ब्लॉग

टाटा नहीं बन पाए साइरस

By विवेक शुक्ला | Oct 25, 2016 |
cyrus
एक बार फिर से ट्रक से लेकर नमक बनाने वाले 100 अरब डॉलर के टाटा समूह के मुंबई के फोर्ट इलाके में स्थित कॉरपोरेट हेड क्वार्टर बॉम्बे हाऊस में रतन टाटा चेयरमैन कक्ष में बैठना शुरू करेंगे। कारण ये है कि टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया है। फिलहाल मिस्त्री की जगह रतन टाटा को चार महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन के लिए अपने समूह को देखना होगा। इस दौरान मिस्त्री के उत्तराधिकारी की तलाश होगी। 
 
जाहिर है, मिस्त्री को इसलिए अचानक से बाहर किया गया क्योंकि वे बिल्कुल नकारा साबित हुए। वे उस समूह को नई बुलंदियों और दिशा देने में नाकामयाब रहे जिसे जमशेद टाटा ने स्थापित किया था और जेआरडी. टाटा ने सींचा था। मिस्त्री 29 दिसंबर 2012 को रतन टाटा की जगह टाटा समूह के चेयरमैन बने थे। जब सायरस मिस्त्री की ताजपोशी हुई थी तब उस वक्त टाटा समूह का कारोबार 100 अरब डॉलर था और बोर्ड ने कंपनी की बागडोर मिस्त्री के हाथ में देते हुए 2022 तक उनके लिए इस कारोबार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य दिया था। लेकिन हाल के वर्षों में टाटा ग्रुप की रफ्तार सुस्त हुई है और उनके कई प्रोजेक्ट गति नहीं पकड़ सके। 
 
टाटा समूह की तमाम कंपनियों पर नजर डाली जाए तो आप पाएंगे कि आईटी सेक्टर की टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को छोड़कर समूह की कोई भी कंपनी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रही। टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पिछड़ती जा रही हैं। सायरस के नेतृत्वप में ग्रुप उस रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पाया जो अपेक्षाएं उनसे की गई थीं और ये भी सच है कि मिस्त्री को चेयरमैन बनाए जाते समय मेरिट की अनदेखी हुई। सायरस मिस्त्री शिक्षित थे। कॉरपोरेट की दुनिया का ठीक-ठाक अनुभव भी था। पर, उन्हें टाटा समूह के मुंबई स्थित हेड आफिस बॉम्बे हाउस के चेयरमैन रूम में बैठने का सौभाग्य इसलिए मिला क्योंकि उनके पिता पलोनजी मिस्त्री के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में 18.5 फीसद शेयर थे। वे सबसे बड़े शेयरहोल्डर हैं। 
 
रतन टाटा के चेयरमेन पद से मुक्त होने के बाद टाटा कंसलटेंसी सर्विस (टीसीएएस) के पूर्व चेयरमैन एस.रामादोराई या वर्तमान प्रमुख एस.चंद्रशेखर चेयरमैन बन सकते थे। इन दोनों को इस बात का क्रेडिट जाता है कि इन्होंने टीसीएस को ना केवल भारत, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक के रूप में खड़ा किया। ये मार्केट कैप के स्तर पर देश की किसी भी कंपनी से बड़ी है। रतन टाटा के बारे में कुछ भी कहना सूरज को दीया दिखाने के समान है। स्टील से लेकर आईटी और होटल से लेकर ऑटो सेक्टर से जुड़े टाटा समूह को उनके लगभग दो दशकों के नेतृत्व से नई ऊर्जा और पहचान मिली। पर, अफसोस वे नजीर बनाने से चूक गए। उनके पास मौका था कि ये वे दूसरों के लिए उदाहरण पेश करते। पर वे परिवारवाद से ऊपर नहीं उठ सके। सायरस मिस्त्री के पिता की हैसियत के चलते उन्होंने सायरस को टाटा समूह का चेयरमैन बनवा दिया। रतन टाटा के उतराधिकारी को लेकर कयास लग रहे थे, तब रतन ने खुद कहा था उनका उत्तराधिकारी विदेशी भी हो सकता है और यहां तक कि महिला भी। पर अफसोस वे अपने इरादे को हकीकत में नहीं बदल सके। 
 
जानने वाले जानते हैं कि एक दौर में विदेशी प्रतिभा को लाने के सुझाव भर से हमारे प्रोमोटर खफा हो जाते थे। उन दिनों जब भारत वैश्विक कारोबारी परिदृश्य में अपनी पहचान स्थापित करने की कोशिश में जुटा था, तो मैनजमेंट के सेमिनारों में बार-बार यह कहा जाता था कि भारतीय प्रबंधक कितने सक्षम हैं और बताया जाता था कि हमें वास्तव में कारोबार चलाने के लिए किसी विदेशी प्रबंधक की दरकार नहीं है। तर्क दिया जाता था कि सिर्फ भारतीय ही भारत की समस्या समझ सकते हैं। पर ये घिसी-पिटी सोच है। बिल गेट्स की माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में जन्मे सत्या नडेला को अपना नया सीईओ नियुक्त करके भारत के कॉरपोरेट संसार को एक बड़ा संदेश दे दिया था। संदेश साफ था कि मेरिट से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। माइक्रोसाफ्ट के आइकानिक संस्थापक बिल गेट्स ने सीईओ के ओहदे पर अपने किसी परिवार के सदस्य को नहीं नियुक्त किया। उन्हें सत्या में मेरिट दिखी,तो उन्हें सौंप दी गई इतनी अहम जिम्मेदारी। बेशक, अब कुछ भारतीय कंपनियों के शिखर पर भी विदेशी या परिवार से बाहर के पेशेवर सीईओ आने लगे हैं। दरअसल कॉरपोरेट इंडिया को परिवारवाद के शिकंजे से निकलना होगा। 
 
