Top

अयोध्या विवाद: जानें इससे जुड़ी एक-एक बात, कब, क्या और कैसे हुआ

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Dec 5 2017 12:02PM IST
अयोध्या विवाद: जानें इससे जुड़ी एक-एक बात, कब, क्या और कैसे हुआ

अयोध्या विवाद की बुधवार को 25वीं सालगिरह है और विवादित ढांचे पर किसका हक है इस फैसले के लिए आज से उच्चतम न्यायालय की सुनवाई भी होने जा रही है। 2010 की बात है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में विवादित स्थल को तीन बाराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। ये हिस्से सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़े के थे।

 
हाईकोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में रोक लगा दी थी। आज हम आपको बताने जा रहे हैं अयोध्या विवाद से जुड़ी एक-एक बात कि कब, क्या और कैसे हुए। आखिर इस विवाद की जड़ क्या है।
 
कैसे उपजा अयोध्या विवाद
 
विवाद की जड़ 1853 में उपजी जब विवादित ढांचे के आसपास दंगे हो रहे थे। 1859 में अंग्रेजों ने में विवादित स्थल के पास बाड़ लगा दी। इसके बाद मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिन्दुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत मिली। 1885 में महंत रघुबर दास ने फैजाबाद के उप-जज पंडित हरिकृष्ण के सामने याचिका दायर कर मंदिर बनवाने की इजाजत मांगी। जज ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि चबूतरा पहले से मौजूद मस्जिद के इतना निकट है कि मंदिर बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। 23 दिसंबर 1949 को भगवान राम की मूर्तियां मंस्जिद में पाई गई। हिंदुओं का मानना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं और मुसलमानों का आरोप था कि किसी ने रात में मूर्तियां रख दी हैं।
 
 
जिस वक्त ये सब हुआ उस वक्त देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री जी.बी पंत से इस मुद्दे पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के आदेश दिए। यूपी सरकार ने अपनी ओर से मूर्तियां हटवाने के निर्देश दिए। जिला मैजिस्ट्रेट के. के नायर इस निर्देश को पूरा नहीं कर पाए और कारण रहा हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचवा और दंगों का डर।
 
हालांकि नायर के बारे में ये बताया जाता है कि वो कट्टर हिंदू थे और मुर्तियां रखवाने में उनकी पत्नी शकुंतला नायर की भी भूमिका थी। सरकार ने इसे विवादित ढांचा माना और ताला लगवा दिया। इसके बाद 16 जनवरी 1950 में गोपाल सिंह विशारद नाम के एक शख्स ने फैजाबाद के सिविल जज से सामने आर्जी दाखिल कर यहां पूजा करने की इजाजत मांगी। इस बात की इजाजात उस वक्त के सिविल जज एन.एन चंदा ने दी।
 
इस फैसले से मुसलमानों की भावनाएं आहत हुईं और उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अर्जी दायर की। विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1982 में विश्व हिन्दू परिषद ने एक कमिटी बनाई। इस मामले पर यूसी पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज के.एम पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे से ताला हटाने का आदेश दिया।
 
विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया गया। 6 फरवरी 1992 की बात है जब बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिए। यहीं से हिंदू और मिसलमानों के बीच दंगा भड़का। इस दंगे में करीब 2,000 लोगों की मौत हो गई।
(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
ayodhya vivad know the whole story of the issue

-Tags:#Ayodhya vivad#Ayodhya issue#Ram mandir#Babri vivad
मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo