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पढ़िए, अपने पहले भाषण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने क्या-क्या कहा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 25 2017 3:03PM IST
पढ़िए, अपने पहले भाषण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने क्या-क्या कहा

भारत के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज मंगलवार 25 जुलाई को संसद के सेन्ट्रल हॉल में दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर राष्ट्रपति पद की शपथ ली। 

इस समारोह में राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के चीफ जस्टिस जेएस खेहर, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, संसद सदस्य, तीनों सेना के प्रमुख समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे। 

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शपथ ग्रहण समारोह में कोविंद ने राष्ट्रपति की हैसियत से अपना पहला भाषण दिया। इसमें उन्होंने अपने जीवन वृतांत, भारत की वर्तमान परिस्थिति और भविष्य में भारत का क्या संभावनाएं होंगी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। 

आइए जानते हैं कि क्या ख़ास कहा है भारत के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने पहले भाषण में:

1. शपथ कार्यक्रम के दौरान कोविंद ने कहा कि संसद के सेंट्रल हॉल में आकर उनकी पुरानी यादें ताजा हो गईं हैं। उन्होंने कहा कि जब वो सांसद थे तब उन्होंने इसी सेंट्रल हॉल में कई राजनेताओं से विचार साझा किए हैं और कई बार कई मुद्दों पर असहमत भी हुए, लेकिन सदा एक दूसरे के विचारों का सम्मान किया।

2. उन्होंने अपनी जीवन यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी परवरिश एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में हुई है। उन्होंने कहा कि हर चुनौती के बावजूद हमारे देश में संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूलमंत्र का पालन किया जाता है और वो सदैव इसका पालन करेंगे।

3. कोविंद ने भाषण के दौरान कहा कि वो देश के 125 करोड़ लोगों को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का एहसास है कि वो डॉ। राजेंद्र प्रसाद, डॉ। सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ। एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणव मुखर्जी जैसी महान हस्तियों के पद्चिह्नों पर चलने जा रहा हूं।

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4. उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर ने हमारे अंदर मानवीय गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों का संचार किया। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसे नवीन भारत के निर्माण के लिए आगे आना होगा जो न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो बल्कि नैतिकता के लिहाज से भी सर्वोच्च हो।

5. उन्होंने कहा कि भारत की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है। विविधता ही वह आधार है जो हमें सबसे अलग बनाता है। उन्होंने कहा बेशक हम अलग हैं, लेकिन एक हैं, एकजुट हैं। उन्होंने 21वीं सदी भारत का जिक्र करते हुए कहा कि 21वीं सदी में चौथी औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा मिलेगा।

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-Tags:#India News#President Of India#Ramnath Kovind
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