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भारत और जापान के बीच बढ़ी नजदीकी, चीन परेशान

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 7 2017 9:14AM IST
भारत और जापान के बीच बढ़ी नजदीकी, चीन परेशान

डोकलाम में चीनी सेना के साथ करीब ढाई महीने तक चली तनातनी के खत्म होने के बाद बीजिंग में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा इस पर आगे न बढ़ने के ऐलान के अगले दिन भारत ने जापान संग अपने सैन्य-सामरिक संबंधों को नए सिरे से एक व्यापक मजबूत आयाम देने का निर्णय किया है।

इसकी झलक तत्कालीन रक्षा मंत्री अरुण जेटली के जापान दौरे में दोनों पक्षों की ओर से जारी किए गए संयुक्त वकतव्य में साफ देखने को मिल रही है। यहां बता दें कि जापान संग भारत के द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की मजबूती चीन के लिए परेशानी का सबब हो सकती है।

क्योंकि दोनों के बीच दक्षिण से लेकर पूर्वी चीन सागर में समुद्री सीमाई विवाद चल रहा है। बातचीत में तय हुआ है कि अगले वर्ष 2018 में जापान के रक्षा मंत्री और उनकी सेनाओं के प्रमुख यानि जांइट स्टाफ जापान सेल्फ डिफेंस फोर्स भारत का दौरा करेंगे। यह यात्रा दोनों के बीच पांचवे, छठे रक्षा मंत्री व सचिव स्तर की वार्ता होगी।       

आतंकवाद से मुकाबले को पहला युद्धाभ्यास

रक्षा मंत्रालय द्वारा बुधवार को दी गई जानकारी के मुताबिक इस बातचीत में दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने पर सहमति बनी है।

इसमें भारत-जापान की थलसेनाओं के बीच अगले वर्ष 2018 में आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए पहली बार एक संयुक्त युद्धाभ्यास किया जाएगा।

इसके अलावा जापान की सेना ने भारत की सेना को प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप के समय राहत एवं बचाव कार्य (एचएडीआर) को लेकर किए जाने वाले युद्धाभ्यास में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया है।

भारत, जापान व अमेरिका की नौसेनाओं के बीच बंगाल की खाड़ी में बीते जुलाई महीने में त्रिपक्षीय मालाबार अभ्यास हुआ था। लेकिन अब इसका और विस्तार करने का निर्णय लिया गया है।

ऐसे में इस बात की पुरजोर संभावना नजर आ रही है कि इसमें ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल किया जा सकता है। आस्ट्रेलिया की ओर से भी इसकी इच्छा जताई जा चुकी है।

चीन की नाराजगी के चलते अब तक आस्ट्रेलिया को इसमें शामिल नहीं किया गया है। अपनी यात्रा के दौरान अरुण जेटली ने जापान के एक नौसैन्य अड्डे का भी दौरा किया।

यहां उन्होंने जापानी नौसेना के विमान पी-1 के सम्यिुलेटर (विमान उड़ाने से पहले प्रशक्षिण के लिए तैनात उपकरण) पर उड़ान का अनुभव भी लिया। जापान के रक्षा मंत्री ऑनेद्रा ने 2018 के मालाबार अभ्यास में पी-1 विमान को शामिल करने की इच्छा जताई। इसका जेटली ने स्वागत किया है।

साथ ही दोनों के बीच समुद्र के अंदर दुश्मन की पनडुब्बी की आक्रमकता पर नजर रखने के लिए एंटी सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) प्रशक्षिण का आगाज करने का फैसला भी हुआ।

इसमें जापान ने भारतीय नौसेना को अपने पी-3 सी विमान की यूनिट में प्रशक्षिण देने के अलावा समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने के लिए भी प्रशक्षिण देने के लिए आमंत्रित किया है।

वायुसैन्यअड्डों के बीच बढ़ेंगी यात्राएं

दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच हवाई सुरक्षा और हवाई चालक दल के विषय में द्विपक्षीय आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।

दोनों रक्षा मंत्रियों ने भवष्यि में एक-दूसरे के वायुसैन्यअड्डों की यात्राओं के जरिए संबंधों को बढ़ावा देने का नर्णिय किया है। साथ ही रक्षा एवं शोध संस्थानों के बीच शैक्षिक आदान-प्रदान को भी विस्तार देने पर जोर दिया है।

रक्षा उपकरण, तकनीक पर जोर

दोनों देशों की सरकारों व उद्योग जगत के बीच रक्षा उपकरणों व तकनीक को लेकर बढ़ रहे संवाद को लेकर मंत्रियों ने प्रसन्नता जाहिर की।

इस बाबत बनाए गए संयुक्त समूह के प्रयासों पर भी संतोष जताया गया। इसके अलावा यूएस-2 नामक एंफीबियस विमान को लेकर जारी प्रयासों पर भी दोनों देशों ने नजर डाली।

डीआरडीओ और जापान की एटीएलए के बीच शोध को लेकर तकनीक सहयोग पर सहमति बनी है। इसमें मानवरहित ग्राउंड उपकरण व रोबोटक्सि शामिल हैं। जेटली ने रक्षा मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में किए गए नीतिगत बदलावों के बारे में जापान को बताया और कहा कि भारत विदेशी उद्योग जगत को इसके जरिए एक व्यापक अवसर प्रदान करना चाहता है।

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-Tags:#India#Japan#Arun Jaitley#China
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