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सर्जिकल स्ट्राइक पर चुप क्यों हैं पाक कलाकार

By डॉ. महेश परिमल | Oct 07, 2016 |
pakistan
भारत में काम करने वाले पाकिस्तानी कलाकार कभी घोषित रूप से पाक में पनपने वाले आतंकवाद की निंदा नहीं करते। उन्हें डर है कि उसके कारण पाक में रहने वाले संबंधियों के हाल बुरे हो जाएंगे। जिस देश में आतंकी इतनी ताकत रखते हैं, तो उस देश में रहा ही क्यों जाए? सर्जिकल स्ट्राइक्स के बाद देश के हालात बदलने लगे हैं। उससे भी तेजी से लोग भी बदलने लगे हैं। तरह-तरह के बयान आ रहे हैं। कई लोगों का सर्मथन में तो कई लोगों का विरोध में।
 
एक तरफ ओमपुरी पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वे शहीदों का अपमान कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा है कि हमारी सरकार और एसोसिएशन जो फैसला लेगी, वो ही हम सब के लिए मान्य होगा। अगर हमारी सरकार हमें आदेश देगी कि हम किसी खास कलाकार के साथ काम न करें तो हम काम नहीं करेंगे। अमिताभ बच्चन ने कहा कि इससे पहले भी साल 1976 में एसोसिएशन ने कुछ कलाकारों के फिल्मों में काम करने पर रोक लगाई थी, लेकिन यह पाबंदी सीमित थी। उधर सलमान खान का मानना है कि पाकिस्तान कलाकार आतंकी नहीं हैं। एक तरफ पाकिस्तानी कलाकारों द्वारा हिंदी फिल्मों में काम करने की लंबी फेहरिस्त है।
 
दूसरी तरफ ऐसे कितने भारतीय कलाकार हैं, जिन्होंने पाकिस्तानी फिल्मों में काम किया है? महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की धमकी से फवाद खान तुरंत पाकिस्तान लौट गए। वहां जाकर उन्होंने यह बयान दिया कि मेरे लिए मेरा देश पाकिस्तान पहले है। ये वही शख्स हैं, जो जब तक भारत में रहे, भारतीय व्यंजनों एवं भारतीयों की मेहमानवाजी की तारीफ किया करते थे। पाकिस्तान जाते ही उनका सुर बदल गया। ऐसे लोगों से सलमान खान क्या सबक लेते हैं, कोई बता सकता है ?
 
यह सच है कि युद्ध काल में भजन नहीं गाया जाता। जब किसी की मौत होती है, तो वहां शादी के गीत नहीं गाए जाते। जब सीमा पर युद्ध के बादल गरज रहे हों, तब शांति के भजन गाने का कोई अर्थ नहीं है। पाकिस्तान एक तरफ तो आतंकवादियों का निर्यात कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत से पाकिस्तानी कलाकारों को बुलाए जाने के लिए कोई बयान नहीं देना चाहता। यदि वह वास्तव में भारत को दुश्मन मानता है, तो किसी पाकिस्तानी कलाकार को भारतीय कलाकारों के साथ काम करने से रोकता क्यों नहीं? इधर आतंकी और उधर कलाकार। इस दोहरी नीति को आखिर क्या कहेंगे।
 
पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों पर हमला किया, उसके बाद दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए। इसे देखते हुए इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक पाकिस्तानी कलाकारों को भारतीय फिल्मों में काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पाकिस्तानी कलाकारों को भारत छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया। अब सलमान खान ने पाकिस्तानी कलाकारों का सर्मथन करते हुए कहा है कि वे आतंकी नहीं हैं।
 
तब उनसे एक सवाल पूछा जा रहा है कि क्या बॉलीवुड में काम करने वाले पाकिस्तानी कलाकार पाकिस्तान द्वारा पालित-पोषित आतंकवाद का विरोध करने के लिए तैयार हैं। यदि वे कलाकार ऐसा नहीं करते, तो इसका आशय यही होगा कि वे भी कहीं न कहीं आतंकवाद के सर्मथक हैं। आतंकवाद को लेकर पाकिस्तानी यदि ढीठ हैं, तो हमें उन्हें गले लगाने की कोई आवश्यकता नहीं। इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन(इम्पा) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण पाकिस्तान के फवाद खान, अली जाफर और माहिरा खान जैसे कलाकारों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
 
