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हिजबुल मुजाहिद्दीन को आंतकी संगठन घोषित होने का दुख मना रहा है पाक

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 18 2017 11:06AM IST
हिजबुल मुजाहिद्दीन को आंतकी संगठन घोषित होने का दुख मना रहा है पाक

अमेरिका द्वारा पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही पाकिस्‍तान इसको लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर से बेनकाब हो गया है। अमेरिका के इस फैसले के बाद हिजबुल के कई खातों को सीज करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व डीजीपी एमएम खजूरिया ने अमेरिका के इस कदम को बेहद सराहनीय कदम बताया है। उनका कहना है कि इस फैसले के बाद पाकिस्‍तान के काले कारनामे और इस संगठन को लेकर फैलाया जाने वाला सफेद झूठ सभी के सामने आ गया है।

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नाम बदलकर कर सकता है काम

खजूरिया ने कहा कि इस फैसले के बाद पाकिस्‍तान अपने यहां पर इस तरह के आतंकी संगठन और इससे जुड़े आतंकियों के न होने की बात नहीं कह सकेगा, जैसा वह अब तक करता आया है।

हालांकि उन्‍होंने इस संभावना से भी इंकार नहीं किया कि अब यह आतंकी संगठन अपना नाम बदलकर अपने कामों को अंजाम देगा। उनका कहना था कि यदि ऐसा होता भी है, तो फिर उसको भी प्रतिबंधित किया जाएगा।

अमेरिका ने दिया पाक को बड़ा झटका

बातचीत के दौरान उन्‍होंने यह भी कहा कि इस तरह की चीजें लगातार चलती रहेंगी और आगे भी प्रतिबंध लगते रहेंगे। लेकिन फिलहाल के लिए अमेरिका द्वारा की गई घोषणा पाकिस्‍तान के लिए बड़ा झटका है। पूर्व डीजीपी का यह बयान काफी अहम इसलिए भी है, क्‍योंकि पाकिस्‍तान की सरकार ने अमेरिका के इस फैसले पर गहरा अफसोस जताया है।

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पाकिस्‍तान का दर्द 

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता नफीस जकारिया ने इस फैसले पर अफसोस जताते हुए एक बार फिर इसको कश्‍मीर की आजादी की लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि पिछले 70 वर्षों से कश्‍मीर के लोग अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्‍होंने भारत पर कश्‍मीर में सेना के दम पर अधिकार जमाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कश्‍मीर में बल प्रयोग कर भारतीय सेना वहां के लोगों के साथ ज्‍यादती कर रही है।

मीडिया को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जकारिया सिर्फ यहीं पर नहीं रुके, बल्कि उन्‍होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने हमेशा से ही आतं‍कवाद के खिलाफ छिड़ी लड़ाई में पाकिस्‍तान द्वारा उठाए गए कदमों की तारीफ की है

हिजबुल मुजाहिदीन का गठन 1989 में

गौरतलब है कि हिजबुल मुजाहिद्दीन का गठन 1989 में हुआ था। इसका हैडक्‍वार्टर पीओके के मुजफ्फराबाद में है। इस संगठन के सैयद सलाहउद्दीन को अमेरिका पहले ही ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित किया जा चुका है।

हालांकि इस घोषणा का उस पर या फिर पाकिस्‍तान की सरकार पर कोई असर होता दिखाई नहीं दिया है। इसकी वजह है कि वह पाकिस्‍तान में खुलेआम घूमता है और भारत के खिलाफ तकरीर देता है। इतना ही नहीं वह पा‍क अधिकृत कश्‍मीर में अपने आतंकियों को ट्रेनिंग के लिए कैंप भी चलाता है।

उसको न सिर्फ वहां की सरकार बल्कि पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा समर्थन मिला हुआ है। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में मारे गए हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को स्वतंत्रता सेनानी बताकर महिमामंडित करने की कोशिश की थी। जबकि बुरहान वानी पर घाटी में कई आतंकी वारदातों को अंजाम देने का आरोप था।

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