ पर है। ऐसी संभावना है कि संसद में पेश किये जाने वाले आम बजट में कालाधन रखने वाले सरकार के निशाने पर होंगे। मसलन कालेधन के खिलाफ आयकर कानून में संशोधन के जरिए आयकर विभाग को ऐसे अधिकार देने की तैयारी में हैं, जिसके तहत आयकर विभ्ज्ञाग कर छह साल पुराने बैंक खातों को खंगाल सकेगी?
 
सूत्रों के अनुसार सरकार का आयकर कानून में संशोधन करने का मकसद प्रधानमंत्री मोदी के उस कथन पर आधारित होगा, जिसमें पिछले कई दशकों से जमा धन का भी सुराग लगाया जा सके। आयकर विभाग के सूत्रों की माने तो सरकार के केंद्रीय बजट में ऐसी व्यवस्था करने का ऐलान सामने आ सकता है। फिलहाल तो आयकर कानून में संशोधन के जरिए ऐसे प्रावधान कर रही है जिसमें आयकर विभाग छह साल से पुराने किसी भी खाते की जांच कर सके। सूत्रों के अनुसार सरकार ने पिछले वर्ष 2016 में स्वेच्छा से काले धन का ऐलान करने के लिए दो स्कीमें शुरू करके काला धन रखने वालों को मौका दिया था। 
 
केंद्रीय बजट के प्रावधान के अलावा सरकार आयकर कानून में संशोधन करने का मकसद है कि आयकर विभाग को पुराने मामलों को खोलने में आ रही समस्याओं को दूर किया जाए, जिसमें नए बजट में आयकर कानून को सुधारने की तैयारी है। सरकार यदि आयकर कानून में सुधार के लिए संशोधन करने में कामयाब हुई तो आयकर विभाग 40 साल पहले जमा किए गए काले धन का भी पता लगाने की कार्यवाही में जुट सकती है। गौरतलब है कि नोटबंदी लागू होने के बाद सरकार ने आयकर कानून में संशोधन करते हुए अध्यादेश जारी किया है, लेकिन संसद के बजट सत्र में सरकार कालेधन के खिलाफ इस मुहिम में जड़ तक पहुंचने के इंतजाम करने की तैयारी में है।
 
कर की सीमा को लेकर सवाल
आयकर विभाग से जुडें सूत्रों की माने तो यदि उनका विभाग कुछ साल पुराना कालाधन पकड़ता है तो उस पर कर की दरें मौजूदा समय के तहत ही लागू होंगी, हालांकि इस तरह के पुराने कालेधन पर लगने वाले कर लगाने की योजना की आलोचना करके इसेगलत बताने से पीछे नहीं हट रहे हैं। कालेधन के पकड़े जाने पर कुछ संगठन चाहते हैं आयकर कानून में ऐसे सुधार करने की जरूरत हे कि जिसमें स्पष्ट हो सके कि आयकर विभाग कितने पुराने समय के कालेधन को तलाश सकता है और ऐसे काला धन रखने वालो के खिलाफ किस आधार पर कार्यवाही की जा सकती है। गौरतलब है कि मोदी सरकार की कालेधन को लेकर चलाई गई स्वैच्छिक योजना के 30 सितम्बर तक कुल 65,250 करोड़ रुपए की अघोषित राशि सामने आई थी, जिसमें करीब 30 हजार करोड़ का कर सरकार के कोष में आया था।
 
विदेशी कालेधन पर आगे बढ़ी सरकार
सूत्रों के अनुसार विदेशी कालाधन मामलों की जांच कर रही एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कर संधियों में नया प्रावधान जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे कानून लागू करने वाले कई विभागों के बीच आंकड़ों के आदान-प्रदान की अनुमति मिल जाएगी और जांच को प्रभावित करने वाली गोपनीयता की शर्त हट जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकार नये प्रावधान को दोहरा कराधान बचाव संधि में जोड़ रही है। इसका ही कारण है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के आंकड़ों को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, राजस्व खुफिया निदेशालय और अन्य एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकेगा।
 
मकसद कालाधन पकड़ना
 
सरकार की कालेधन के खिलाफ इस मुहिम को आगे बढ़ाने का ही संकेत है कि आयकर विभाग ने एक नया निर्देश जारी किया है जिसमें सभी बैंक खाताधारकों को 28 फरवरी तक पेन नंबर बैंकों में जमा कराने का फरमान शामिल है। ऐसा न करने वालों के लिए फॉर्म 60 देने का नियम अनिवार्य किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि एसे अनेक पुराने बैंक खाते हैं जिनमें पेन नहीं जुड़ा है।
 
जबकि कुछ जन धन खातों, बेसिक अकाउंट और खास तरह के टाइम डिपॉजिट को छोड़ बाकी सभी बैंक खातों को खोलने के लिए पैन जरुरी है। इन निर्देशों का यही मकसद है कि नोटबंदी के पहले जमा कराई रकम के बारे में ब्यौरा इकट्ठा करने के तहत खाताधारकों के इतिहास को खंगाला जा सके। इसमें इस बात की भी पुष्टि हो जाएगी कि किस खातेधारक ने पुराने नोट के रुप में काला धन तो अपने खाते में जमा नहीं कराया या फिर किसी ने उसके खाते का दुरुपयोग तो नहीं किया।

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