फवाद खान तो भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए पर उसकी फिल्म ऐ दिल है मुश्किल के रिलीज पर सवाल खड़ा हो गया है। करण जौहर ने इस फिल्म पर करोड़ों रुपये लगाए हैं। यदि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इस फिल्म को रिलीज नहीं होने देती, तो करोड़ों का नुकसान हो सकता है। शाहरुख खान की रईस में पाकिस्तानी माहिरा खान है, इससे वे भी चिंतित हैं। सलमान खान ने भी अपनी अगली फिल्म फवाद खान के साथ करने की घोषणा की है, इसलिए वे पाकिस्तानी कलाकारों का बचाव कर रहे हैं। गौरी शिंदे की डियर जिंदगी नाम की फिल्म आलिया भट्ट, फवाद खान और अली जाफर को लेकर बनाई गई है।
 
फवाद खान पाकिस्तानी सीरियल हमसफर के कारण रातों-रात सुपरस्टार बन गया। भारत में जी ग्रुप के जिंदगी चैनल पर उसका सीरियल जरून का प्रसारण किया गया था। तब से वह अधिक लोकप्रिय बन गया। माहिरा खान भी पाकिस्तान की लोकप्रिय अभिनेत्री है। अभी तक उसकी एक भी हिंदी फिल्म रिलीज नहीं हुई है। पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर भारतीय प्रजा हमेशा सहिष्णु रही है। पाकिस्तान से आने वाले अदनान सामी, राहत फतेह अली खान, गुलाम अली, नुसरत फतेह अली खान, शाफकत अमानत अली, आतिक असलाम, जावेद बशीर जैसे गायकों को भारत में खूब सम्मान और स्नेह मिला।
 
यहां तो पाकिस्तानी धारावाहिक भी दिखाए जाते हैं। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म पिंक का गीत कारी कारी गीत भी पाकिस्तानी कलाकार कुरातुलैन बलोच ने गाया है। पर अब हालात बदल गए हैं। जी ग्रुप ने जिंदगी चैनल पर पाकिस्तानी सीरियलों का प्रसारण बंद करने की घोषणा की है। बेंगलुरु के गुरुग्राम में पाकिस्तानी गायकों के कार्यक्रम रद कर दिए गए हैं। एक तरफ पाकिस्तानी कलाकारों को बॉलीवुड में दिल से स्वीकार करता है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तानी फिल्मोद्योग में भारत के कलाकारों के लिए कोई जगह नहीं है। 
 
अभी तक हमारे यहां के किसी बड़े कलाकार को पाकिस्तानी फिल्म में नहीं लिया गया है। इतने सारे खानों में से एक भी खान को पाकिस्तानी फिल्म के लायक नहीं समझा गया। नंदिता दास, नसरुद्दीन शाह, ओमपुरी जैसे कलाकार इसके अपवाद हैं। उधर रेडियो पाकिस्तान को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम ने भारत को काफिरों का देश करार दिया है। उसने कहा कि भारत में वो सिर्फ पैसे कमाने के लिए जाता है। इंटरव्यू के दौरान जब आतिफ से पूछा गया कि भारत में अब त्योहारों का मौसम आने वाला है।
 
इस मौके पर अपने प्रशंसकों से आप क्या कहेंगे? इस पर आतिफ झल्ला गया। उसने जवाब देते हुए कहा- भारत काफिरों का देश है मैं वहां सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाने जाता हूं। दशहरा और दिवाली से मेरा कोई मतलब नहीं। इतना हीं नहीं, आतिफ ने भारतीय त्योहारों की बधाई देने से साफ तौर पर मना कर दिया। जब इस तरह के बयान सामने आते हैं, तो हमारा खून खौल उठता है। भारत में काम करने वाले पाकिस्तानी कलाकार कभी घोषित रूप से पाकिस्तान में पनपने वाले आतंकवाद की निंदा नहीं करते।
 
उन्हें डर है कि उसके कारण पाकिस्तान में रहने वाले संबंधियों के हाल बुरे हो जाएंगे। जिस देश में आतंकवादी इतनी ताकत रखते हैं, तो उस देश में रहा ही क्यों जाए? यदि पाकिस्तानी कलाकार भारत में काम करना चाहते हैं, तो उन्हें अदनान सामी की तरह पाकिस्तान की नागरिकता छोड़कर भारत का नागरिक बन जाना चाहिए। यदि पाकिस्तानी कलाकार यह समझते हैं कि पाकिस्तानी कलाकार यदि बॉलीवुड में काम करते हैं, तो पाकिस्तान आतंकवाद का साथ छोड़ देगा, तो यह मूर्खता होगी।
 
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