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सस्ते मेडिकल डिवाइस बनाने में मदद करेगा ये बॉयोडिजाइन

कविता जोशी/नई दिल्ली | UPDATED Dec 3 2017 11:09AM IST
सस्ते मेडिकल डिवाइस बनाने में मदद करेगा ये बॉयोडिजाइन

केंद्रीय विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने शनिवार को एक बॉयोडिजाइन कार्यक्रम क्रियान्वित किया है। इसका उद्देश्य ऐसे उन्नत और सस्ते मेडिकल उपकरण बनाना है, जिससे न केवल लोगों की चिकित्सा संबंधी जरूरतें पूरी होंगी।

बल्कि देश में अगली पीढ़ी के मेडिकल टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स को प्रशिक्षण देने में भी मदद करेगा।जिससे यह इनोवेटर्स प्रभावी उपकरण बना सकेंगे। इस बाबत मंत्रालय ने 11वें वार्षिक मेडटेक समिट का भी आयोजन किया।

बॉयोडिजाइन कार्यक्रम का क्रियान्वयन जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा एम्स और आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर संयुक्त रूप से किया गया है। इस विषय में उठने वाले इंटलेक्चुअल प्रोपर्टी और तकनीकी-कानूनी गतिविधियों के प्रबंधन के लिए विभाग ने बॉयोटेक कंसॉरशियम इंडिया लिमिटेड को प्राधिकृत किया है। 

समिट का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ़ हर्षवर्धन ने जोर देते हुए कहा कि सामाजिक रूप से जरूरत और महत्ता के आधार पर आम जनता के लिए उपयोगी आविष्कार करने की जरूरत है।

उन्होंने इस कार्यक्रम के तहत तमाम भागीदारों द्वारा उन्नत मेडिकल उपकरण विकसित करने के लिए किए प्रयासों की भी सराहना की। डीबीटी के सचिव प्रोफेसर के़ विजय.राघवन ने कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नीतिगत रूपरेखा के अलावा मंत्रालय से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया, कनाड़ा, फिनलैंड, जर्मनी, जापान, सिंगापुर, यूके और अमेरिका जेसे देशों के सरकारी संगठनों के लीडर, शैक्षणिक समुदाय, मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री, स्टार्ट-अप्स, अस्पतालों, डिजाइन, बिजनेस और इंजीनियरिंग इंस्ट्टीट्यूट के प्रतिनिधि शामिल हुए।

एम्स के डॉयरेक्टर प्रोफेसर आर. गुलेरिया ने गुणवत्ता आधारित सस्ते व उत्तम मेडिकल उपकरण बनाने की अपील करते हुए कहा कि इनकी ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं तक पहुंच होनी चाहिए।

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन की प्रो-वाइस, प्रोवोस्ट (साउथ एशिया) प्रोफेसर मैरी लाल ने हेल्थ एजुकेशन और इंजीनियरिंग में अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर जोर दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने स्टार्ट अप इनएस्सेल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड (बैंगलोर) द्वारा किए गए नॉक्सऐनो उपकरण को लांच किया।

यह पूर्ण रूप से भारत में बनाया गया उत्पाद है। इसकी कीमत 5 हजार रूपए है। यह ऐसा उपकरण है जिसकी मदद से डॉक्टर खासतौर पर 2 से 10 साल के बच्चों की नाक के अंदर फंसी हुई हानिकारक वस्तु को आसानी से बाहर निकाल सकते हैं। ऐसी उम्मीद है कि यह उपकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, क्लिनिक और छोटे अस्पतालों तक 2020 तक पहुंचेगा। 

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