रायपुर

ये है देश का पहला ऐसा राज्य, जहां 90 फीसदी महिलाएं करती हैं घर के बड़े फैसले

By haribhoomi.com | Mar 21, 2017 |
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रायपुर. प्रदेश और देश में नारी सशक्तिकरण के दावों के बीच छत्तीसगढ़ की महिलाओं के संबंध में सामने आए आंकड़ों ने घरों में महिलाओं के बढ़ते महत्व को साबित किया है। 
 
राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वे 2015-16 की हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार 90.05 फीसदी महिलाएं घर के अहम फैसले स्वयं कर रही हैं। पिछली बार की सर्वे रिपोर्ट से यह आंकड़ा पूरा 13.9 फीसदी अधिक है।
 
 
दस साल पहले हुए सर्वे में 76.6 फीसदी महिलाएं घर के फैसलों में शामिल हुआ करती थीं, लेकिन दस साल में यह आंकड़ा बढ़कर 90.5 फीसदी तक पहुंच गया है। इनमें शहरी और ग्रामीण महिलाओं के पृथक आंकड़े निकाले जाएं, तो शहरी क्षेत्रों में 92.4 फीसदी महिलाएं घर के निर्णय लेती हैं, जबकि गांवों में अब भी यह आंकड़ा 89.9 फीसदी है।
 
प्रदेश में नारी सशक्तिकरण का दूसरा उदारहरण यह भी है कि आधी आबादी में आधी जनसंख्या के पास खुद के बैंक अकाउंट हैं। छत्तीसगढ़ की 51.3 फीसदी महिलाए स्वयं अपने नाम के बैंक खातों को संचालित कर रही हैं। 
 
पिछली बार के सर्वे में यह आंकड़ा महज 8.1 फीसदी था। इससे साफ है, पिछले दस सालों में प्रदेश की महिलाएं घर-परिवार के साथ आर्थिक मामलों को लेकर भी जागरूक हुई हैं। न सिर्फ 43.2 फीसदी महिलाओं ने पिछले दस सालों में खाते खुलवाए, बल्कि उसे खुद संचालित करना भी प्रारंभ किया। इनमें 62.1 फीसदी शहरी और 47.6 फीसदी महिलाएं ग्रामीण हैं। 
 
 
हाल ही में केंद्र के रास्ते राज्य सरकार तक पहुंची सर्वे रिपोर्ट में महिला सशक्तिकरण के मामले में छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट अन्य राज्यों से कहीं बेहतर पाई गई है। खासतौर पर 14 से 49 वर्ष की महिलाओं के सशक्तिकरण के मामले में छत्तीसगढ़ दूसरे राज्यों से अव्वल साबित हुआ है।
 
चौंकाने वाले कुछ और तथ्य
महिलाओं के पास खुद के मोबाइल फोन - 31.0 फीसदी (शहरी-54.7, ग्रामीण-22.9)
 
महिलाओं के पास खुद की जमीन या मकान - 26.4 फीसदी (शहरी- 23.8, ग्रामीण-26.4)
 
महिलाएं जिन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा -36.7 फीसदी (शहरी-35.4, ग्रामीण-37.1)
 
महिलाओं के साथ गर्भावस्था के दौरान हिंसा - 4.9 (शहरी-3.8, ग्रामीण-5.3)
 
महिलाओं द्वारा किसी भी रूप में तंबाकू का उपयोग - 21.6 (शहरी-13.1, ग्रामीण-24.4)
 
ऐसे बदली परिस्थिति
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण के लिए एक दशक में कई अहम फैसले लिए गए, जिसका असर महिलाओं के जीवनस्तर पर देखने मिला। महिलाओं के नाम से राशनकार्ड बनाया गया। 
 
स्वसहायता समूहों के माध्यम से सुदूर अंचलों की महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया। 
 
निजी रूप में भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए कई तरह से प्रयास किए गए। इससे महिलाओं की स्थिति मजबूत हुई और घर के अहम फैसलों में उनकी भागीदारी के रास्ते खुल सके।
 
ऐसा है देश का हाल
निर्णय के मामले में महिलाएं        - 84.0 फीसदी (शहरी-85.8, ग्रामीण-85.0)
 
महिलाओं के पास बैंक अकाउंट       - 53.0 फीसदी (शहरी-61.0, ग्रामीण-48.5)
 
महिलाओं के पास जमीन मकान      - 38.4 फीसदी (शहरी-35.2, ग्रामीण-40.1)
 
महिलाओं के पास मोबाइल           - 45.9 फीसदी (शहरी-61.8, ग्रामीण-36.9)
 
हिंसा की शिकार महिलाएं            - 28.8 फीसदी (शहरी-23.6, ग्रामीण-31.4)
 
गर्भावस्था में हिंसा की शिकार        - 3.3 फीसदी (शहरी-2.9, ग्रामीण-3.5)
 
 
शिक्षा और आर्थिक मामलों से मदद
शिक्षा और आर्थिक मामलों पर विगत 10 वर्षों में राज्य सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। इन प्रयासों से प्रदेश की महिलाएं सशक्त हुईं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली। इसी वजह से एनएफएचएस के सर्वे में हमारा स्थान बेहतर हो सका।
- हर्षिता पांडेय, अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग
 
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