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ब्लॉग: भारत ने दिखाई पूरी ताकत, पाक को दिया जवाब

By omkar chaudhary | Sep 30, 2016 |
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पूरा देश जैसे इसी का इंतजार कर रहा था। भारतीय सेना ने एलओसी पार करके पाकिस्तान को जो सबक सिखाया है, उसने न सिर्फ हमारे सैन्य बलों का मनोबल ऊंचा हुआ है, बल्कि पूरे देश को एकजुट कर दिया है। आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब भारतीय सेना ने एलओसी पार कर पीओके में घुसकर सात आतंकी ठिकानों को तबाह किया है। इस कदम के संदेश बहुत साफ हैं। पाकिस्तान के लिए भी और पूरी दुनिया के लिए भी कि बस, बहुत हुआ। अपनी अस्मिता पर आंच आने पर भारत खामोश नहीं बैठेगा। 
 
दस दिन पहले उरी के सैन्य ठिकाने पर हुए आतंकी हमले में भारत ने अपने 18 जवान गवां दिए थे। तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। पूरा राष्ट्र इस घटना के बाद गुस्से से उबल रहा था। पठानकोट एयरबेस के बाद सीमा पार से प्रायोजित यह दूसरा ऐसा हमला था, जिसने हमारे सब्र का बांध तोड़ दिया। सारे तथ्य चीख-चीख कर बता रहे थे कि हमलावर सीमा पार से आए हैं। इसके बावजूद जिस तरह पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस पर खामोशी ओढ़ी, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। 
 
संयुक्त राष्ट्र संघ में उन्होंने हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना को राजनीतिक रंग देकर भारत के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया। पिछले तीन महीने से जिस तरह कश्मीर घाटी को सुलगाया जा रहा है, वह पाकिस्तानी हिमाकत की पराकाष्ठा है। ऊपर से नवाज शरीफ का यह बयान उकसाने वाला था कि कश्मीर में ज्यादतियों के कारण ही उरी की घटना हुई है। संयुक्त राष्ट्र संघ में नवाज शरीफ ने आतंकियों की हिमायत कर कश्मीर में और तनाव बढ़ाने का काम किया। 
 
उन्होंने भारत पर यह आरोप मढ़ डाला कि वह बातचीत के लिए शर्तें थोप रहा है, जो पाकिस्तान को मंजूर नहीं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनके दुष्प्रचार की हवा तो निकाली ही, उल्टे पाकिस्तान के दोमुंहेपन को भी दुनिया के सामने उजागर कर नवाज को बोलने लायक नहीं छोड़ा। सुषमा ने पूछा कि जब हमारी सरकार शपथ ले रही थी, तब उन्हें भी आमंत्रित किया गया था। तब भारत ने कौन सी शर्त लगाई थी? जब वह खुद द्विपक्षीय वार्ता के लिए इस्लामाबाद गई, तब कौन सी शर्त लगाई गई थी? 
 
जब काबुल से नई दिल्ली लौटते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाहौर में उनसे मिलने के लिए उतर गए थे, तब कौन सी शर्त लगाई थी? सुषमा ने भारतीय रुख को साफ करते हुए कहा कि हम सिर्फ आतंक रोकने की बात करते हैं जबकि भारत की शांति की तमाम कोशिशों को पलीता लगाते हुए पाक कभी पठानकोट एयरबेस पर हमला कराता है तो कभी उरी के सैन्य ठिकाने पर हमला कराता है। यही नहीं बहादुर अली नाम का जिंदा आतंकी भारत के पास है, जो सीमा पार करके हमले के लिए आया था। कोझीकोड की जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया था कि अब भारत मूकदर्शक नहीं रहेगा। पाक को न केवल पूरी दुनिया में अलग-थलग कर देगा बल्कि वहां की जनता को उनकी षड्यंत्रकारी सरकार और सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर देगा। 
 
