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जीडीपी ग्रोथ 5.7 से बढ़कर 6.3% हुई, मोदी सरकार को मिली बड़ी राहत

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 30 2017 6:47PM IST
जीडीपी ग्रोथ 5.7 से बढ़कर 6.3% हुई, मोदी सरकार को मिली बड़ी राहत

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.3 पहुंच गई। पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.7 प्रतिशत रही थी। देश में 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद जीडीपी का यह पहला आंकड़ा है।

देश की आर्थिक वृद्धि दर में पिछली पांच तिमाहियों से जारी जारी गिरावट का रुख थम गया है। विनिर्माण क्षेत्र में तेजी के साथ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रही।

वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही थी। हालांकि, इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 7.5 प्रतिशत रही थी।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़े के अनुसार विनिर्माण, बिजली, गैस, जल आपूर्ति, अन्य उपयोग सेवाओं तथा व्यापार, होटल, परिवहन तथा संचार एवं प्रसारण से जुड़े सेवा क्षेत्र में 6 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई।

वहीं कृषि, वानिकी तथा मत्स्यन क्षेत्र की वृद्धि दर आलोच्य तिमाही में 1.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं राजस्व प्राप्ति कम रहने और खर्च बढ़ने से देश का राजकोषीय घाटा अक्टूबर अंत तक 2017-18 के बजट अनुमान के 96.1 प्रतिशत तक पहुंच गया।

लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार खर्च और राजस्व के बीच का अंतर यानी राजस्व घाटा चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अक्टूबर अवधि में 5.25 लाख करोड़ रुपए रहा है।

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इससे पिछले वित्त वर्ष इसी अवधि में यह 79.3 प्रतिशत रहा था। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा है। पिछले वित्त वर्ष में सरकार 3.5 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने में सफल रही थी।       

लेखा महानियंत्रक के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले सात माह में राजस्व प्राप्तियां 7.29 लाख करोड़ रुपए रहीं, जो पूरे साल के 15.15 लाख करोड़ रुपए के बजट अनुमान का 48.1 प्रतिशत है।

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एक साल पहले प्राप्तियां लक्ष्य का 50.7 प्रतिशत रही थीं। आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर अंत तक सरकार का कुल खर्च 12.92 लाख करोड़ रुपए रहा, जो बजट अनुमान का 60.2 प्रतिशत है।

एक साल पहले यह बजट अनुमान का 58.2 प्रतिशत था। अप्रैल-अक्टूबर के दौरान पूंजीगत व्यय बजट अनुमान का 52.6 प्रतिशत रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 50.7 प्रतिशत था।

इस दौरान राजस्व व्यय (ब्याज भुगतान सहित) बजट अनुमान का 61.5 प्रतिशत रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 59.2 प्रतिशत था।

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