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बीमारी से नहीं भारत में सांस लेने से हर साल मरते हैं 12 लाख लोग

haribhoomi.com | UPDATED Jan 12 2017 3:54PM IST

नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के हालात से पूरी दुनिया वाकिफ हो चुकी है। वहीं एक रिपोर्ट का कहना है कि भारत में हर साल वायु प्रदूषण के कारण करीब 12 लाख लोगों की जानें चली जाती हैं। ग्रीनपीस की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली देश का सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला शहर है। वहीं कई शहर ऐसे भी हैं जहां सांस भी लेना दूभर है। 

कई राज्यों के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से मिली जानकारियों के आधार पर बनाई गई ग्रीनपीस की यह रिपोर्ट बेहद भयानक स्थिति की ओर इशारा कर रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में हर साल करीब 12 लाख लोगों की मौत हो जाती है, इसका कारण वायु प्रदूषण है। वहीं दिल्ली की हवा में भी जहर है। दिल्ली समेत देश के कई शहर ऐसे हैं जहां सांस लेना भी मुश्किल है। 
 
वायु प्रदूषण का फैलता जहर-
24 राज्यों के 168 शहरों की स्थिति पर ग्रीनपीस इंडिया द्वारा दी गई इस रिपोर्ट का नाम 'वायु प्रदूषण का फैलता जहर' है। इसमें बताया गया है कि WHO और दक्षिण भारत के कुछ शहरों को छोड़कर भारत के किसी भी शहर में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के प्रदूषण निंयत्रित करने के लिए बनाए गए मानकों की सीमा का पालन नहीं किया है।
 
वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन-
रिपोर्ट में इसके कारणों को चिन्हित करते हुए बताया गया है कि इसका मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला,पेट्रोल, डीजल का बढ़ता इस्तेमाल है। सीपीसीबी से आरटीआई के द्वारा प्राप्त सूचनाओं में पाया गया कि ज्यादातर प्रदूषित शहर उत्तर भारत के हैं। यह शहर राजस्थान से शुरु होकर गंगा के मैदानी इलाके से होते हुए पश्चिम बंगाल तक फैले हुए हैं। आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं और वायु प्रदूषण पर हुए पुराने अध्ययन का गहराई से विश्लेषण करने के बाद पाया गया कि वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन है। इनके बढ़ते इस्तेमाल से वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।
 
दिल्ली की हवा में भी जहर-
देश के 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों का 2015 में वायु प्रदूषण का स्तर PM 10 (2) 268 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (g/m3) से 168 g/m3 के बीच रहा। इसमें 268 g/m3 के साथ दिल्ली टॉप पर है। वहीं इसके बाद अन्य शहरों में उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद, इलाहाबाद, बरेली, कानपुर, हरियाणा का फरीदाबाद, झारखंड का झरिया, रांची, कुसेंदा, बस्टाकोला है। बिहार के पटना का प्रदूषण स्तर PM 10, 258 g/m3 से 200 g/m3 रहा।
 
ये शहर रहने योग्य नहीं-
रिपोर्ट में बताया गया है कि जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक प्रयोग के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। ग्रीनपीस के साथ काम करने वाले सुनील दहिया के मुताबिक, 'रिपोर्ट में शामिल शहरों ने इसे नियंत्रित करने का कोई कारगर उपाय नहीं किया जिसके कारण ये शहर वायु प्रदूषण के आधार पर रहने योग्य नहीं कहे जा सकते। यहां सांस लेना तक मुश्किल हो गया है लेकिन सरकारी तंत्र इस पर कान बंद कर बैठे हुए हैं।'
 
बढ़ रही वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या-
सुनील ने कहा कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या तंबाकू के कारण होने वाली मौतों से कुछ ही कम रह गयी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण की समस्या केवल दिल्ली की नहीं है इसलिए प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति बेहद मजबूत, कारगर और लक्ष्य केंद्रित बनानी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए सबसे पहले ऊर्जा और यातायात के क्षेत्र में कोयला, पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधनों पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी।
 
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