ब्लॉग

तेरा बयान गांधी!

By कनक तिवारी | Oct 01, 2016 |
gandhi
गांधी इतिहास की एक असंभव संभावना की तरह धरती पर आये। अब संभव असंभावना बनाए जा रहे हैं। गांधी ने ऐसे बयान किए जो वक्ती तौर पर तो किसी सिरफिरे के फितूर की तरह बताए गए। लेकिन वे वाक्य कालजयी होकर वक्त की छाती पर शिलालेख की तरह टंके हुए हैं। इसके बाद भी उन बेचारों को सत्य की सलीब पर टांगा जा रहा है। गांधी ने कहा था कि उनके लिए बनारस और गाय वगैरह जैसे पारंपरिक धार्मिक विश्वासी प्रतीक वैज्ञानिक नजरों से देखे जाने चाहिए।
 
गाय की पूंछ पकड़कर पाप की वैतरणी पार करना और उससे मनुष्य मात्र की जरूरतों और अनंत क्षुधा को शांत करना समझना भाषायी चमत्कार ज्यादा है। उससे अर्थमूलक संभावनाएं नहीं झांकतीं। गांधी ने बकरी का दूध पिया। वह संसार में मौलिक प्रयोग था। एक निरीह, उपेक्षित, वंचित और हिंसा की शिकार होती पशु प्रजाति के सन्दर्भ में पारंपरिक बुद्धि का संशोधन करते बकरी के दूध की गुणवत्ता की वैज्ञानिक समझ भी गांधी में थी।
 
सबसे मासूम, घरेलू और निरीह लेकिन जनोपयोगी पशु के प्रति अहसान की भावना के साथ करुणा का कायिक प्रदर्शन भर नहीं था। वह समाज के हर वंचित तबके के प्रति रूढ़िगत दुर्भावना को हटाकर अहसान वृत्ति के बदले सहकार का समास था। यह अद्भुत चमत्कार लगता प्रयोजन साधारण मनुष्यों के जीवन की एक मामूली परिघटना बनाकर सामाजिक क्रांति को हासिल करने का उद्यम था। 
 
गांधी ने यह भी तो लिखा था कि अपनी संपूर्ण सद्भावना और धर्मगत सुसंगतियों को मानते हुए भी एक वर्ग विशेष के दिगंबर साधुओं के सामाजिक जीवन में प्रत्यक्ष दीखने पर उन्हें नैतिक, मौलिक संदेह है। गांधी के लेख का प्रतिवाद किया गया। उनकी जबर्दस्त मुखालफत की गई। उन्हें मजबूर किया गया कि अपनी धारणाओं और कथन का खंडन करें। गांधी ने यह सब नहीं किया। उनका नायाब तर्क देश के आम आदमियों के मनोविज्ञान में विश्वस्त होकर विन्यस्त हुआ।
 
उन्होंने संन्यास लेते व्यक्ति की बची खुची मनोवैज्ञानिक वर्जनाओं की नए और अनोखे सिरे से पड़ताल की। गांधी का कहना था कि सांसारिक व्यक्ति संन्यास में दीक्षित धर्म गुरु होकर समाज में वस्त्ररहित विचरण करता है। उसकी कुंठाओं, रूढ़ियों और यौनग्रस्त सोच की पृष्ठभूमि के नष्ट हो जाने की आश्वस्ति कैसे मानी जा सकती है।
 
आम जनता तो र्शद्धा, पारंपरिक विश्वास और संन्यस्त व्यक्ति की महानता के त्रिभुज में रहकर अपनी विश्वासी अवधारणाओं को ही दृढ़ करती रहती है। गांधी का सवाल कबीरदास की शैली में पूछा गया था। देह और दिमाग की सारी समझ, पारदर्शिता और व्यग्रताओं को संन्यास की परिकल्पनाओं से व्याख्यायित नहीं किया जा सकता है। यह बूझने में गांधी ने मनोवैज्ञानिक की भूमिका अदा की। 
 
गांधी ने पाकिस्तान के सवाल को लेकर हिन्दू मुस्लिम इत्तहाद का सबक सिखाना चाहा। वह उनके ही पट्ट शिष्यों को नहीं सुहाया। गांधी ने बार बार जिद की थी कि आईन बनाने वाली असंेबली में मुसलमानों और बाकी अल्पसंख्यकों की नुमाइंदगी के बगैर कोई कामकाज नहीं होना चाहिए। मुस्लिम लीग और कांग्रेस गांधी की समझ के विरोधी संगठन बन गए थे। कुछ राष्ट्रवादी मुसलमान अलबत्ता उनके साथ रहे थे।
 
आज उन्हें भी मुस्लिम विचारों का अधिकृत प्रतिनिधि नहीं माना जाता। गांधी ने मुसलमानों से सामासिक रिश्ता नहीं हो पाने पर भारत की आजादी का सवाल भी मुल्तवी करने का नायाब सुझाव दिया था। वैचारिक, धार्मिक, सियासी और सांस्कृतिक रूप से खंडित भारत गांधी की आवाज में कराह रहा है। गंगा जमुनी संस्कृति जैसा मुहावरा भी हिन्दू मुस्लिम संबंधों की अंतर्लय को रेखांकित नहीं कर पाता।
 
