Top

GST परिषद बैठक: 29 वस्तुओं और 53 सेवाओं पर कम हुआ जीएसटी, पेट्रोल-डीजल पर विचार नहीं

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jan 18 2018 9:10PM IST
GST परिषद बैठक: 29 वस्तुओं और 53 सेवाओं पर कम हुआ जीएसटी, पेट्रोल-डीजल पर विचार नहीं

जीएसटी परिषद ने गुरुवार को जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल करने पर विचार विमर्श किया। ताकि छोटी इकाइयों पर अनुपालन का बोझ कम हो सके। 

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद की गुरुवार को हुई 25वीं मीटिंग में 29 उत्पादों और 54 श्रेणियों की सेवाओं पर कर की दरें घटाने का भी फैसले किए गए। 

अगली मीटिंग इन चीजों पर किया जाएगा विचार

आपको बता दें कि जीएसटी परिषद में सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं। मीटिंग के बाद अरुण जेटली ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि परिषद की अगली मीटिंग में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन एटीएफ और रीयल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार किया जा सकता है। 

यह भी पढ़ें- पद्मावत सुप्रीम कोर्ट फैसला: बिहार के मुजफ्फरपुर में सिनेमा हॉल के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन-तोड़फोड़

अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए परिषद ने इस विचार पर चर्चा की कि पंजीकृत इकाइयां जीएसटीआर 3 बी फॉर्म में जीएसटी रिटर्न दाखिल करना जारी रखें। वहीं इसके साथ ऐसी प्रणाली की ओर बढ़ा जाए जिसमें आपूर्तिकर्ता के इन्वॉयस मे लेनदेन का ब्योरा आ जाए। 

जीएसटी परिषद की अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं 

अरुण जेटली ने कहा कि इस बारे में राज्यों को लिखित में जानकारी भेजने के बाद नई प्रक्रिया को जीएसटी परिषद की अगली बैठक में अंतिम रूप दिया जा सकता है। जीएसटी परिषद की अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं की गई है।

कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी

अरुण जेटली ने बताया कि ट्रांसपोर्टरों को राज्यों के बीच 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सामान या माल की आपूर्ति के लिए अपने साथ इलेक्ट्रानिक वे बिल या ई-वे बिल रखना होगा। यह व्यवस्था एक फरवरी से क्रियान्वित की जा रही है। 

यह भी पढ़ें- 'सरकार सोती रही और चीनी सैनिकों ने डोकलाम पर किया कब्जा'

इससे कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि 15 राज्यों ने राज्य में वस्तुओं की आवाजाही के लिए ई-वे बिल प्रणाली को लागू करने का फैसला किया है। बता दें कि जीएसटी को पिछले वर्ष एक जुलाई से लागू किया गया था।

आईटी नेटवर्क की वजह से टला ई-वे बिल का प्रावधान

लेकिन ई-वे बिल के प्रावधान को आईटी नेटवर्क की तैयारियां पूरी नहीं होने की वजह से टाल दिया गया था। एक बार ई-वे बिल प्रणाली लागू होने के बाद कर अपवंचना काफी मुश्किल हो जाएगी क्योंकि सरकार के पास 50,000 रुपये से अधिक के सभी सामान की आवाजाही का ब्योरा होगा। 

यदि आपूर्तिकर्ता या फिर खरीदार में से कोई एक भी रिटर्न दाखिल नहीं करता है, तो इस अंतर को पकड़ा जा सकेगा। 

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
gst council decisions 29 handicrafts items put in 0 slab

-Tags:#Arun Jaitley#GST#GST Council#Gst Council Meeting#GST Compliance#GST Effect#Budget 2018
मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo