Top

आरुषि हत्याकांड: 'आरुषि' नाम की किताब में सीबीआई की जांच पर उठे 5 सवाल

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 12 2017 10:47AM IST
आरुषि हत्याकांड: 'आरुषि' नाम की किताब में सीबीआई की जांच पर उठे 5 सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट सबसे चर्चित आरुषि हत्याकांड के मामले में सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजेश तलवार-नुपुर तलवार की अपील पर आज सुनवाई करेगा। 

आरुषि और हेमराज की हत्या का केस सीबीआई के पास पहुंचा तो 26 नवंबर 2013 को सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को दोषी करार दिया। लेकिन अभी भी सीबीआई ने तलवार दंपत्ति पर पांच बड़े सवाल उठाए हैं। 

सीबीआई कोर्ट के आदेश के बाद एक पत्रकार अविरुक सेन ने आरुषि हत्याकांड को लेकर एक किताब लिखी। जिसमें उन्होंने सीबीआई की जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए।

ये भी पढ़ें - शहीद जवानों के शव गत्ते के डिब्बों में रखकर लाने पर बड़ा विवाद, सेना ने दी सफाई

पहला आरोप- 'आरुषि' नाम की किताब में सबसे पहला सवाल उठाया है कि आरुषि हत्याकांड में तस्वीरों और तथियों से छेड़छाड़ की गई। अविरुक सेन ने किताब में लिखा कि हेमराज का खून तलवार दंपति के घर से कुछ दूर स्थित कृष्णा के बिस्तर पर मिला, लेकिन सीबीआई की जांच टीम को इसका संज्ञान नहीं लिया।

दूसरा आरोप- तलवार दंपति का आरोप एक तरफ था कि घर के बाहर कोई बाहरी आदमी आया था। जबकि सीबीआई ने कहा कि हेमराज का तकिया और उसका खोल, जिस पर खून लगा था, वो आरुषि के कमरे से मिले थे। जहां पर सीबीआई जांच पर सवाल उठते हैं।

तीसरा आरोप- आरुषि हत्या कांड में को गोल्फ स्टिक पर भी किताब के लेखक अविरुक ने सवाल उठाए हैं कि आखिर जब आरुषि की हत्या राजेश तलवार ने एक गोल्फ़ स्टिक से की गई तो फिर कोर्ट में दूसरी गोल्फ स्टिक क्यों और किस लिए पेश की गई। जबकि फॉरेंसिक जांच के दौरान स्टिक से संबंधिक किसी भी बात का सबूत नहीं मिला था। 

चौथा आरोप- अविरुक ने किताब में लिखा कि आखिर आरुषि और हेमराज हत्याकांड में ईमेल का इस्तेमाल क्यों किया गया। और सीबीआई अधिकारियों ने ने सरकारी ईमेल आईडी के इस्तेमाल के बजाए हेमराज के नाम वाले ईमेल का इस्तेमाल क्यों और किस लिए किया।

ये भी पढ़ें - हनीप्रीत को राजस्थान लेकर पहुंची एसआईटी टीम, अब खुलेंगे ये राज

पांचवां आरोप- 'आरुषि' किताब में घर में काम करने वाली बाई को लेकर भी सीबीआई जांच पर कई सवाल उठाए हैं। बाई ने कोर्ट में कहा कि उन्हें जो समझाया गया वो वही बयान दे रही हैं। कोर्ट में भारती के बयान का मतलब निकाला गया कि दरवाजा बाहर से खोलने की कोशिश की गई, क्योंकि दरवाजा अंदर से बंद था। अगर दरवाजा अंदर से बंद था तो बाहर से कोई नहीं आया और घर में तलवार दंपति के अलावा कोई नहीं था।

16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के एक घर में 14 साल की आरुषि का शव मिला था. अगले दिन घर में काम करने वाले हेमराज का शव घर की छत पर मिला था

गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को राजेश व नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे एक दिन पहले इनको दोषी ठहराया गया था। आरुषि इनकी बेटी थी। राजेश, नुपुर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं।

ADS

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
aarushi book raised many questions on the cbi probe into the murder

-Tags:#Aarushi Murder Case#CBI#Allahabad High Court#Talwar
mansoon
mansoon

ADS

ADS

मुख्य खबरें

ADS

ADS

ADS

ADS

Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo