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जानिए क्या है स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें जिसके लिए हजारों किसान उतरे हैं सड़कों पर

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 12 2018 11:22AM IST
जानिए क्या है स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें जिसके लिए हजारों किसान उतरे हैं सड़कों पर

महाराष्ट्र में अपनी मांगों के पूरा न होने से नाराज किसान सोमवार को राज्य विधानसभा का घेराव करेंगे। अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले किसान 7 मार्च को नासिक से शुरू हुआ ये आंदोलन रविवार को राज्य की राजधानी मुंबई पहुंच गया।

इस मार्च में लगभग 30 हजार से ज्यादा किसान हिस्सा ले रहे हैं। विरोध कर रहे किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार आदिवासी किसान भूमि आवंटन संबंधी मामलों का भी निपटारा करे।  

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स्वामीनाथन आयोग

जब भी देश के किसी भी हिस्से में किसान विरोध प्रदर्शन करते हैं तो उसी के साथ स्वामीनाथन आयोग की चर्चा भी शुरू हो जाती है। दरअसल, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट आ गई लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। ऐसा कहा जाता है कि अगर इस रिपोर्ट को लागू कर दिया जाए तो किसानों की किस्मत बदल जाएगी। 

केंद्र सरकार ने अनाज की आपूर्ति को भरोसेमंद बनाने और किसानों की आर्थिक हालत को सुधारने के लिए 18 नवंबर 2004 को एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग ने साल 2006 में अपनी पांच रिपोर्ट सौंपी थी।  

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें 

  • किसानों को फसल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम मिले।  

  • वहीं किसानों को बेहतर क्वालिटी के बीज कम दामों में मुहैया कराने का प्रावधान हो।

  • किसानों की मदद के लिए गांवों में 'विलेज नॉलेज सेंटर' या ज्ञान चौपाल का गठन किया जाए।

  • महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड मुहैया कराया जाए।

  • प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों की मदद को लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए।

  • सरप्लस और बेकार जमीनों का भूमिहीन लोगों में वितरण किया जाए।

  • वनभूमि को और खेतीहर जमीन गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कॉरपोरेट को न दी जाए।

  • वहीं फसल बीमा की सुविधा देशभर में हर फसल के लिए मिले।

  • हर गरीब और जरूरतमंद के लिए खेती के लिए कर्ज की व्यवस्था की जाए। 

  • सरकार की मदद से किसानों को दिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज दर कम करके 4% की जाए।

  • प्राकृतिक आपदा या संकट से जूझ रहे इलाकों में कर्ज की वसूली से राहत हालात सामान्य होने तक जारी रहे।

  • लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों को मदद पहुंचाने के लिए एक एग्रिकल्चर रिस्क फंड बनाया जाए।

  • भारत में 28% परिवार ग़रीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए भी आयोग ने खाद्य सुरक्षा का इंतज़ाम करने की सिफारिश की है।


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