मोदी ने पाकिस्तान की जनता से मुखातिब होकर कहा कि वह अपने हुक्मरानों से कुछ सवाल पूछे। यह कि दोनों देश अगर एक साथ आजाद हुए थे तो भारत आईटी निर्यात कर रहा है तो पाक टेरर क्यों निर्यात कर रहा है? ध्यान से देखें तो पिछले कुछ दिनों में भारत ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्होंने इस कुटिल देश को न केवल अलग-थलग किया है बल्कि बेनकाब भी कर दिया है। पूरी दुनिया यह जान गई है कि आतंक की फसल पाकिस्तान में ही तैयार हो रही है। भारत ने बलूचिस्तान में ज्यादतियों की पराकाष्ठा का मसला पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से उठाकर पाक को असहज कर दिया। गिलगित, पीओके, सिंध और पख्तून इलाके में पाक सेना और आईएसआई की ज्यादतियों को भी उजागर किया गया है। 
 
भारत ने सिंधु जल समझौते को रद करने की दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। यही नहीं, मास्टर स्ट्रोक के तौर पर नौ और दस नवंबर को इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन का बहिष्कार का भी ऐलान कर दिया। बांग्लादेश, अफगानिस्तान और भूटान ने भी भारत के साथ इस समिट के बायकाट का ऐलान कर दिया जिसके फलस्वरूप इसे रद करना पड़ा। ऐसा पहली बार है कि किसी मेजबान देश को ऐसी जिल्लत का सामना करना पड़ा हो। आज इस कुटिल पड़ोसी के साथ कोई खड़ा हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। वहां के युद्धोन्मादी मीडिया में यह हवा बनाने की कोशिश की जा रही थी कि जंग छिड़ी तो चीन पाकिस्तान का साथ देगा। 
 
खुद चीन के विदेश मंत्रालय ने इसका खंडन करते हुए दुष्प्रचार की हवा निकाल दी। एक समय था, जब पाकिस्तान अमेरिका की गुड बुक में हुआ करता था। कई यूरोपीय देश उसके संकट में मददगार होते थे। सऊदी अरब उसे सर्मथन देता था, परन्तु पिछले कुछ वर्षों में हालात बहुत तेजी से बदले हैं। अमेरिका अब पाकिस्तान को विश्वनीय सहयोगी नहीं मानता क्योंकि ओसामा बिन लादेन पर पाक लगातार उससे और विश्व बिरादरी से झूठ बोलता रहा। अंत में अमेरिकी सेना ने उसे पाकिस्तान के एक कैंट एरिया में घुसकर मौत के घाट उतार डाला। आज की तारीख में अमेरिका से लेकर सऊदी अरब तक भारत के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। दुनिया के ज्यादातर देश यह मानते हैं कि पाक आतंकियों को पाल पोसकर न केवल पड़ोसियों को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है, बल्कि विश्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। 
 
पाकिस्तान में कहने भर को ही चुनी हुई सरकार अस्तित्व में है। हकीकत यह है कि वहां सेना पूरी तरह हावी है। भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश सहित दूसरे पड़ोसी देशों में आतंकवादी हमले करवाकर पाक सेना अपने षड्यंत्रों को फलीभूत करना चाहती है। यह पूरी तरह समझ से बाहर है कि पूरी तरह बेनकाब होने के बावजूद पाकिस्तान आत्मघात की तरफ क्यों बढ़ रहा है? भारत पड़ोसियों के साथ शांति और सौहार्द के रिश्ते चाहता है। मौजूदा मोदी सरकार ने भी रिश्तों को नए आयामों पर ले जाने के लिए ठोस पहल की थी, परन्तु पाक सेना अपनी हरकतों से बाज नहीं आई। सीमा पार से न केवल घुसपैठ जारी रही बल्कि सीजफायर का रिकॉर्ड उल्लंघन करके भारत को उकसाने की कोशिशें जारी रहीं।
 
पठानकोट के बाद उरी की घटना ने हमारे सब्र का बांध तोड़ डाला। भारत ने हमेशा पड़ोसी देशों की संप्रभुता का सम्मान किया। कभी किसी की सरहदों का अतिक्रमण नहीं किया परन्तु जो काम उसने कभी नहीं किया, वह करने के लिए पाक ने मजबूर कर दिया। पीओके में घुसकर की गई इस सैन्य कार्रवाई के बहुत साफ संदेश हैं। अगर भारत के धैर्य को चुनौती दी गई तो अब इसी तरह घुसकर मारेंगे।

 

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