संगम वह जगह है जहां से विकसित विचारों की सामासिक नदी विश्वास और भविष्य के अनंत महासागर में जाने के लिए बहना शुरू करती है। गांधी को मालूम था कि जिसे हिकारत में यवन संस्कृति कहा जाता था उससे आत्मसात होकर फिर उसे भी राष्ट्रीय संस्कृति में आत्मसात किया जाए। बापू होते तो घर वापसी, लव जिहाद, हम पांच हमारे पच्चीस, खाप पंचायत वगैरह के नारे पनाह मांगते। 
 
हम अमेरिका की गुलामी करने वाले संसार के सबसे बड़े देश हैं। राष्ट्रपति ओबामा का भारत आना ईश्वर के अवतार की तरह की परिघटना है। गांधी ने ही अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट के आग्रह के बावजूद भारत की आजादी के लिए अमेरिका की मदद लेने से मना कर दिया था। आज भारत परमाणु संधि, थोक व खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष पूंजी निवेश और मेक इन इंडिया जैसे नारों के साथ अमेरिका के सामने गांधी की रीढ़ की हड्डी के बावजूद झुक रहा है।
 
गांधी का मतलब केवल हाथ में झाड़ू लेकर, महंगे कपड़े पहनकर, टेलीविजन के कैमरे के सामने खड़े होकर सड़कों की सफाई करने भर से रह गया है। वह तथाकथित महादेश संक्रमण की बीमारियां, कुत्सित संस्कृति, मरी हुई दवाइयां, घातक हथियार और झूठे आश्वासन देने का मुखौटा लगाए भारतीय राजनयिकों के जेहन में घुस गया है। गांधी होते तो ओबामा भारत को सीख कहां दे पाता। उन्हें सहस्त्राब्दि का नायक बनाकर भी अमेरिका को बापू का बुत उनके विचारों से ज्यादा अच्छा लगता है। 
 
बापू, आजादी की दहलीज पर गांधी ने कहा था कि वाइसरॉय भवन से शुरू करके बड़ी इमारतें अंगरेजों ने हुकूमत की मूछों पर ताव देने के लिए बनाई हैं। उन्हें जनसुविधाओं की जगहें बना देना चाहिए। राष्ट्रपति भवन में यदि कोई महाविश्वविद्यालय बन पाता। वह भारत की संस्कृति, इतिहास, धर्म, समझ, चुनौतियों, संभावनाओं और विचारों का जीवंत मनुष्ययान होता। पूरा हिन्दुस्तान उसमें समेटा जा सकता था। गांधी ने तो पाखाना को भी संस्कृति का बैरोमीटर कहा था।
 
आज देश के उद्योगपतियों, राजनयिकों और नौकरशाहों सहित उच्च मध्यवर्ग और होटलों आदि के शौचालयों में इतना अधिक पानी बहाया जाता है। उतना किसानों को खेती की सिंचाई के लिए भी नहीं मिलता। सरकारें आग्रह कर रही हैं। प्रत्येक घर में जलयुक्त शौचालय अवश्य बनाए जाएं।
 
सरकारें बता नहीं पा रही हैं कि देश के प्रत्येक व्यक्ति के लिए पेयजल की औसत उपलब्धि का क्या आंकड़ा है? सुप्रीम कोर्ट तक ने कहा है कि स्वायत्तशासी संस्थाएं पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध नहीं कराने का भी जनता से टैक्स वसूल कर सकती हैं। गांधी होते तो कानून की व्याख्या करते।
 
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
  • Post a comment
  • Name *
  • Email address *

  • Comments *
  • Security Code *
  • VOMYD
  •       
    कमेंट्स कैसे लिखें !
    जिन पाठकों को हिन्दी में टाइप करना आता है, वे युनीकोड मंगल फोंट एक्टिव कर हिन्दी में सीधे टाइप कर सकते हैं। जिन्हें हिन्दी में टाइप करना नहीं आता वे Roman Hindi यानी कीबोर्ड के अंग्रेजी अक्षरों की मदद से भी हिन्दी में टाइप कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप लिखना चाहें- “भारत डिफेंस कवच एक उपयोगी पोर्टल है’, तो अंग्रेजी कीबोर्ड से टाइप करें, bharat defence kavach ek upyogi portal hai. हर शब्द के बाद स्पेस बार दबाएंगे तो अंग्रेजी का अक्षर हिन्दी में टाइप होता चला जाएगा। यदि आप अंग्रेजी में अपने विचार टाइप करना चाहें तो वह विकल्प भी है।
    Haribhoomi
    Haribhoomi on Social Media
    सिंगर बनी परिणीती चोपड़ा ने भी गाया गाना, देखें वीडियो

    सिंगर बनी परिणीती चोपड़ा ने भी गाया ...

    परिणीति का गाया हुआ पहला गाना ''माना के हम यार नहीं'' रिलीज हो गया है।

    सुनील ने सपोर्ट करने के लिए फैंस का किया धन्यवाद, लिखी भावुक पोस्ट

    सुनील ने सपोर्ट करने के लिए फैंस का ...

    सुनील ने अपने बेटे मोहन की सोते हुए एक फोटो पोस्ट की है।

    हाफ गर्लफ्रेंड में कुछ ऐसा रोमांस करते दिखेंगे श्रद्धा और अर्जुन, देखिए फर्स्ट लुक

    हाफ गर्लफ्रेंड में कुछ ऐसा रोमांस करते ...

    हाफ गर्लफ्रेंड का पहला पोस्टर जारी कर दिया गया है।