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22 लड़कियों के साथ रेप, कोर्ट ने हेडमास्टर को सुनाई 55 साल की सजा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 21 2017 2:27AM IST
22 लड़कियों के साथ रेप, कोर्ट ने हेडमास्टर को सुनाई 55 साल की सजा

मदुरै जिले में एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर ने 22 लड़कियों का यौन शोषण किया, जिसके बाद उसे मंगलवार को एक विशेष अदालत ने 55 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। 

अदालत ने एस अरोकियासमी पर पोधुंबू गांव के स्कूल में 91 लड़के और लड़कियों का यौन शोषण करने के मामले में जुर्माना लगाया है। जुर्माने के 3.4 लाख रुपए 22 लड़कियों को वितरित किए जाएंगे, जिनमें दलित भी शामिल हैं। 

अपर जिला जज आर शनमुगासुंदरम ने अरोकियासमी को भारतीय दंड संहिता की एससीएसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी पाया। इस फैसले को हर नजरिये से मील का पत्थर माना जा रहा है। 

हालांकि, न्यायाधीश ने सी अमली रोज और शनमुगा कुमारसमी समेत विक्टर को बरी कर दिया, जिन पर हेडमास्टर के अपराध में मदद करने का आरोप था। 

गौरतलब है कि एक पीड़ित की मां ने इस मामले को सात साल पहले पुलिस के सामने रखा था, जिसके बाद पुलिस ने हेडमास्टर समेत 3 अन्य शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। 

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पी परिमलादेवी ने कहा, 'पहली बार देश में विशेष अदालतों के लिए अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में एक अपराधी को 50 वर्ष से अधिक कारावास की सजा देकर पीड़ितों को उचित भुगतान करने का प्रावधान किया गया है।' 

उनके मुताबिक मदुरै जिले में पोधुंबू के सरकारी हाईस्कूल में कई लड़कों समेत 91 छात्रों का अरोकियासमी के द्वारा यौन शोषण किया गया था। परिमलादेवी ने कहा 'पंजू का बच्चा उन लोगों में से एक था, जिसका शोषण हेडमास्टर द्वारा किया गया था। 

इसके बाद पंजू ने साहस दिखाते हुए आरोपियों को जेल भिजवा दिया। दुर्भाग्य से वह फैसले को सुनने और उस पर खुश होने के लिए जीवित नहीं हैं।' ट्रायल पीरियड के दौरान मामले का कई बार मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा भी संज्ञान लिया गया। 

हालांकि, सबसे पहले उच्च न्यायालय ने ट्रायल को मदुरै की नियमित महिला अदालत से स्थानांतरित कर एससीएसटी अधिनियम के तहत विशेष अदालत में भेजने के लिए सिफारिशें की। 

यहां तक कि न्यायमूर्ति एस नागमुथु ने मामले को विशेष अदालत में भेजने के लिए आदेशित कर दिया। इसके बावजूद अभियोजक पुरुष होने की वजह से काफी दिक्कतें आईं। 

एआईडीडब्लूए और पोधुंबू के ग्रामीणों की याचिकाओं पर अदालत ने जया इंद्रा पटेल को महिला अदालत में बतौर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया। इसके बाद, अदालत ने परिमलादेवी को निर्मला रानी की सलाह पर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया।

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