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कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान और क्यों दर्द भरे जीवन जीने को हैं मजबूर

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 6 2017 1:59PM IST
कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान और क्यों दर्द भरे जीवन जीने को हैं मजबूर

म्यांमार के हिंसा प्रभावित इलाके रखाइन प्रांत के रोहिंग्या मुस्लिमों पर लगातार हो रहे हमले के बाद पूरे विश्व में यह एक ज्वलंत मुद्दा बनकर उभरा है।

हिंसा, अत्याचार और डर की वजह से रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से बड़ी संख्या में पलायन कर के भारत और बांग्लादेश समेत कई देशों में शरनार्थी के रूप में पहुंच रहे हैं। 

कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिमः-

म्यांमार में मुख्यत: बौद्ध लोग निवास करते हैं। लेकिन रखाइन प्रांत में 10 लाख के करीब रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं। म्यांमार सरकार कहती है कि ये लोग अवैध बांग्लादेशी प्रवासी है। वहां की सरकार भी इन्हें नागरिकता देने से इंकार कर चुकी है। हालांकि हकीकत यह है कि रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार में पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं। रखाइन राज्य में साल 2012 से ही हिंसा जारी है जिसकी वजह से कई हजार लोगों की जानें चली गई है जबकि 1 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित होकर दूसरे देशों में शरणार्थी के रूप में रहने को विवश हैं। 

ऐसे शुरू हुआ यह खूनी खेलः- 

बता दें कि पिछले साल 2015 में म्यांमार के मौंगडोव सीमा पर अज्ञात लोगों के साथ झड़प में 9 पुलिस वालों की मौत के बाद सेना ने मौंगडोव सीमा को पूरी तरह से सील कर रखाइन प्रांत में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया था। 

रोहिंग्या कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सेना के इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा लोगों की मौत चुकी है और सैकड़ों लोगों को सेना ने गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि सेना ने इस दौरान महिलाओं के साथ रेप भी किया। हालांकि म्यांमार सरकार इस आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

  

म्यांमार सरकार भी पक्ष का नहीं हैः-

म्यांमार में पिछले 25 साल बाद हुए चुनाव में शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फोर डेमोक्रेसी ने रिकॉर्डतोड़ जीत के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई थी। वहां की सरकार पर नियंत्रण भी सू ची के हाथों में ही है। लेकिन अब उनपर आरोप लगाए जा रहे हैं कि शांति की दुहाई देने वाली आंग सान सू ची इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं। 

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी ने की कड़ी निंदाः-

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे हमले को लेकर कड़ी निंदा की है। साथ एमनेस्टी ने म्यांमार के दौरे पर गए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील किया है कि रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार से उनकी रक्षा करें। 

रोहिंग्या मुसलमानों पर मुंह खोलें आंग सान सू ची: मलाला यूसुफजई

मलाला यूसुफजई ने म्यांमार में लोकतंत्र की आवाज और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची से आग्रह किया है कि वह रोहिंग्या मुसलमानों के साथ किये जा रहे दुर्व्यवहार की निंदा करें। 

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-Tags:#Myanmar#Rohingya Muslims
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