रतन टाटा के अलावा इंफोसिस संस्थापक चेयरमैन एन. नारायणमूर्ति भी परिवारवाद से नहीं निकल पाए थे। उनका सारा कॉरपोरेट संसार सम्मान करता रहा है। कॉरपोरेट जगत के लिए जब वे जब बोलते हैं तो उसकी कोई अनदेखी नहीं कर सकता। नारायणमूर्ति के कुशल नेतृत्व गुणों के चलते ही इंफोसिस आईटी सेक्टर की शिखर कंपनी बनी। इसके दो दर्जन से ज्यादा देशों में आफिस हैं। वे कॉरपोरेट दुनिया के कांशेसज कीपर के रूप में उभरे हैं। गर्वनेंस से लेकर देश के विकास के मॉडल जैसे सवालों पर उनके पास देश के नेताओं के लिए सुझाव हैं। एक बार उनका नाम देश के उप राष्ट्रपति के पद के लिए भी उछला था। वे सेमिनार सर्किट के तो लंबे समय से सदस्य हैं। पर, इंफोसिस से रिटायर होने के बाद उनका अपने पुत्र के साथ फिर से इंफोसिस से जुड़ने के फैसले से वे तमाम लोग कहीं न कहीं निराश जरूर हुए थे, जो उन्हें आदर्श के रूप में देखते थे। 
 
साइरस की तरह रोहन में भी कोई कमी नहीं थी। वे हार्वर्ड से पीएचडी हैं। अगर वे इंफोसिस से इतर कहीं और शिखर पर जाते तो कोई दिक्कत नहीं होती। बेशक, उनका इंफोसिस में एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट से देखते-देखते वाइस प्रेसिडेंट बनना नैतिकता के स्तर पर तो सवाल खड़े करता था। अब नारायणमूर्ति को राजनीति में परिवारवाद की बीमारी पर हल्ला नहीं बोल सकेंगे। क्या सत्या की तरह से इंदिरा नूई (पेप्सीको), अंशु जैन (ड्यूश बैंक) शांतनु नारायण (एडोब सिस्टम्स), फ्रांसिस्को डिसूजा (काग्निजेंट), अजय बंगा (मास्टर कार्ड) संजय झा ( ग्लोबल फाउन्ड्रीज) वगैरह ने सपने में भी सोचा होगा कि ये सीईओ बनेंगे ? बेशक नहीं। पर हमारे विपरीत अमेरिका और पश्चिम के देश मेरिट को परिवार से ज्यादा अहमियत देते हैं। इसलिए ही ये शिखर पर पहुंचे। सिलिकॉन वैली हिन्दुस्तानी पेशेवरो से अटी हुई है। बहुत साफ कि अगर भारतीय कंपनियों को विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनानी है तो उन्हें अपने बेटे या बेटी को प्रमुख बनाने के लोभ से बचना होगा। 
 
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर- 
  • Post a comment
  • Name *
  • Email address *

  • Comments *
  • Security Code *
  • TEUQI
  •       
    कमेंट्स कैसे लिखें !
    जिन पाठकों को हिन्दी में टाइप करना आता है, वे युनीकोड मंगल फोंट एक्टिव कर हिन्दी में सीधे टाइप कर सकते हैं। जिन्हें हिन्दी में टाइप करना नहीं आता वे Roman Hindi यानी कीबोर्ड के अंग्रेजी अक्षरों की मदद से भी हिन्दी में टाइप कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप लिखना चाहें- “भारत डिफेंस कवच एक उपयोगी पोर्टल है’, तो अंग्रेजी कीबोर्ड से टाइप करें, bharat defence kavach ek upyogi portal hai. हर शब्द के बाद स्पेस बार दबाएंगे तो अंग्रेजी का अक्षर हिन्दी में टाइप होता चला जाएगा। यदि आप अंग्रेजी में अपने विचार टाइप करना चाहें तो वह विकल्प भी है।
    Haribhoomi
    Haribhoomi on Social Media
    सिंगर बनी परिणीती चोपड़ा ने भी गाया गाना, देखें वीडियो

    सिंगर बनी परिणीती चोपड़ा ने भी गाया ...

    परिणीति का गाया हुआ पहला गाना ''माना के हम यार नहीं'' रिलीज हो गया है।

    सुनील ने सपोर्ट करने के लिए फैंस का किया धन्यवाद, लिखी भावुक पोस्ट

    सुनील ने सपोर्ट करने के लिए फैंस का ...

    सुनील ने अपने बेटे मोहन की सोते हुए एक फोटो पोस्ट की है।

    हाफ गर्लफ्रेंड में कुछ ऐसा रोमांस करते दिखेंगे श्रद्धा और अर्जुन, देखिए फर्स्ट लुक

    हाफ गर्लफ्रेंड में कुछ ऐसा रोमांस करते ...

    हाफ गर्लफ्रेंड का पहला पोस्टर जारी कर दिया गया है।