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आपके चाहने भर से रिपोर्टिंग रुक नहीं जाएगी प्रेजिडेंट ट्रंप!

By haribhoomi.com | Feb 25, 2017 |
trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कुछ बड़े मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस में होने वाले रोज़ के प्रेस ब्रीफिंग से बाहर कर दिया है। बीबीसी, सीएनएन, बज़फीड और न्यूयॉर्क टाइम्स सहित कुछ अन्य संस्थानों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के पीछे कोई वजह नहीं बताई गई है। 

 
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर शुक्रवार को कुछ गिने-चुने मीडिया संस्थानों को ब्रीफ किया। जिन संस्थानों पर यह अघोषित प्रतिबंध लगाया गया है, उन्होंने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और आगे भी निडर और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते रहने की बात कही है। 
 
डॉनल्ड ट्रंप का मीडिया से रिश्ता अच्छा नहीं रहा है। वो अपने हर बयान और भाषण में 'फेक न्यूज़' और 'फेक मीडिया' की बात उठाते नज़र आते हैं। पिछले कुछ महीनों में मीडिया ने ट्रंप के बयानों और फैसलों का गहराई से पोस्टमॉर्टेम किया है। पत्रकारिता में ये कोई नई बात नहीं है चूंकि यही उनका मुख्य काम है। 
 
ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों को बाहर कर के खुद के डर को ही दिखाया है। उनके नासमझ फैसलों और वाहियात बयानों का ज़िक्र केवल यही संस्थान नहीं कर रहे थे। पूरी दुनिया की मीडिया ट्रंप को करीब से पढ़ रही है। कुछ ने तो यह तक लिख दिया है कि उनका कार्यकाल महज़ कुछ महीनों का है। तो क्या ट्रंप पूरी दुनिया की मीडिया को बैन कर देंगे? 
 
 
सत्ता और प्रशासन से मीडिया का रिश्ता अच्छा ही हो, ऐसी अपेक्षा करना पत्रकारिता के आधारभूत उसूलों को भूल जाने जैसा है। सत्ता भी इस तथ्य को स्वीकार करती आई है और तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद भी मीडिया और सत्ता के बीच आपसी संवाद बना रहा है। 
 
लेकिन हालिया दौर में इस रिश्ते में अविश्वास और नफरत ने घर कर लिया है। ट्रंप के इस फैसले से तो यही आहट सुनाई पड़ती है कि आने वाले दौर में सत्ता पर पैनी नज़र रखने वाले मीडिया संस्थानों को निशाने पर लिया जाएगा। 
 
यह तथ्य केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। दुनिया के अन्य देशों में भी ऐसे उदाहरण आम हो चले हैं। कहीं किसी संसथान में तोड़-फोड़ की जाती है, कहीं पत्रकारों की हत्या कर दी जाती है तो कहीं उन पर बैन तक लगाने की बातें की जाती हैं। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले साल तकरीबन सौ पत्रकारों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। 
 
सवाल यह है कि क्या अब संभव भी है कि आप मीडिया को रिपोर्टिंग करने से सिर्फ इसीलिए रोक दें क्यूंकि उनकी रिपोर्टिंग आपको पसंद नहीं? सोशल मीडिया पारंपरिक मीडिया का ही संक्रामक विस्तार है और अब ऐसा सफ़र शुरू हो चुका है, जहाँ से पीछे मुड़ना तकरीबन नामुमकिन है। ट्रंप के बैन लगा देने से इन संस्थानों की रिपोर्टिंग रुक जाएगी, ये मानना गलतफहमी होगी।
 
सम्भावना तो इस बात की है कि अब और भी तीखी और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग होगी। इन संस्थानों के रिपोर्टर अब ज्यादा मेहनत करेंगे, ज्यादा सूत्र बनाएंगे और सच के ज्यादा करीब पहुंच कर ट्रंप को आईना दिखाएंगे।
 
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